प्रगति @ 50: सक्रिय कार्यप्रणाली और तकनीक से शासन को सुदृढ़ व स्थायी बनाने की दिशा में बड़ा कदम
नई दिल्ली | जनवरी 2026 प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संचालित प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) मैकेनिज्म के 50 सत्र पूर्ण होने के अवसर पर आज कैबिनेट सचिव एवं विभिन्न विभागों के सचिवों ने मीडिया को इसके परिणामों और प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी।
ब्रीफिंग के दौरान कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रगति आधारित इकोसिस्टम के अंतर्गत एक संरचित परियोजना एवं मुद्दा एस्केलेशन तंत्र विकसित किया गया है, जो केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न स्तरों पर लंबित मुद्दों की व्यवस्थित निगरानी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करता है।
समस्या समाधान की स्पष्ट व्यवस्था
कैबिनेट सचिव ने कहा किप्रारंभिक स्तर पर मुद्दों का समाधान संबंधित मंत्रालयों में किया जाता है।जटिल और महत्वपूर्ण मामलों को उच्च-स्तरीय संस्थागत तंत्र के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है।राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर अंतिम समीक्षा माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली प्रगति बैठकों में की जाती है।
अंतर-मंत्रालयी समन्वय को मिला बल
उन्होंने रेखांकित किया कि यह एस्केलेशन फ्रेमवर्कअंतर-मंत्रालयी समन्वय को मजबूत करता हैसमयबद्ध निर्णय-निर्माण को प्रोत्साहित करता हैराष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में कार्यान्वयन से जुड़ी बाधाओं के त्वरित समाधान को संभव बनाता है कैबिनेट सचिव के अनुसार, ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म उच्चतम स्तर पर निरंतर निगरानी और समीक्षा के माध्यम से जवाबदेही तय करने तथा परियोजनाओं की गति बढ़ाने में एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
वैश्विक मान्यता
प्रगति मॉडल की प्रभावशीलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। ऑक्सफोर्ड सैड बिज़नेस स्कूल द्वारा किए गए एक अध्ययन में इसे सुशासन और डिजिटल प्रशासन का प्रभावशाली उदाहरण बताया गया है।

