क्या वाकई EVM में धांधली होती है? प्रशांत किशोर के सवाल ने खोल दी पूरी बहस
आज हम बात करने वाले हैं उस सवाल की, जो पिछले 10 साल से पूरे देश के दिमाग में घूम रहा है, लेकिन कोई विपक्षी नेता इसका जवाब नहीं देना चाहता। सवाल बहुत सीधा है,
अगर आपको सच में लगता है कि EVM में धांधली होती है,
अगर आपको यकीन है कि मशीन आपका वोट चोरी कर लेती है,
तो फिर राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, तेजस्वी यादव… ये सारे नेता हर बार उसी EVM से चुनाव क्यों लड़ते हैं? अगर खेल पहले से फिक्स है, तो मैदान में उतरते ही क्यों हो?
घर बैठ जाओ ना! बायकॉट कर दो पूरा चुनाव!
लेकिन नहीं… पहले रोओ, चिल्लाओ, हार जाओ, फिर पांच साल बाद फिर उसी मशीन के सामने कतार में खड़े हो जाओ। ये सवाल किसी और ने नहीं, खुद प्रशांत किशोर ने पूछा है। और जब PK बोलते हैं ना, तो दीवार पर लिखाई साफ दिखने लगती है।
अभी कुछ दिन पहले प्रशांत किशोर बिहार में थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार ने उनसे EVM पर सवाल पूछा। प्रशांत किशोर मुस्कुराए और बोले,
“जो लोग EVM में धांधली की बात करते हैं ना, उनसे एक सवाल पूछो,
अगर आपको सच में लगता है कि EVM से खेल होता है, तो आप उसी EVM से चुनाव क्यों लड़ते हो भाई? विश्वास नहीं है तो लड़ो ही मत। चुनाव बायकॉट कर दो। लेकिन ऐसा कोई करता नहीं। हार गए तो EVM चोर, जीत गए तो EVM भगवान। ये ड्रामा 2014 से चल रहा है।”एक लाइन में पूरा विपक्ष नंगा हो गया।
2024 में फिर लोकसभा हारे → अचानक EVM शैतान देखा आपने? EVM का धर्म बदलता रहता है, जीत-हार के हिसाब से।जब जीतते हैं तब कोई नहीं कहता कि “हम तो EVM से जीते हैं, ये तो गलत है, बैलेट पेपर से कराओ दोबारा चुनाव”। कभी सुना ऐसा? कभी नहीं। क्योंकि तब EVM बहुत अच्छी होती है।सबसे मजेदार example केजरीवाल का है।
2015 और 2020 में दिल्ली में 67-62 सीटें लाए। तब EVM को गले लगाते थे। 2024 लोकसभा में दिल्ली में 0 सीट आईं, तो अचानक EVM हैक हो गई। भाई, 4 साल में मशीन ने पार्टी पहचानना सीख लिया क्या? एक और बात। विपक्ष वाले चिल्लाते हैं कि “हमें कोर्ट गए, सुप्रीम कोर्ट ने VVPAT की 100% गिनती नहीं मानी”।
अरे भाई, सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2024 में फिर से साफ-साफ कह दिया कि EVM पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है। जज साहब ने तो यहाँ तक कहा कि “EVM पर शक करना मतलब चुनाव आयोग और 4 करोड़ कर्मचारियों पर शक करना है”। लेकिन नहीं मानेंगे, क्योंकि EVM रोना एक बहुत बड़ा बिजनेस बन चुका है। हार का ठीकरा EVM पर फोड़ दो, कार्यकर्ताओं को बहाना मिल जाता है, अगले चुनाव तक फिर वही जुमले।प्रशांत किशोर ने ठीक कहा,
“ये लोग जानबूझकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। असल मुद्दा EVM नहीं, इनकी अपनी नाकामी है। संगठन नहीं, नेतृत्व नहीं, विजन नहीं, बस एक ही नारा – EVM चोर है।”और सबसे हैरानी की बात, ये सारे नेता विदेशी यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए हैं, इंजीनियर हैं, वकील हैं, लेकिन इनको ये नहीं समझ आता कि EVM को हैक करना तकनीकी रूप से नामुमकिन है। दुनिया के साइंटिस्ट, हैकर्स बार-बार कोशिश कर चुके हैं, कोई एक भी EVM हैक नहीं कर पाया।फिर भी ये ड्रामा चलता रहेगा। क्योंकि सच बोलने से वोट नहीं मिलता, EVM को गाली देने से मिलता है।
अगर कल को बैलेट पेपर वापस आ गया, तो ये वही लोग सबसे ज्यादा खुश होंगे जो आज EVM को गाली दे रहे हैं। क्यों? क्योंकि बैलेट पेपर में बूथ कैप्चरिंग, बोगस वोटिंग, लूट-खसोट आसान है। 90 के दशक में बिहार-यूपी में क्या होता था, सबको याद है। ये लोग पुराना खेल फिर से खेलना चाहते हैं। EVM ने उनकी दुकान बंद कर रखी है, इसलिए रो रहे हैं।तो बताओ दोस्तों, प्रशांत किशोर सही कह रहे हैं या नहीं?
कमेंट में जरूर लिखना – “PK सही है” या “विपक्ष सही है”।
