प्रयागराज माघ मेला: संगम तट पर बही भक्ति और संगीत की 'त्रिवेणी', मालिनी अवस्थी के सुरों से 'कला संगम' का भव्य आगाज
प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में चल रहा माघ मेला केवल आस्था की डुबकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विविधता का एक जीवंत उदाहरण भी है। इसी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए माघ मेला क्षेत्र में उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित 'कला संगम' कार्यक्रम की भव्य शुरुआत हो गई है। मेला क्षेत्र के परेड ग्राउंड में सजे इस मंच पर अब अगले कुछ हफ्तों तक भक्ति, संस्कृति और संगीत की अविरल धारा बहेगी।
पहले दिन ही झूम उठे श्रोता: पद्म श्री मालिनी अवस्थी ने बांधा समां
'कला संगम' के पहले दिन का मुख्य आकर्षण प्रख्यात लोक गायिका और पद्म श्री से सम्मानित मालिनी अवस्थी रहीं। जब उन्होंने मंच से भजनों की प्रस्तुति शुरू की, तो वहां मौजूद तमाम श्रोता भाव-विभोर हो गए। उनके सुरों ने संगम की रेती पर भक्तिमय माहौल बना दिया।
शंख वादन और लोकगीतों से गूंजा मेला क्षेत्र
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत उदय चन्द्र परदेशी और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत देवी लोकगीतों से हुई, जिसने कार्यक्रम के लिए एक पवित्र आधार तैयार किया। इसके बाद, वाराणसी से आए राम जनम और उनकी टीम के सामूहिक 'शंख वादन' ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। शंखों की गूंज ने पूरे मेला क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया।
शास्त्रीय और लोक कला का अद्भुत संगम
पहले दिन मंच पर शास्त्रीय और लोक विधाओं का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला:
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गायन: संगीता मिश्रा ने अपने लोक गायन से मिट्टी की खुशबू बिखेरी, तो वहीं लखनऊ के वरुण मिश्रा ने अपनी शास्त्रीय गायन प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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नृत्य: नृत्य के क्षेत्र में भी शानदार जुगलबंदी देखने को मिली। कीर्ति श्रीवास्तव ने पारंपरिक 'डेढ़इया' लोक नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि नीता जोशी ने कथक नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का कुशल संचालन आभा मधुर द्वारा किया गया। पहले दिन कुल 6 विविध प्रस्तुतियां मंच पर हुईं।
30 जनवरी तक चलेगा सांस्कृतिक महाकुंभ
माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि यह 'कला संगम' कार्यक्रम 04 जनवरी से शुरू होकर 30 जनवरी तक चलेगा। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस 20 से अधिक दिनों तक चलने वाले महोत्सव में 120 से अधिक प्रख्यात लोक और शास्त्रीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। आने वाले दिनों में मेला क्षेत्र में कला और संस्कृति के कई और रंग देखने को मिलेंगे।
