सनातन संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने के लिए गुरुकुलों का संरक्षण जरूरी: पुंडरीक गोस्वामी

श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन लीला का वर्णन, युवाओं से संवाद का भी आयोजन
 
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लखनऊ। “राधा रमण हरि बोल… हरि बोल” के संकीर्तन और जयकारों से डीएवी कॉलेज परिसर भक्तिमय हो उठा। पंडित रास बिहारी तिवारी मार्ग, ऐशबाग स्थित डीएवी कॉलेज में श्री राधा रमण सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत राधा रमण कथा के पंचम दिवस श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी और गोवर्धन लीला का भावपूर्ण श्रवण किया।

कथा व्यास मन माधव गौड़ेश्वर वैष्णवाचार्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कथा प्रारंभ करने से पहले ‘राधा रमण हरि बोल, हरि बोल’ का संकीर्तन कराया। संकीर्तन शुरू होते ही श्रद्धालु तालियों के साथ भक्ति में लीन हो गए। पूरा पंडाल ‘राधा रमण लाल की जय’ और ‘राधा वल्लभ लाल की जय’ के जयकारों से गूंज उठा।

श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं ने किया भावविभोर

श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए माखन चोरी और गोवर्धन लीला के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। उन्होंने इन प्रसंगों के माध्यम से भगवान की बाल सुलभ चंचलता, वात्सल्य और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का भावपूर्ण चित्रण किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

इस अवसर पर अयोध्या धाम के प्रमुख संत एवं रानोपाली स्थित श्री उदासीन संगत ऋषि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत डॉ. स्वामी श्री भरत दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए।

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गुरुकुलों के संरक्षण और संवर्धन पर दिया जोर

श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल शक्ति उसके संस्कारों और आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है। सनातन परंपरा में ज्ञान, भक्ति और कर्म का विशेष महत्व है। इन मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए गुरुकुल व्यवस्था का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है।

उन्होंने गुरुकुलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में अनेक गुरुकुलों को संरक्षण और संसाधनों की आवश्यकता है। उनके अनुसार, गुरुकुलों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलता है।

महाराज जी ने बताया कि डॉ. भरत दास महाराज स्वयं गुरुकुल व्यवस्था के संचालन और उसे सुव्यवस्थित एवं संस्कारित स्वरूप देने के प्रयास में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार भी संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास कर रही है।

उन्होंने सनातन समाज से पुराने और स्थापित गुरुकुलों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए एक स्वतंत्र संस्था गठित करने की दिशा में विचार करने का आह्वान किया। अभिभावकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ कुछ समय गुरुकुल में भी भेजना चाहिए, ताकि वे भारतीय संस्कारों, संस्कृति और जीवन मूल्यों से परिचित हो सकें।

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युवाओं से विशेष संवाद का आयोजन

आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि 9 अक्टूबर 2026 को अपराह्न 3 बजे से 4 बजे तक युवाओं के साथ विशेष संवाद का आयोजन रखा गया है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की। कार्यक्रम में विधायक नीरज बोरा भी मौजूद रहे। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण किया।

आयोजन में ये लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में आयोजक अमरनाथ मिश्र, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, समीर मित्तल, नवीन गुप्ता, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अनुराग मिश्रा, आनंद रस्तोगी और शिवम अग्रवाल सहित आयोजन समिति के अनिल कुमार मिश्रा, मनोज राय, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला, हनी, साकेत शर्मा और विमलेश तिवारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कथा स्थल पर पूरे समय भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।

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