भारतीय ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा, BBAU और चंबल आर्काइव्स न्यास के बीच हुआ समझौता
दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, अकादमिक अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए दोनों संस्थाएं करेंगी सहयोग
लखनऊ। भारतीय इतिहास, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने की दिशा में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (BBAU) और लखनऊ स्थित चंबल आर्काइव्स न्यास के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करना, दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और अकादमिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है।
समझौते के अवसर पर चंबल आर्काइव्स न्यास के उपाध्यक्ष माधवेंद्र पोरवाल ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह साझेदारी युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ प्राचीन ज्ञान संपदा को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भारतीय ज्ञान प्रणाली उत्कृष्टता केंद्र को मिलेगा सहयोग
BBAU अपने अकादमिक और अनुसंधान कार्यों के लिए जाना जाता है। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence in Indian Knowledge Systems) को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को चंबल आर्काइव्स के ऐतिहासिक संग्रह का उपयोग कर शोध कार्य करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा पारंपरिक ज्ञान, अभिलेखीकरण और दस्तावेजों के संरक्षण से जुड़ी तकनीकों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और कौशल विकास की पहल भी आयोजित की जाएंगी।
दुर्लभ दस्तावेजों और पांडुलिपियों के संरक्षण में जुटा है चंबल आर्काइव्स न्यास
चंबल आर्काइव्स न्यास दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेजों, प्राचीन पांडुलिपियों, पुस्तकों, लिथोग्राफ और सांस्कृतिक कलाकृतियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण तथा पुनर्स्थापना के लिए कार्यरत है। न्यास का उद्देश्य ऐसी ऐतिहासिक विरासत को सहेजना है, जिसके लुप्त होने की आशंका है, और उसे आम लोगों तथा अकादमिक जगत की पहुंच में लाना है।
संस्था का संग्रह इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल से भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी सामग्री को संरक्षित करने के प्रयासों को गति मिल सकती है।
'बुक बडी' पहल से विद्यार्थियों तक पहुंच रहीं पुस्तकें
चंबल आर्काइव्स न्यास ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित करता है। इसकी 'बुक बडी' (Book Buddy) पहल शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक प्रयास है।
यह पहल चक्रीय अर्थव्यवस्था की अवधारणा पर आधारित है। इसके माध्यम से शैक्षिक पुस्तकों और पठन सामग्री का संग्रह किया जाता है और उन्हें विद्यार्थियों के बीच बारी-बारी से उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न होने देना और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं तक किताबें पहुंचाना है।
अयोध्या से जुड़ी दुर्लभ रामायण का भी होगा संरक्षण
इस साझेदारी के अंतर्गत चंबल आर्काइव्स के संग्रह में मौजूद विशिष्ट ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सामग्री को भी महत्व दिया जाएगा। संस्था के पास अयोध्या से जुड़ी एक दुर्लभ रामायण के साथ पारंपरिक ग्रंथ और दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।
इन दुर्लभ पांडुलिपियों और रामायण के विशेष संस्करणों के डिजिटलीकरण से धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर शोध करने वाले विद्वानों को महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री मिल सकेगी। इससे प्राचीन ग्रंथों और सांस्कृतिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
अकादमिक और तकनीकी सहयोग से खुलेगी नई राह
चंबल आर्काइव्स न्यास के उपाध्यक्ष माधवेंद्र पोरवाल ने विश्वास जताया कि BBAU के साथ यह अकादमिक और तकनीकी साझेदारी भविष्य में अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और ऐतिहासिक धरोहर को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रखने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
यह समझौता भारतीय इतिहास, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के अध्ययन को नए अवसर प्रदान करने के साथ विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अकादमिक जगत के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
