लखनऊ का गौरव: पियूष सिंह चौहान बने TEDxGGSIPU 2026 में वक्तव्य देने वाले शहर के सबसे युवा शिक्षाविद्
नई दिल्ली/लखनऊ | 7 अप्रैल, 2026: लखनऊ के शैक्षिक और नेतृत्व जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, एस.आर. ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (SRGI) के वाइस चेयरमैन पियूष सिंह चौहान ने वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ी है। वे लखनऊ के पहले ऐसे युवा शिक्षाविद् बन गए हैं, जिन्हें प्रतिष्ठित TEDx प्लेटफॉर्म (TEDxGGSIPU 2026) पर बतौर वक्ता आमंत्रित किया गया।
यह आयोजन गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के डायरेक्टरेट ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) के अंतर्गत ‘सृजन’ के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) क्लब द्वारा किया गया।
थीम: "OG – ओल्ड इज गोल्ड: विरासत से नेतृत्व तक"
इवेंट की केंद्रीय थीम के अनुरूप, पियूष सिंह चौहान ने दर्शन, नेतृत्व और व्यक्तिगत अनुभवों का एक अनूठा समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने आज के बदलते दौर में 'मूल्य-आधारित नेतृत्व' की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा:
"सोना आराम में नहीं बनता, बल्कि तीव्र गर्मी और दबाव में तपकर तैयार होता है। ठीक इसी तरह, सच्चा नेतृत्व चुनौतियों से भागने में नहीं, बल्कि उन्हें स्वीकार करने से विकसित होता है।"
दो पत्थरों की कहानी: संघर्ष ही सफलता की सीढ़ी
अपने संबोधन में उन्होंने दो पत्थरों का उदाहरण देते हुए नेतृत्व का गहरा दर्शन समझाया।
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साधारण: वह पत्थर जिसने छेनी की मार (पीड़ा) से बचने की कोशिश की और अंततः एक साधारण कंकड़ रह गया।
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पूजनीय: वह पत्थर जिसने हर चोट को सहा और अंततः एक पूजनीय मूर्ति का रूप लिया। इस कहानी के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि विपरीत परिस्थितियाँ बाधा नहीं, बल्कि उत्कृष्टता की सीढ़ी हैं।
युवा शक्ति: राष्ट्र की सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी
भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर चर्चा करते हुए पियूष ने कहा कि देश की 65% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। उन्होंने छात्र शक्ति को 'विघटनकारी ताकत' के बजाय राष्ट्र की 'सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी' बताया और युवाओं को नवाचार व राष्ट्र निर्माण की दिशा में ऊर्जा लगाने का आह्वान किया।
पिता के विजन और विरासत का सम्मान
पियूष सिंह चौहान ने अपने संस्थागत सफर का श्रेय अपने पिता और SRGI के संस्थापक पवन सिंह चौहान को दिया। उन्होंने याद किया कि कैसे 2009 में मात्र 240 छात्रों के साथ शुरू हुआ यह सफर आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पुरानी विरासत (Old) आज के आधुनिक नेतृत्व (Gold) का आधार बनी हुई है।
एक साहसी आह्वान: "मथुरा छोड़नी ही होगी"
अपने भाषण के समापन पर उन्होंने युवाओं को एक क्रांतिकारी संदेश दिया:
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विरासत को सक्रिय नेतृत्व में बदलें।
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दबाव को विकास का माध्यम समझें।
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सीमाओं से बाहर निकलकर स्थायी प्रभाव पैदा करें।
उनके अंतिम शब्दों ने दर्शकों में जोश भर दिया:
"अपनी खुद की द्वारका बसाने के लिए, आपको जीती हुई मथुरा को छोड़ने का साहस रखना होगा।"
संस्थान और शहर के लिए ऐतिहासिक पल
यह उपलब्धि न केवल पियूष सिंह चौहान की व्यक्तिगत उत्कृष्टता को दर्शाती है, बल्कि SRGI को एक ऐसे प्रगतिशील संस्थान के रूप में स्थापित करती है जो राष्ट्रीय स्तर पर 'थॉट लीडरशिप' प्रदान कर रहा है। लखनऊ के शैक्षिक नेतृत्व की इस वैश्विक पहचान पर SRGI के छात्रों और हितधारकों ने गर्व व्यक्त किया है।
