वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के शिल्पकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

Prime Minister Narendra Modi, the architect of India's rising stature on the global stage.
 
Prime Minister Narendra Modi, the architect of India's rising stature on the global stage.

डॉ. मोहन यादव | विनायक फीचर्स

राजनीति और सार्वजनिक जीवन में अनेक ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कुछ अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए पहचाने गए तो कुछ ने संगठन और राजनीतिक कौशल के माध्यम से अलग पहचान बनाई। लेखक के दृष्टिकोण से, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सार्वजनिक जीवन की यात्रा संगठनात्मक राजनीति से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके लंबे राजनीतिक सफर को रेखांकित करती है।

नरेन्द्र मोदी ने अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला और मई 2014 तक इस पद पर रहे। मई 2014 में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके करीब 13 वर्ष के कार्यकाल और बाद में केंद्र सरकार के नेतृत्व ने उनके सार्वजनिक जीवन को एक लंबी प्रशासनिक निरंतरता प्रदान की।

विदेश नीति और वैश्विक मंच पर भारत

मोदी सरकार की विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता, राष्ट्रीय हितों और विभिन्न शक्ति-केंद्रों के साथ संबंधों को संतुलित रखने पर जोर दिखाई देता है। भारत ने अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया है।

भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभाली है और फरवरी तथा मई में नई दिल्ली में BRICS से संबंधित महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं। सितंबर 2026 में नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन निर्धारित किया गया था।

लेखक के अनुसार, BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका उसे वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को उठाने और विभिन्न देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर देती है।

संकट के समय मानवीय सहायता और नागरिकों की वापसी

भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान घरेलू स्तर पर स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई कार्यक्रम चलाए और विभिन्न देशों को दवाओं तथा अन्य चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति भी की। इसी तरह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए सरकार ने अलग-अलग निकासी अभियान संचालित किए।

यूक्रेन संकट के दौरान भारतीय विद्यार्थियों और अन्य नागरिकों की वापसी के लिए भी अभियान चलाया गया। ऐसे अभियानों को सरकार ने विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सहायता की अपनी प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद

नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे को विदेश नीति तथा सार्वजनिक विमर्श में प्रमुख स्थान मिला है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद सरकार ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी नीति को अधिक कठोर कार्रवाई से जोड़ा। बाद के वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के मुद्दे को भी भारत ने विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर उठाया।

लेख में ऑपरेशन सिंदूर को भी आतंकवाद के खिलाफ भारत के हालिया रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया गया है। इस विषय पर सरकार के आधिकारिक बयानों और विभिन्न राजनीतिक पक्षों की व्याख्याओं में अंतर हो सकता है; इसलिए इसके प्रभाव और परिणाम का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोणों से किया जाता है।

जनकल्याण योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत प्रमुख हैं।

सरकार इन योजनाओं को अंतिम छोर तक सरकारी सेवाओं और लाभों की पहुंच बढ़ाने की अपनी नीति का हिस्सा बताती है। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आयुष्मान भारत को व्यापक स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध कराने वाली प्रमुख सरकारी योजनाओं में शामिल किया गया है।

इन योजनाओं की वास्तविक उपलब्धियों और प्रभाव को लेकर सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ स्वतंत्र संस्थानों और विशेषज्ञों के अलग-अलग आकलन भी सामने आते रहे हैं। इसलिए इनके प्रभाव का मूल्यांकन योजना-विशेष और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

स्वच्छता से डिजिटल इंडिया तक

2014 के बाद स्वच्छ भारत मिशन को राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं स्वच्छता अभियान में भाग लेकर नागरिकों से इसमें सहभागी बनने का आह्वान किया। मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में स्थानीय निकायों और नागरिक समूहों ने भी स्वच्छता से जुड़े अभियानों में भाग लिया।

इसी अवधि में मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया। इन पहलों का उद्देश्य विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं, उद्यमिता और घरेलू उत्पादन की क्षमता को बढ़ावा देना रहा है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में चंद्रयान-3 मिशन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अनुसार, चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी क्षेत्र में सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंड हुआ। मिशन ने चंद्र सतह, भौतिक गुणों, भूकंपीय गतिविधियों और प्लाज्मा वातावरण से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन किए।

इस उपलब्धि ने भारत की अंतरिक्ष तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया।

युवाओं और उद्यमिता पर फोकस

भारत की बड़ी युवा आबादी को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना मोदी सरकार की नीतियों का एक प्रमुख विषय रहा है। कौशल विकास, मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल उद्यमिता जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार तथा उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

इन योजनाओं का प्रभाव रोजगार, उद्यमिता और युवा आय पर किस स्तर तक पड़ा, इसका आकलन विभिन्न सरकारी तथा स्वतंत्र अध्ययनों में अलग-अलग संकेतकों के आधार पर किया जाता है।

महिला सशक्तीकरण की पहल

महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी पहलें सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों में रही हैं। लखपति दीदी अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधन को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहल के रूप में देखा गया है।

संस्कृति और आधुनिक विकास का मेल

प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी सार्वजनिक विमर्श में प्रमुखता दी है। योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की भारत की पहल इसी क्रम में उल्लेखनीय है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया था।

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियां, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी सरकार ने भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर प्रस्तुत किया है। वहीं जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक बदलाव, विशेष रूप से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में 2019 में किए गए परिवर्तन, भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से बहस का विषय रहे हैं।

‘मन की बात’ से सीधा संवाद

प्रधानमंत्री मोदी का रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ आम नागरिकों से संवाद का एक प्रमुख माध्यम बना है। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नवोन्मेषकों और स्थानीय स्तर पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों का उल्लेख किया जाता रहा है।

लेखक के अनुसार, यह संवाद व्यवस्था शासन और नागरिकों के बीच सहभागिता की अवधारणा को मजबूत करने का एक माध्यम है।

25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2025 को सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष में प्रवेश किया था। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने इसी दिन 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। इस प्रकार अक्टूबर 2025 में उनके सरकार के प्रमुख के रूप में 25वें वर्ष की शुरुआत हुई।

लेखक डॉ. मोहन यादव के अनुसार, मोदी की सार्वजनिक यात्रा संगठन से शुरू होकर गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री तक पहुंची है। लेख में इस यात्रा को सेवा, परिश्रम और राष्ट्र निर्माण की अवधारणा से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री के नेतृत्व की प्रशंसा की गई है।

लेख के अंत में लेखक राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भागीदारी का आह्वान करते हुए लिखते हैं कि देश के विकास की प्रक्रिया में प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकता है। लेख का केंद्रीय विचार यही है कि शासन और विकास की दिशा केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता से भी निर्धारित होती है।

(विनायक फीचर्स)

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