एमएलके पीजी कॉलेज में शिक्षकों के लिए प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रम आयोजित
शिक्षण में समय प्रबंधन एवं व्यावसायिक नैतिकता पर हुआ सार्थक मंथन
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा मिश्रा द्वारा प्रस्तुत स्वस्तिवाचन से हुआ। इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के माननीय सचिव, प्राचार्य, मुख्य नियंता, मुख्य वक्ता प्रो. मुनेश कुमार सहित वरिष्ठ प्राध्यापकगण—प्रो. राघवेंद्र सिंह, प्रो. एम. अंसारी, प्रो. विमल प्रकाश वर्मा, प्रो. अशोक कुमार, श्री तारिक कबीर, डॉ. दिनेश मौर्य, सभी विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता प्रो. मुनेश कुमार (शिक्षा शास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने अपने प्रभावशाली संबोधन में शिक्षण प्रक्रिया में समय प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय का योजनाबद्ध और विवेकपूर्ण उपयोग न केवल शिक्षक की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता को भी अधिक प्रभावी बनाता है। उन्होंने कहा कि एक अनुशासित समय-सारिणी शिक्षक को अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों के कुशल निर्वहन में सहायता प्रदान करती है।

व्यावसायिक नैतिकता पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्य ही एक शिक्षक की वास्तविक पहचान होते हैं और यही उसकी सामाजिक जिम्मेदारी का मूल आधार हैं। शिक्षक का आचरण, विचार और व्यवहार समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए नैतिकता का पालन शिक्षक जीवन का अनिवार्य तत्व होना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि निरंतर आत्म-विकास, ज्ञानवर्धन और नवाचार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण से एक सशक्त एवं प्रेरक शिक्षण वातावरण का निर्माण संभव है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जे. पी. पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के विकासोन्मुख कार्यक्रम शिक्षकों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। समय प्रबंधन और नैतिक मूल्यों का समन्वय ही शिक्षण प्रक्रिया को उद्देश्यपूर्ण और प्रभावी बनाता है।
महाविद्यालय प्रबंध समिति के माननीय सचिव रिटायर्ड कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बदलते शैक्षणिक परिदृश्य के अनुरूप शिक्षकों को स्वयं को निरंतर विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के समन्वयक एवं IQAC कोऑर्डिनेटर प्रो. एस. पी. मिश्रा ने कहा कि शिक्षण में अनुशासन, समयबद्धता और नैतिकता का विशेष महत्व है। यह कार्यक्रम शिक्षकों को आत्ममूल्यांकन एवं निरंतर सुधार की दिशा में प्रेरित करता है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. बी. एल. गुप्ता ने कहा कि IQAC द्वारा आयोजित यह पहल शिक्षकों को व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिससे महाविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण और अधिक सकारात्मक एवं प्रभावी होगा।
कार्यक्रम के अंत में IQAC कोऑर्डिनेटर प्रो. एस. पी. मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, मुख्य वक्ता, शिक्षकों, आयोजन समिति एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
