समृद्ध मध्य प्रदेश 2047: पिछड़ेपन से प्रगति की ओर आत्मविश्वास भरी उड़ान

Prosperous Madhya Pradesh 2047: The Amrit Kaal's flight towards a developed state
 
समृद्ध मध्य प्रदेश 2047: विकसित राज्य की ओर अमृत काल की उड़ान

(पवन वर्मा – विनायक फीचर्स)   यदि 23 वर्ष पीछे—2003 तक—मध्य प्रदेश की तस्वीर देखें, तो यह देश के ‘हृदय प्रदेश’ की कठिन हकीकत थी। टूटी-फूटी सड़कें, बिजली की कमी, पेयजल की अनिश्चितता और सरकारी कर्मचारियों के वेतन तक के लिए जद्दोजहद—इन सबके बीच प्रशासनिक तंत्र हताश और जनमानस आशंकित था। तब शायद हर नागरिक के मन में यही प्रश्न था—क्या मध्य प्रदेश कभी इस दुष्चक्र से बाहर निकल पाएगा? आज वही राज्य ‘समृद्ध मध्य प्रदेश 2047’ के विजन के साथ आत्मविश्वास से भरी, ऊँची और महत्वाकांक्षी उड़ान के लिए तैयार दिखता है।

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दूरदृष्टि और सहयोग से तेज़ होती विकास-यात्रा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पिछले दो वर्षों से स्पष्ट कार्ययोजना और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ रही है। इस यात्रा को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का निरंतर सहयोग नई ऊर्जा दे रहा है। ‘अमृत काल’ की इस अवधि में हर नीति और हर निर्णय का लक्ष्य वर्ष 2047 तक मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि देश के अग्रणी विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करना है।

2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

डॉ. मोहन यादव सरकार का प्रमुख संकल्प राज्य की अर्थव्यवस्था को 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना है—ताकि नागरिकों की क्रय-शक्ति और जीवन-स्तर वैश्विक मानकों तक पहुँचे। इसी सोच के साथ वर्ष 2025 को ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ घोषित किया गया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 और क्षेत्रीय सम्मेलनों के माध्यम से 11.09 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलना इस बात का संकेत है कि मध्य प्रदेश वैश्विक निवेशकों की पसंद बन चुका है।
आज 23 लाख से अधिक लघु उद्योग इकाइयाँ सवा करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं। जहाँ कभी बिजली उद्योगों की बाधा थी, वहाँ आज विश्वस्तरीय अधोसंरचना खड़ी है। उल्लेखनीय यह भी कि नए स्टार्टअप्स में 47% भागीदारी महिलाओं की है—जो प्रगतिशील आर्थिक बदलाव का सशक्त संकेत है। ‘निर्यात संवर्धन नीति 2025’ और ‘लॉजिस्टिक नीति’ ने प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ा है।

अन्नदाता की खुशहाली: खेती से सहकारिता तक

कृषि उत्पादन में अग्रणी मध्य प्रदेश अब खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में नए प्रयोग कर रहा है। सिंचाई रकबे के विस्तार से लेकर भावांतर भुगतान और मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना तक—किसानों के खातों में सीधे हजारों करोड़ रुपये का हस्तांतरण हो रहा है।


रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के जरिए कोदो–कुटकी जैसे पारंपरिक अनाजों को वैश्विक पहचान मिली है, जिससे पोषण के साथ जनजातीय समुदायों का आर्थिक सशक्तिकरण भी हुआ है। सहकारिता में पैक्स और डेयरी समितियों को दोगुना करने का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मज़बूत नींव रखेगा; प्रत्येक समिति की 500 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक बनेगी।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान और पर्यटन का विस्तार

‘समृद्ध मध्य प्रदेश 2047’ केवल आर्थिक आँकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का पुनर्जागरण भी है। महाकाल लोक की तर्ज़ पर अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों का विकास हो रहा है। ओंकारेश्वर में ‘एकात्म धाम’ शांति और अद्वैत का संदेश देता है।धार्मिक पर्यटन के साथ ईको-टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म से रोजगार बढ़ा है। ‘एक जिला–एक उत्पाद’ पहल ने चंदेरी–माहेश्वरी साड़ियों से लेकर जनजातीय कला तक को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

अधोसंरचना, डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता

एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, मेट्रो परियोजनाएँ और सुदृढ़ शहरी ढाँचा—मध्य प्रदेश की बदली तस्वीर साफ दिखती है। इसके साथ ‘डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर विशेष जोर है। ‘फेसलेस’ और ‘पेपरलेस’ प्रशासन से पारदर्शिता मोबाइल तक पहुँची है। एक करोड़ से अधिक लंबित राजस्व प्रकरणों का त्वरित निपटारा प्रशासनिक दृढ़ता का प्रमाण है—जो ‘डिजिटल इंडिया’ को ज़मीनी रूप देता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य: भविष्य की नींव

‘सांदीपनी स्कूल’ ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों जैसी सुविधाएँ देकर शिक्षा में बदलाव ला रहे हैं। नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से युवाओं को रोजगार-योग्य बनाया जा रहा है।
स्वास्थ्य में आयुष्मान भारत के साथ हर जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना का लक्ष्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाएगा। लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर बेहतर लिंगानुपात और महिला साक्षरता की राह खोल रही हैं।

समावेशी विकास और अंत्योदय

‘अंत्योदय’ के संकल्प के साथ शुद्ध पेयजल, दिव्यांग प्रशिक्षण और उभयलिंगी व्यक्तियों के लिए गरिमा गृह—ये पहलें बताती हैं कि समावेशिता यहाँ नीति नहीं, कार्यसंस्कृति है।

संकल्प से सिद्धि त

जो प्रदेश कभी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्षरत था, वह आज कुशल नेतृत्व और केंद्र–राज्य सहयोग से वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। स्पष्ट है कि ‘समृद्ध मध्य प्रदेश 2047’ केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से आकार लेती वास्तविकता है। आने वाले दो दशक मध्य प्रदेश को स्वर्णिम बनाने में निर्णायक सिद्ध होंगे।
(विनायक फीचर्स)

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