PSU Banks Performance FY26: सरकारी बैंकों का ऐतिहासिक कमबैक, FY26 में बनाया ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड मुनाफे का कीर्तिमान, GNPA घटकर 1.9%

PSU Banks' Performance FY26: Public sector banks stage a historic comeback, setting a record profit of ₹1.98 lakh crore in FY26; GNPA drops to 1.9%.
 
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा मुनाफा  वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों का कुल शुद्ध लाभ बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर माना जा रहा है। यह प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में हुए सुधारों और बेहतर वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।  GNPA में बड़ी गिरावट  सरकारी बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 1.9 प्रतिशत पर आ गया, जो कई वर्षों का सबसे निचला स्तर है। यह संकेत देता है कि बैंकों ने खराब कर्ज को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।  चार वर्षों में बदली तस्वीर  पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी बैंकों की स्थिति में बड़ा बदलाव दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2021-22 में जहां इन बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ ₹0.67 लाख करोड़ था, वहीं FY26 में यह लगभग तीन गुना बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में GNPA भी करीब 7.3 प्रतिशत से घटकर 1.9 प्रतिशत पर पहुंच गया।  बैंकिंग कारोबार में तेज विस्तार  सरकारी बैंकों का कुल कारोबार भी लगातार बढ़ा है। FY26 में इनका कुल व्यवसाय ₹283 लाख करोड़ के पार पहुंच गया।  जमा राशि (Deposits) में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। FY22 में जहां सरकारी बैंकों के पास ₹107.2 लाख करोड़ की जमा राशि थी, वहीं FY26 में यह बढ़कर ₹156.3 लाख करोड़ हो गई।  इसी तरह, ऋण एवं अग्रिम (Advances) का आंकड़ा भी ₹74.3 लाख करोड़ से बढ़कर ₹127 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिससे स्पष्ट है कि बैंकिंग गतिविधियों में लगातार विस्तार हो रहा है।  MSME और रिटेल लोन में मजबूत वृद्धि  छोटे कारोबारियों और व्यक्तिगत ग्राहकों को ऋण उपलब्ध कराने में भी सरकारी बैंकों ने बेहतर प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष 2025-26 में MSME ऋण में 19.6 प्रतिशत और रिटेल लोन में 19.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे छोटे उद्योगों, गृह ऋण और व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिली।  पूंजी आधार हुआ और मजबूत  बैंकों की वित्तीय स्थिरता का एक महत्वपूर्ण संकेतक कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) भी बेहतर हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यह अनुपात 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 16.6 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो बैंकों की पूंजीगत मजबूती को दर्शाता है।  ECLGS 5.0 योजना से कारोबारियों को राहत  सरकार ने मई 2026 में आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS 5.0) शुरू की। इस योजना का उद्देश्य वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया क्षेत्र में उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावित कारोबारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।  योजना के तहत:  MSME इकाइयों को 100 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज मिलेगा। गैर-MSME संस्थानों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस को 90 प्रतिशत तक गारंटी सुविधा दी जाएगी। योजना के अंतर्गत कुल ₹2.55 लाख करोड़ तक के क्रेडिट सपोर्ट का प्रावधान किया गया है। निष्कर्ष  वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी बैंक अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत वित्तीय स्थिति में हैं। रिकॉर्ड मुनाफा, घटता एनपीए, बढ़ता कारोबार और मजबूत पूंजी आधार इस बात का संकेत हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया प्रभावी रही है। साथ ही MSME और रिटेल सेक्टर में बढ़ते ऋण वितरण से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
PSBs Record Profit FY26: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र से एक बेहद राहत भरी और आर्थिक मजबूती की खबर सामने आई है। एक समय भारी-भरकम एनपीए (NPA) और बैड लोंस से जूझने वाले भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सरकारी बैंकों ने न केवल रिकॉर्ड-तोड़ मुनाफा कमाया है, बल्कि अपने खराब कर्ज (GNPA) को भी ऐतिहासिक निचले स्तर पर ला दिया है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा मुनाफा

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों का कुल शुद्ध लाभ बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर माना जा रहा है। यह प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में हुए सुधारों और बेहतर वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।

GNPA में बड़ी गिरावट

सरकारी बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 1.9 प्रतिशत पर आ गया, जो कई वर्षों का सबसे निचला स्तर है। यह संकेत देता है कि बैंकों ने खराब कर्ज को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

चार वर्षों में बदली तस्वीर

पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी बैंकों की स्थिति में बड़ा बदलाव दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2021-22 में जहां इन बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ ₹0.67 लाख करोड़ था, वहीं FY26 में यह लगभग तीन गुना बढ़कर ₹1.98 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में GNPA भी करीब 7.3 प्रतिशत से घटकर 1.9 प्रतिशत पर पहुंच गया।

बैंकिंग कारोबार में तेज विस्तार

सरकारी बैंकों का कुल कारोबार भी लगातार बढ़ा है। FY26 में इनका कुल व्यवसाय ₹283 लाख करोड़ के पार पहुंच गया।

जमा राशि (Deposits) में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। FY22 में जहां सरकारी बैंकों के पास ₹107.2 लाख करोड़ की जमा राशि थी, वहीं FY26 में यह बढ़कर ₹156.3 लाख करोड़ हो गई।

इसी तरह, ऋण एवं अग्रिम (Advances) का आंकड़ा भी ₹74.3 लाख करोड़ से बढ़कर ₹127 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिससे स्पष्ट है कि बैंकिंग गतिविधियों में लगातार विस्तार हो रहा है।

MSME और रिटेल लोन में मजबूत वृद्धि

छोटे कारोबारियों और व्यक्तिगत ग्राहकों को ऋण उपलब्ध कराने में भी सरकारी बैंकों ने बेहतर प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष 2025-26 में MSME ऋण में 19.6 प्रतिशत और रिटेल लोन में 19.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे छोटे उद्योगों, गृह ऋण और व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिली।

पूंजी आधार हुआ और मजबूत

बैंकों की वित्तीय स्थिरता का एक महत्वपूर्ण संकेतक कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) भी बेहतर हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यह अनुपात 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 16.6 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो बैंकों की पूंजीगत मजबूती को दर्शाता है।

ECLGS 5.0 योजना से कारोबारियों को राहत

सरकार ने मई 2026 में आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS 5.0) शुरू की। इस योजना का उद्देश्य वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया क्षेत्र में उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावित कारोबारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

योजना के तहत:

  • MSME इकाइयों को 100 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज मिलेगा।
  • गैर-MSME संस्थानों और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस को 90 प्रतिशत तक गारंटी सुविधा दी जाएगी।
  • योजना के अंतर्गत कुल ₹2.55 लाख करोड़ तक के क्रेडिट सपोर्ट का प्रावधान किया गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी बैंक अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत वित्तीय स्थिति में हैं। रिकॉर्ड मुनाफा, घटता एनपीए, बढ़ता कारोबार और मजबूत पूंजी आधार इस बात का संकेत हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया प्रभावी रही है। साथ ही MSME और रिटेल सेक्टर में बढ़ते ऋण वितरण से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

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