पंजाब चुनाव 2027: राजनीतिक दलों का 'ऑपरेशन क्लीन', क्या आधे मौजूदा विधायकों का कटेगा टिकट?
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य का सियासी पारा चढ़ने लगा है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनावी विसात बिछानी शुरू कर दी है और इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस बार सूबे की राजनीति में एक बड़ा 'विशाल फेरबदल' देखने को मिल सकता है, जिसे राजनीतिक गलियारों में 'ऑपरेशन क्लीन' का नाम दिया जा रहा है। रणनीतियों से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टियां इस बार एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) से बचने के लिए लगभग 50 फीसदी नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में हैं।
आइए जानते हैं कि पंजाब के इस महामुकाबले को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति और उनकी सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं:
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आम आदमी पार्टी (AAP): परफॉर्मेंस के आधार पर होगी छंटनी
साल 2022 के चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
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टिकट कटने का डर: पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संकेत बताते हैं कि इस बार कई मौजूदा विधायकों का पत्ता साफ हो सकता है।
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वजह: कई विधायकों का कामकाज और ग्राउंड रिपोर्ट औसत से भी कम पाई गई है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर (जैसे पंचायती चुनाव) पर गड़बड़ी और कुछ नेताओं द्वारा अल्प अवधि में ही अनुपातहीन संपत्ति बनाने की शिकायतें हाईकमान तक पहुंची हैं।
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बदली हुई परिस्थिति: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि 2022 में एकतरफा 'आप' की लहर थी, जिसमें विपक्षी दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 2027 की जमीनी हकीकत अलग होगी, इसलिए उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह योग्यता और साफ छवि के आधार पर ही किया जाएगा।. कांग्रेस: 'वाटरलू' से बचने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी
कांग्रेस के लिए पंजाब का आगामी चुनाव बेहद निर्णायक होने वाला है। हाल के दिनों में देश के अन्य राज्यों (हरियाणा, दिल्ली, असम और पश्चिम बंगाल) में मिली हार के बाद पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नए जोश की जरूरत है।
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राजा वड़िंग का बड़ा दांव: पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के हालिया बयान ने पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है। उनके मुताबिक, कांग्रेस आगामी चुनावों में 60 से 70 प्रतिशत नए उम्मीदवारों को मौका दे सकती है।
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घरेलू कलह की आशंका: इस रणनीति से उन सीनियर नेताओं में बेचैनी है जो अपने राजनीतिक जीवन की आखिरी पारी खेल रहे हैं। कई दिग्गज नेता अब अपने बच्चों के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं।
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महिला कार्ड: कांग्रेस इस बार महिला आरक्षण के नैरेटिव को मजबूत करने के लिए 33 फीसदी टिकट महिला उम्मीदवारों को देने पर विचार कर रही है। हालांकि, पार्टी इस बार किसी भी तरह के आंतरिक दबाव में आए बिना स्वतंत्र सर्वे के आधार पर ही टिकट बांटेगी।
शिरोमणि अकाली दल (SAD): विभाजन के बाद खुद को संभालने की जद्दोजहद
शिरोमणि अकाली दल (बादल) इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। पार्टी में हुए आंतरिक बिखराव के कारण कई वरिष्ठ नेता 'अकाली दल (पुनर्गठन)' का हिस्सा बन चुके हैं।
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सुखबीर बादल की नई टीम: पुराने साथियों के जाने के बाद सुखबीर सिंह बादल अब पूरी तरह नए और युवा चेहरों को स्थापित करने में जुटे हैं। इसका उदाहरण फिरोजपुर शहर से सुखपाल सिंह नन्नू जैसे नेता हैं, जो भाजपा छोड़कर अकाली दल में शामिल हुए।
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सबसे बड़ा खतरा: अकाली दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर पार्टी दो गुटों में बंटकर चुनाव लड़ती है, तो उनका पारंपरिक वोट बैंक विभाजित हो जाएगा, जिसका सीधा फायदा अन्य दलों को मिलेगा।
भारतीय जनता पार्टी (BJP): दलबदलुओं और नए क्षेत्रों पर नजर
पंजाब की सियासत में खुद को स्थापित करने की कोशिश में जुटी भाजपा अभी भी मजबूत जमीनी आधार की तलाश में है।
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बाहरी चेहरों पर निर्भरता: भाजपा मुख्य रूप से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी छोड़कर आए नेताओं के भरोसे मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के लिए सभी 117 सीटों पर मजबूत स्थानीय उम्मीदवार ढूंढना भी एक चुनौती है।
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नया प्रयोग: 2022 के चुनावों में अकेले लड़कर सिर्फ 2 सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार उन विधानसभा क्षेत्रों में भी अपने प्रत्याशी उतारेगी, जहां उसने पारंपरिक तौर पर (अकाली दल के साथ गठबंधन के दौर में) कभी चुनाव नहीं लड़ा था। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 पारंपरिक राजनीति से काफी अलग होने वाला है। जहां एक तरफ 'आप' और 'कांग्रेस' एंटी-इन्कंबेंसी और भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए अपने मौजूदा विधायकों के टिकट काटने का कड़ा फैसला ले रही हैं, वहीं अकाली दल नए नेतृत्व को खड़ा करने और भाजपा बाहरी नेताओं के दम पर पैठ बनाने की कोशिश में है। अब देखना यह होगा कि पंजाब की जनता इस 'ऑपरेशन क्लीन' को कितना स्वीकार करती है।
