खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर उठते सवाल
आर. सूर्य कुमारी—विभूति फीचर्स)
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी सुरक्षित उपलब्धता आज एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य विषय है। खेती में रसायनों के उपयोग से लेकर बाजार में बिकने वाले तैयार खाद्य पदार्थों की स्वच्छता और गुणवत्ता तक कई स्तरों पर सावधानी की आवश्यकता होती है। तेजी से बदलती जीवनशैली में बाहर का खाना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि जो भोजन हम स्वाद और सुविधा के लिए खरीद रहे हैं, वह स्वच्छ और सुरक्षित भी है या नहीं।
बाजार में तले हुए खाद्य पदार्थों की लंबी सूची है। समोसा, आलू बंडा, मुंगौड़े, पकौड़े, सैंडविच, मंचूरियन, बिरयानी, चिकन-मटन बिरयानी, मोमोज, पिज्जा, हॉटडॉग सहित अनेक व्यंजन अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध हैं। इन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता केवल उनके स्वाद पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री, तेल, पानी, भंडारण और तैयार करने की स्वच्छ परिस्थितियों से भी जुड़ी होती है।
तेल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान जरूरी
तले हुए खाद्य पदार्थों के मामले में इस्तेमाल किए जाने वाले तेल की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। तेल को बार-बार गर्म करने और लंबे समय तक इस्तेमाल करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा खुले में रखे खाद्य पदार्थों पर धूल, धुआं और अन्य प्रदूषक भी पहुंच सकते हैं।
इसी तरह खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रिजर्वेटिव्स और अन्य खाद्य योजकों का उपयोग निर्धारित मानकों और अनुमत मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए। भोजन को आकर्षक बनाने के लिए रंगों का इस्तेमाल भी खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है। उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य पदार्थों से सावधान रहना चाहिए जिनकी गुणवत्ता, स्वच्छता या सामग्री संदिग्ध नजर आए।
स्वाद के साथ पोषण भी जरूरी
बाहर मिलने वाले कई तले और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ स्वाद में आकर्षक होते हैं, लेकिन यदि ऐसे भोजन का सेवन लगातार और अधिक मात्रा में किया जाए तो संतुलित आहार प्रभावित हो सकता है। अत्यधिक तला हुआ, नमकीन या वसा एवं कैलोरी से भरपूर भोजन नियमित रूप से खाने की आदत स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं मानी जाती।
इसके विपरीत, संतुलित भोजन में पर्याप्त सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना आवश्यक है। भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी मात्रा और सेवन की नियमितता भी स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
रोजगार के साथ खाद्य सुरक्षा भी जरूरी
सड़क किनारे और छोटे स्तर पर खाद्य पदार्थ बेचने वाले अनेक लोग इसी कारोबार से अपनी आजीविका चलाते हैं। रोजगार और छोटे कारोबार को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों का पालन भी उतना ही जरूरी है।
खाद्य कारोबार करने वालों को साफ पानी, स्वच्छ बर्तन, गुणवत्तापूर्ण कच्ची सामग्री, उचित तापमान पर खाद्य पदार्थों का भंडारण और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। मांस, चिकन, मछली और अंडे जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में भंडारण और पकाने की प्रक्रिया में विशेष सावधानी जरूरी है।
नियमित जांच से बढ़ेगा भरोसा
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। समय-समय पर दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, खाद्य पदार्थों के नमूने लेना और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए।
साथ ही खाद्य कारोबारियों को केवल दंड के डर से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी समझते हुए सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहिए। उपभोक्ताओं को भी संदिग्ध गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की शिकायत संबंधित विभागों तक पहुंचानी चाहिए।
स्वस्थ समाज के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन आवश्यक है। इसलिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है जिसमें खाद्य कारोबार करने वालों को रोजगार और सम्मानजनक आजीविका मिले, जबकि उपभोक्ताओं को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो। बेचने वाला भी सुरक्षित रहे और खाने वाला भी—यही खाद्य सुरक्षा का मूल उद्देश्य होना चाहिए।

