यूपी में ब्राह्मण युवाओं के एनकाउंटर पर रागिनी अवस्थी का तीखा हमला: 'यह जातीय नरसंहार, 1 जुलाई से शुरू होगा ब्राह्मण बेटा न्याय मार्च'
'क्या ब्राह्मण होना गुनाह है?' – मातृशक्ति का सरकार से सीधा सवाल
एक माँ, एक बहन और राजनीतिक दल की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी बात रखते हुए रागिनी अवस्थी ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा विकास दुबे, अतुल दुबे, मनीष मिश्रा और भरत तिवारी जैसे नाम केवल रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये किसी माँ के लाल थे। बिना किसी कानूनी मुकदमे या निष्पक्ष सुनवाई के युवाओं को गोलियों से भून देना कहाँ का न्याय है? चुनाव के समय 'जय परशुराम' का नारा लगाने वाली सरकारें आज परशुराम के वंशजों को निशाना बना रही हैं। सनातन के नाम पर वोट लेकर ब्राह्मणों को टारगेट करना अब बंद होना चाहिए।
उन्होंने इस कार्रवाई को 'एकतरफा' बताते हुए सरकार से मांग की कि पिछले तीन वर्षों में हुए सभी एनकाउंटर का डेटा सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसमें कितने प्रतिशत ब्राह्मण और सवर्ण युवा शामिल थे। उन्होंने इसे एनकाउंटर नहीं, बल्कि 'जातीय नरसंहार' की संज्ञा दी।

सर्वजन सनातन पार्टी की प्रमुख मांगें
प्रदेश अध्यक्ष रागिनी अवस्थी ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं
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उच्च स्तरीय न्यायिक जांच: उत्तर प्रदेश में हुए सभी ब्राह्मण युवाओं के एनकाउंटर की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए और इसकी रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सार्वजनिक हो।
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पीड़ित परिवारों को मुआवजा: फर्जी एनकाउंटर का शिकार हुए हर मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए।
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दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: जो भी पुलिसकर्मी फर्जी एनकाउंटर में शामिल पाए जाएं, उन पर धारा 302 (हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत जेल भेजा जाए।
1 जुलाई से 'ब्राह्मण बेटा न्याय मार्च' की चेतावनी
प्रेस नोट के अंत में श्रीमती रागिनी अवस्थी ने सरकार को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने 7 दिनों के भीतर इन मामलों पर निष्पक्ष जांच नहीं बैठाई, तो सर्वजन सनातन पार्टी की लाखों महिलाएं और मातृशक्ति चुप नहीं बैठेंगी।
दल की रणनीति के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर "ब्राह्मण बेटा न्याय मार्च" निकाला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज ने हमेशा देश और धर्म की रक्षा की है, लेकिन अब अपने अस्तित्व और बच्चों की सुरक्षा के लिए मातृशक्ति सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।
