राहुल गांधी को अमित शाह की Mock Parliament में बैठने की सलाह, बोले- प्रधानमंत्री बनना है तो पूरी जिंदगी वहीं बैठे रहिए

CEC ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों के बीच सियासी घमासान तेज। अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना, तो रामलीला मैदान की रैली में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर फिर उठाए सवाल।

 
राहुल गांधी

देश की राजनीति में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें Mock Parliament में ही बैठे रहने की सलाह दे दी। शाह ने कहा कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो पूरी जिंदगी Mock Parliament में बैठे रहें, क्योंकि उनका नंबर कभी नहीं आने वाला।

अमित शाह का यह बयान 1 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान आया। उनका निशाना विपक्ष की ओर से 31 अक्टूबर को आयोजित प्रतीकात्मक संसदीय कार्यवाही और दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA गठबंधन की रैली थी।

खड़गे के आवास पर हुई Mock Parliament

दरअसल, 31 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं ने Mock Parliament यानी प्रतीकात्मक संसदीय कार्यवाही आयोजित की थी। इसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोप रखे गए और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए।

विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। विपक्ष इसे 'वोट चोरी' का मामला बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

अमित शाह ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर कसा तंज

चंडीगढ़ में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले कई वर्षों से चुनाव हार रही है और सोनिया गांधी का अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनाने का सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है।

शाह ने Mock Parliament को लेकर राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनना है तो पूरी जिंदगी Mock Parliament में बैठे रहिए, क्योंकि उनका नंबर कभी नहीं आने वाला। उन्होंने दिल्ली में 1 नवंबर को आयोजित विपक्ष की रैली के समय पर भी सवाल उठाए। शाह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तारीख पर रैली आयोजित करना पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने राजीव गांधी के पुराने बयान 'जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है' का भी जिक्र किया। शाह ने दिवाली के आसपास दिल्ली के बाजारों में होने वाले कारोबार का हवाला देते हुए व्यापारियों की चिंता भी उठाई और रैली को लेकर सवाल किए।

राहुल गांधी ने रामलीला मैदान से दिया जवाब

दूसरी ओर, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित हुई। इसमें राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी दोहराई और कहा कि कथित वोट चोरी के मामले में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

सवाल Mock Parliament का नहीं, मतदाता सूची की पारदर्शिता का भी है

इस पूरे घटनाक्रम ने लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक संवाद को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक रणनीति बताते हुए खारिज कर रही है। अमित शाह ने इससे पहले विपक्ष को मतदाता सूची के मुद्दे पर संसद के विशेष सत्र में चर्चा की चुनौती भी दी थी।

ऐसे में लोकतंत्र के हित में जरूरी है कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य और प्रमाण सामने रखे। वहीं, चुनाव आयोग और सरकार को भी मतदाता सूची में नाम हटाए जाने तथा SIR प्रक्रिया से जुड़े सवालों का पारदर्शी और स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

राजनीति में तंज और आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन मतदाता के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता जैसे मुद्दों पर तथ्य आधारित जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है। आखिर लोकतंत्र में सवाल उठाना भी जरूरी है और उन सवालों का जवाब देना भी।

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