राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा: जनसंघर्ष या राजनीतिक रणनीति
(कुमार कृष्णन – विनायक फीचर्स)
बिहार इन दिनों विपक्षी दलों की एकजुटता और राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा की वजह से सुर्खियों में है। इस यात्रा ने न केवल राज्य की सड़कों पर बल्कि संसद तक गूंज पैदा की है। “वोट चोरी” का मुद्दा अब केवल एक चुनावी बहस नहीं रहा, बल्कि जनता के बीच इसे जन आंदोलन का रूप मिलता दिखाई दे रहा है।
भीड़ और समर्थन ने बढ़ाई सियासी गर्मी
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की अगुवाई में निकली इस यात्रा में हर दिन अप्रत्याशित भीड़ उमड़ रही है। कांग्रेस का दावा है कि जनता का यह समर्थन यह साबित करता है कि “वोट चोरी” को लेकर लोगों की नाराज़गी वास्तविक है। पार्टी का कहना है कि संसद में उठाए गए सवालों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब यात्रा ने इस मुद्दे को पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना दिया है।

यात्रा का रूट और जनता से सीधा संवाद
सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा दक्षिण बिहार के औरंगाबाद, गया, नवादा, नालंदा से होते हुए सीमांचल तक पहुंच चुकी है और आगे दरभंगा, चंपारण, सिवान होते हुए आरा में समाप्त होगी। 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में इसकी बड़ी रैली होगी। यात्रा के दौरान राहुल गांधी और तेजस्वी यादव खुले वाहन से जनता से मिलते-जुलते हैं। कई जगह राहुल गांधी किसानों और मजदूरों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनते भी नज़र आए।
विपक्ष का हमला, चुनाव आयोग पर सवाल
राहुल गांधी का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष काम नहीं कर रहा और सरकार के दबाव में वोट चोरी की घटनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “बिहार में वोट चोरी नहीं होने देंगे।” वहीं पप्पू यादव ने चुनाव आयोग को सीधे “भाजपा और आरएसएस का ऑफिस” करार दिया। तेजस्वी यादव भी लगातार केंद्र सरकार और भाजपा पर हमला बोलते हुए कह रहे हैं कि यह यात्रा लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है।

ऐतिहासिक खानकाह से मुलाकात और नेताओं का समर्थन
यात्रा के दौरान राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने मुंगेर की खानकाह रहमानी का दौरा किया, जहां अतीत में महात्मा गांधी और नेहरू जैसे नेता भी आ चुके हैं। सीमांचल में तुषार गांधी ने भी इस यात्रा का समर्थन जताया। आगे प्रियंका गांधी, हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता भी अलग-अलग चरणों में शामिल होंगे।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने राहुल गांधी की इस यात्रा को “राजनीतिक नौटंकी” बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे “कंस की राह” तक कहा। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची से नाम कटने के आरोप झूठे हैं और चुनाव आयोग पहले ही फैक्ट चेक कर चुका है।

