राजस्थान निकाय चुनाव 2026: BJP की बढ़त, कांग्रेस को कई जगह सफलता; बारां में AAP का बड़ा उलटफेर

Rajasthan Civic Body Elections 2026: BJP leads, Congress tastes success in several areas; AAP pulls off a major upset in Baran.
 
राजस्थान निकाय चुनाव 2026

जयपुर। राजस्थान के नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। 309 नगरीय निकायों में हुए चुनाव की मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने कई क्षेत्रों में बढ़त बनाई, जबकि कांग्रेस ने भी अजमेर, पाली और कुछ अन्य इलाकों में मजबूत प्रदर्शन किया। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी, माकपा, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई निकायों में अपनी प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराई।

इन चुनावों में खास बात यह रही कि मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं रहा। कई जगह निर्दलीय उम्मीदवार निर्णायक स्थिति में नजर आए, जबकि बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने बड़ा उलटफेर करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

309 निकायों में हुआ चुनाव

राजस्थान में इस बार 309 नगरीय निकायों के लिए चुनाव कराए गए। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल थीं। कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए मतदान हुआ। चुनाव दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को हुए, जबकि मतगणना 14 सितंबर को शुरू हुई।चुनाव परिणामों के बाद अब निगाहें 21 सितंबर को होने वाले नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव पर भी रहेंगी।

BJP ने बनाई बढ़त, कांग्रेस भी कई जगह मजबूत

मतगणना के दौरान भाजपा ने राज्य के कई शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस पर बढ़त बनाई। उपलब्ध वार्डवार आंकड़ों में भाजपा ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस भी कई महत्वपूर्ण निकायों में मुकाबले में बनी रही।

बड़े शहरों की तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने 80 में से 53 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं। दूसरी ओर अजमेर में कांग्रेस ने 37 वार्ड जीतकर भाजपा के 32 वार्डों पर बढ़त बनाई। पाली में भी कांग्रेस 29 वार्डों के साथ आगे रही, जबकि भाजपा को 21 सीटें मिलीं।जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में भी भाजपा ने 77 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 52 वार्डों में सफलता मिली।

बारां में AAP का बड़ा राजनीतिक उलटफेर

राजस्थान निकाय चुनाव का सबसे चौंकाने वाला परिणाम बारां नगर परिषद से सामने आया। यहां आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 वार्डों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया।

कांग्रेस को 18 और भाजपा को सिर्फ 9 वार्ड मिले, जबकि दो वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। इस परिणाम ने राजस्थान की शहरी राजनीति में AAP की संभावनाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

नोखा में माकपा का दमदार प्रदर्शन

बीकानेर जिले की नोखा नगरपालिका में भी परिणाम ने राजनीतिक समीकरणों को चौंकाया। यहां माकपा ने 45 में से 29 वार्ड जीतकर मजबूत स्थिति बनाई, जबकि भाजपा को 13 सीटें मिलीं और कांग्रेस अपना खाता नहीं खोल सकी।यह परिणाम बताता है कि राजस्थान के कुछ स्थानीय क्षेत्रों में राष्ट्रीय दलों के अलावा वामपंथी और क्षेत्रीय दल भी प्रभावी चुनौती पेश करने की क्षमता रखते हैं।

निर्दलीयों ने बिगाड़ा बड़े दलों का गणित

राजस्थान के निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण रही। कई निकायों में उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ते हुए बड़ी संख्या में वार्ड जीते।

भरतपुर इसका प्रमुख उदाहरण रहा। यहां 65 वार्डों में से 36 पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 20 और कांग्रेस को केवल सात वार्ड मिले। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र में आया यह परिणाम खास राजनीतिक चर्चा का विषय बना।इससे साफ है कि स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय मुद्दे और जमीनी संगठन कई बार पार्टी के चुनाव चिह्न से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं।

झालावाड़ में कांग्रेस ने भाजपा को दिया झटका

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ क्षेत्र में भी चुनाव परिणाम ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा। झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने 25 में से 18 वार्ड जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया।

हालांकि झालरापाटन में भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत रखी। इससे यह संकेत मिलता है कि एक ही राजनीतिक क्षेत्र के अलग-अलग शहरी निकायों में मतदाताओं का रुझान अलग हो सकता है।

परबतसर में भाजपा प्रत्याशी को मिला सिर्फ एक वोट

परबतसर नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 का परिणाम भी काफी चर्चा में रहा। यहां भाजपा प्रत्याशी कैलाशचंद को सिर्फ एक वोट मिला। रिपोर्टों के अनुसार वह स्वयं वार्ड नंबर 12 के मतदाता थे, जबकि उन्हें वार्ड 13 से टिकट दिया गया था।दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी हिना खानम ने 376 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। यह परिणाम स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार के चयन और जमीनी पकड़ के महत्व को उजागर करता है।

RLP, BSP और BAP ने भी दर्ज कराई मौजूदगी

भाजपा और कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय दलों ने भी कुछ इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत की। हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने नागौर और आसपास के क्षेत्रों में कई वार्डों में जीत हासिल की।इसी तरह बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने पूर्वी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने वागड़ क्षेत्र में सीटें जीतकर अपना आधार कायम रखा।

क्या संकेत दे रहे हैं निकाय चुनाव?

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव परिणामों को केवल भाजपा बनाम कांग्रेस की लड़ाई के तौर पर देखना सही नहीं होगा। भाजपा ने जहां बड़ी संख्या में शहरी वार्डों में बढ़त बनाई, वहीं कांग्रेस ने अजमेर और पाली जैसे महत्वपूर्ण निकायों में मजबूत प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ बारां में AAP की जीत और नोखा में माकपा का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि स्थानीय स्तर पर मतदाता वैकल्पिक राजनीतिक विकल्पों को भी जगह दे रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निर्दलीयों की रही, जिन्होंने कई निकायों में दोनों प्रमुख दलों का गणित बिगाड़ दिया। ऐसे में आने वाले दिनों में नगर निकाय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों को निर्दलीय और छोटे दलों के निर्वाचित पार्षदों का समर्थन हासिल करने के लिए रणनीति बनानी पड़ सकती है।

राजस्थान की शहरी राजनीति में इन परिणामों का असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा। खासकर भाजपा के लिए यह प्रदर्शन राज्य सरकार के बीच कार्यकाल में शहरी जनसमर्थन का महत्वपूर्ण संकेत है, जबकि कांग्रेस के सामने अपने संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर प्रभावी नेतृत्व तैयार करने की चुनौती बनी हुई है।

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