रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, आध्यात्मिक संकल्प का भी प्रतीक: प्रो. रवि शंकर सिंह
बलरामपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बलरामपुर नगर की ओर से एमएलके पीजी कॉलेज सभागार में रक्षाबंधन उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग संघचालक सौम्य अग्रवाल ने की। मुख्य वक्ता मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह रहे।
अपने संबोधन में प्रो. रवि शंकर सिंह ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और भौतिक सुरक्षा का पर्व नहीं है, बल्कि यह जन्म-जन्मांतर के आध्यात्मिक संकल्प का भी प्रतीक है। इस पर्व में भारतीय संस्कृति, कर्म सिद्धांत और सनातन जीवन दर्शन की गहरी अवधारणाएं समाहित हैं।
उन्होंने कहा कि बहन द्वारा भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला रक्षासूत्र महज एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास, समर्पण और संकल्प का प्रतीक है। इसके साथ ही भाई अपनी बहन की रक्षा, सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेता है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का भाव केवल बाहरी सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे आत्मिक और आध्यात्मिक भावना भी जुड़ी हुई है।
कर्म ही जीवन की दिशा निर्धारित करता है
प्रो. सिंह ने भारतीय चिंतन परंपरा में कर्म के महत्व को समझाते हुए गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई “कर्म प्रधान विश्व कर राखा” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन सदैव कर्मप्रधान रहा है। मनुष्य अपने कर्मों के माध्यम से जीवन की दिशा निर्धारित करता है और उसके कर्मों का प्रभाव उसके जीवन पर पड़ता है।
उन्होंने सनातन दर्शन में आत्मा की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा को सनातन और अविनाशी माना गया है। भारतीय ऋषि परंपरा में आत्मा की यात्रा और पुनर्जन्म की अवधारणा का विस्तृत वर्णन मिलता है। कर्मों के आधार पर जीव विभिन्न योनियों में जन्म लेता है और यह यात्रा निरंतर चलती रहती है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन इसी सनातन चिंतन की सुंदर अभिव्यक्ति है। भाई-बहन का पवित्र रिश्ता केवल वर्तमान जीवन तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे आत्मा और चेतना के स्तर पर जुड़े पवित्र संबंध के रूप में भी देखा जाता है।
कुटुंब प्रबोधन पर भी दिया जोर
मुख्य वक्ता ने कहा कि रक्षाबंधन का मूल संदेश प्रेम, कर्तव्य, संस्कार और संकल्प है। रक्षासूत्र की डोर व्यक्ति को उसके दायित्वों का स्मरण कराते हुए सनातन संस्कृति के मूल्यों से जोड़ती है। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की और परिवार को संस्कारों तथा सामाजिक मूल्यों की पहली पाठशाला बताया।कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों और माताओं-बहनों ने एक-दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर सामाजिक समरसता, परस्पर सम्मान और रक्षा का संदेश दिया।

इस अवसर पर जिला प्रचारक जितेंद्र, नगर संघचालक देव प्रकाश, जिला कार्यवाह किरीट मणि, नगर प्रचारक रणवीर, नगर कार्यवाह केके सिंह, सेवा भारती विभाग अध्यक्ष बीडी जायसवाल, संस्कार भारती जिलाध्यक्ष देव कुमार मिश्रा, राकेश प्रताप सिंह, प्रो. जेपी पांडेय, नील मणि, डॉ. अजय सिंह पिंकू, रमेश पाहवा, भानु प्रकाश, रविंद्र कमलापुरी, कुलदीप सिंह, डॉ. शरद सिंह, कुशाग्र सिंह, झूमा सिंह और शेरावाली शुक्ला, मंजू तिवारी सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।

