राम मंदिर चंदा चोरी: 'आस्था के नाम पर राजनीति और चढ़ावे के नाम पर लूट'; कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने उठाए गंभीर सवाल

Ram Mandir Donation Theft: 'Politics in the name of faith and plunder in the name of offerings'; Congress MP Deepender Hooda raises serious questions.
 
राम मंदिर चंदा चोरी: 'आस्था के नाम पर राजनीति और चढ़ावे के नाम पर लूट'; कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने उठाए गंभीर सवाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कांग्रेस पार्टी राज्य मुख्यालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कार्यसमिति के सदस्य एवं सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा (Deepender Singh Hooda) ने राम मंदिर ट्रस्ट में हुए कथित वित्तीय घोटालों को लेकर केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर बेहद तीखे और सीधे हमले किए।

इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय भी उपस्थित रहे। दीपेंद्र हुड्डा ने इसे देश के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों की आस्था के साथ हुआ घोर विश्वासघात करार दिया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए तीन प्रमुख सवाल दागे और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की।

भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा भाजपा-आरएसएस की राजनीतिक लूट का शिकार: हुड्डा

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम किसी राजनीतिक दल की बपौती या निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने कहा देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाओं और आम श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई, अपनी बचत और अपने गहने तक राम मंदिर निर्माण के लिए दान कर दिए। भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशकों तक इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता हासिल की। लेकिन आज करोड़ों रामभक्त यह पूछने पर मजबूर हैं कि आखिर यह चंदा और चढ़ावा किसके संरक्षण में लूटा गया?"

कांग्रेस के तीन बड़े और तीखे सवाल

सांसद हुड्डा ने इस कथित घोटाले को लेकर सीधे केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए तीन बुनियादी सवाल पूछे:

  1. जवाबदेही किसकी?: जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख और पीएमओ की सक्रिय भूमिका में हुआ था, तो इस कथित महाघोटाले की अंतिम जवाबदेही कौन लेगा?

  2. इस्तीफे क्यों हुए?: अगर सब कुछ पारदर्शी और नियमों के तहत था, तो ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों स्वीकार किए गए? यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि मामला कोई प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित घोटाला है।

  3. जांच से डर क्यों?: अगर सरकार और ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कुछ गलत नहीं किया है, तो वे माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने से क्यों डर रहे हैं?

वीआईपी आयोजनों के भारी-भरकम खर्चों पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने मीडिया रिपोर्टों के हवाले से चल रही विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने रखे:

  • प्राण-प्रतिष्ठा का खर्च: 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में महज 8,000 अतिथियों के शामिल होने पर लगभग ₹113 करोड़ खर्च किए गए।

  • ध्वजारोहण कार्यक्रम का खर्च: 25 नवंबर 2025 को हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग ₹10.12 करोड़ का भारी-भरकम व्यय दिखाया गया।

हुड्डा ने आरोप लगाया कि फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे और भूमि खरीद में कथित हेराफेरी के कई पुख्ता आरोप सामने आ चुके हैं। वर्तमान में केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों को मोहरा बनाकर उन पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों और 'बड़ी मछलियों' को बचाने के लिए पूरे प्रकरण पर लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह प्रवृत्ति केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान घोटाले ने भी कई गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

कांग्रेस पार्टी की 5 प्रमुख मांगें

इस कथित चंदा चोरी को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. प्रधानमंत्री का स्पष्टीकरण: पीएम नरेंद्र मोदी इस पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ें और देश के सामने स्पष्ट करें कि उनके कार्यालय (PMO) की निगरानी में बने ट्रस्ट में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई।

  2. तत्काल गिरफ्तारियां: चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी और अन्य प्रभावशाली पदाधिकारियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

  3. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सर्वाेच्च न्यायालय की सीधी देखरेख में एक स्वतंत्र समिति द्वारा कराई जाए।

  4. ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए: वर्तमान कटघरे में खड़े ट्रस्ट को तुरंत भंग करके देश के सम्मानित धर्माचार्यों, प्रशासनिक विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित स्वतंत्र नागरिकों के साथ एक नए, पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट का गठन किया जाए।

  5. फॉरेंसिक ऑडिट: राम मंदिर को प्राप्त समस्त चंदे, चढ़ावे, जमीनों की खरीद-फरोख्त और आयोजनों के खर्चों का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) कर उसकी पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

'हमें दर्शन करने से रोका गया, वीआईपी को छूट': अजय राय

इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "जब कांग्रेस के सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता प्रभु श्री राम के दर्शन करने अयोध्या गए थे, तो हमें हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया गया और भारी पुलिसिया जद्दोजहद के बाद ही दर्शन करने दिया गया। इसके विपरीत, सत्ता पक्ष के लोगों और वीआईपी के लिए रेड-कारपेट व्यवस्था की जाती है। भाजपा सरकार केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े भ्रष्टाचारियों को बचा रही है, जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ेगी।" इस पूरी प्रेसवार्ता का कुशल संचालन प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता डॉ. उमा शंकर पाण्डेय द्वारा किया गया।

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