गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में ‘रस रंग उत्सव’, षड्रस आधारित व्यंजनों ने बटोरी सराहना

11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में बीएएमएस विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए पौष्टिक एवं आयुर्वेद आधारित व्यंजन
 
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लखनऊ, 21 सितंबर 2026। आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली के तत्वावधान में मनाए जा रहे 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में गोयल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, लखनऊ में सोमवार को बीएएमएस छात्र-छात्राओं द्वारा आयुर्वेदिक खाद्य महोत्सव ‘रस रंग उत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद के सिद्धांतों, विशेष रूप से षड्रस आहार और त्रिदोष संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को रचनात्मक माध्यम से प्रस्तुत करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10 बजे कॉलेज परिसर में हुआ। इसका उद्घाटन चेयरमैन इंजीनियर महेश गोयल ने किया। इस अवसर पर गोयल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विभिन्न संस्थानों के डीन तथा गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अविनाश चन्द्र श्रीवास्तव, उप प्रधानाचार्य प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, डीन एकेडमिक प्रोफेसर सुनील कुमार गुप्ता, कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. सौरभ तिवारी सहित अन्य गणमान्य अधिकारी मौजूद रहे।अतिथियों ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न आयुर्वेदिक एवं पौष्टिक व्यंजनों के स्टॉलों का अवलोकन किया और व्यंजनों का स्वाद लेते हुए छात्र-छात्राओं के प्रयासों की सराहना की।

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षड्रस आधारित व्यंजनों ने बढ़ाया आकर्षण

कार्यक्रम में प्रोफेसर जॉली सक्सेना, प्रोफेसर रंजना राजपूत और प्रोफेसर अवधेश बरनवाल ने निर्णायक मंडल के सदस्य के रूप में विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने व्यंजनों की गुणवत्ता, उपयोगिता और प्रस्तुति का आकलन किया।छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के पौष्टिक लड्डू, आंवले का हलवा, गोभी का हलवा, हर्बल चाय, खजूर का हलवा, पौष्टिक एवं रंगीन इडली सहित कई व्यंजनों के स्टॉल लगाए। प्रोफेसर अमित कुमार शुक्ला, प्रोफेसर अंकुश अवहाद, डॉ. नौसान रज़ा और श्रीमती लक्ष्मी बरनवाल के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने व्यंजनों, सजावट और विषयगत प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘Science of Ayurvedic Arts’ की अवधारणा को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘षड्रस से आरोग्य’ रहा। विद्यार्थियों ने आयुर्वेद में वर्णित छह रस—मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त और कषाय—के महत्व को विभिन्न खाद्य प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया।

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विद्यार्थियों को दिए गए पुरस्कार

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। इससे विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और उन्होंने आयुर्वेदिक सिद्धांतों को व्यावहारिक एवं रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में अपने प्रयास साझा किए।

इस अवसर पर चेयरमैन इंजीनियर महेश गोयल ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को आधुनिक संदर्भों में जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार के शैक्षणिक और रचनात्मक कार्यक्रम उपयोगी हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को लगातार आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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कार्यक्रम में गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं चिकित्सक भी शामिल हुए। इनमें प्रोफेसर मिथिलेश वर्मा (एमएस), प्रोफेसर अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, प्रोफेसर अमरजीत यादव, प्रोफेसर सुबोध अस्थाना, प्रोफेसर संतोष अर्जुनागी, प्रोफेसर प्रदीप, डीएमएस डॉ. सुरेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. मधुलिका, डॉ. राकेश प्रताप सिंह, डॉ. प्रवीन मिश्रा, डॉ. अविधा देवराज, डॉ. गौरव, डॉ. अंकुर सक्सेना, डॉ. जूही, डॉ. अमृता, डॉ. जयसीला, डॉ. नीरजा, डॉ. अतुल, डॉ. नरेन्द्र, डॉ. अभिषेक, डॉ. सन्दीप और डॉ. मयंक सहित अन्य शिक्षक एवं चिकित्सक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों एवं आयोजक विभाग के प्रयासों की सराहना तथा आयुर्वेद आधारित स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए किया गया।

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