यूपी की राजनीति में नया धमाका: मोहन भागवत के बयान पर स्वामी प्रसाद मौर्य का तीखा हमला

 
Religion Business Exposed!" Swami Prasad Maurya SLAMS Mohan Bhagwat

 आरएसएस चीफ मोहन भागवत के 'हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी' वाले बयान पर मौर्य ने जोरदार हमला बोला है। उनका कहना है - अगर हिंदू नहीं रहेगा, तो 'धर्म के नाम पर धंधा' करने वालों की दुकानें जरूर बंद हो जाएंगी! क्या ये हिंदू राष्ट्र की मांग पर सीधा तंज है? या फिर आरएसएस की राजनीति पर करारा प्रहार ? इस वीडियो में हम कवर करेंगे पूरी कंट्रोवर्सी , दोनों नेताओं के बयानों का एनालिसिस, राजनीतिक प्रभाव और सोशल मीडिया की रिएक्शन्स। अगर आप राजनीति के शौकीन हैं, तो अंत तक जरूर देखें। लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करना न भूलें, और कमेंट्स में बताएं - क्या स्वामी मौर्य सही कह रहे हैं? चलिए शुरू करते हैं!

 ये विवाद शुरू हुआ मणिपुर से। 21 नवंबर 2025 को आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत मणिपुर के इंफाल में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। वहां उन्होंने हिंदू समाज की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, 'हिंदू समाज रहेगा। अगर हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी। क्योंकि धर्म का सही अर्थ और मार्गदर्शन दुनिया को समय-समय पर हिंदू समाज ही देता आया है।' भागवत जी ने आगे कहा कि भारत एक अमर सभ्यता है, जो यूनान, मिस्र जैसी सभ्यताओं के विपरीत कभी नष्ट नहीं हुई। उन्होंने सामाजिक एकता पर जोर दिया और कहा कि आरएसएस किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने के लिए काम करता है। लेकिन ये बयान आते ही विपक्ष के रडार पर आ गया।

अब आती है स्वामी प्रसाद मौर्य की एंट्री। अपनी जनता पार्टी (सेक्युलर) के प्रमुख और पूर्व कैबिनेट मंत्री मौर्य ने 24 नवंबर 2025 को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भागवत जी के बयान पर तीखा प्रहार किया। मौर्य ने कहा, 'अगर हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी - ये बिल्कुल झूठ है। दुनिया तो पहले भी थी, आज भी है और आगे भी रहेगी। हां, इतना सच है कि अगर हिंदू नहीं रहेगा, तो धर्म के नाम पर धंधा करने वालों की दुकानें बंद हो जाएंगी।' मौर्य ने सवाल उठाया कि जब आरएसएस प्रमुख खुद कहते हैं कि भारत अमर समाज है, तो फिर हिंदू राष्ट्र की मांग क्यों? क्या ये राष्ट्रद्रोह नहीं? उन्होंने कहा कि संविधान सभी धर्मों का सम्मान करता है, किसी एक धर्म के नाम पर राष्ट्र की बात संविधान की disregard है।

 स्वामी मौर्य के ये बयान कोई नई बात नहीं। वो हमेशा से हिंदू धर्म में 'पाखंड' की बात करते आए हैं। हाल ही में 16 नवंबर को बंदा में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि हिंदू ग्रंथों में 20 हाथ वाले देवता जैसी बातें पाखंड हैं, जो दूसरे धर्मों में नहीं मिलतीं। इससे पहले दिसंबर 2023 में उन्होंने हिंदू धर्म को 'धोखा' तक कह दिया था। और अब ये 'धर्म का धंधा' वाला तंज सीधे आरएसएस पर। मौर्य का कहना है कि हिंदू राष्ट्र की मांग करने वालों को ही राष्ट्रद्रोह के आरोप में जेल भेजना चाहिए। क्या ये बसपा-सपा की पुरानी राजनीति का हिस्सा है, या फिर असल में संविधान की रक्षा का प्रयास?अब देखिए राजनीतिक प्रभाव। ये बयान यूपी की राजनीति को और गरमा सकता है। भाजपा और आरएसएस इसे हिंदू एकता पर हमला मान रहे हैं। सोर्स बताते हैं कि भाजपा नेताओं ने मौर्य पर 'वोटबैंक पॉलिटिक्स' का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। वहीं, कांग्रेस ने भी भागवत के मूल बयान पर सवाल उठाए - 'हिंदू क्यों खत्म होंगे, कैसे खत्म होंगे?' समाजवादी पार्टी के फखरुल हसन चांद ने कहा कि देश संविधान से चलेगा, न कि किसी एक धर्म से। और 20 नवंबर को मौर्य के 'मुस्लिम राष्ट्र' वाले बयान पर लखनऊ में जनता ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ये विवाद 2027 यूपी चुनावों को प्रभावित कर सकता है, जहां दलित-मुस्लिम वोटबैंक की जंग तेज होगी।

 ट्विटर  पर #HinduRashtra और #SwamiPrasadMaurya ट्रेंड कर रहा है। एक तरफ भाजपा समर्थक मौर्य को 'धर्मविरोधी' बता रहे हैं, वहीं विपक्षी फैंस उनके बयान को 'साहसी' कहकर शेयर कर रहे हैं।  ये विवाद हमें सोचने पर मजबूर करता है - क्या हिंदू राष्ट्र की मांग संविधान के खिलाफ है? या फिर ये सांस्कृतिक पहचान की रक्षा? मोहन भागवत ने एकता की बात की, लेकिन मौर्य ने इसे धंधा बता दिया। हमारी राय - राजनीति में धर्म को हथियार बनाना देश के लिए खतरा है। विकास और समानता पर फोकस हो। आपकी क्या सोच है? तो ये था आज का हॉट पॉलिटिकल अपडेट। 

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