अफवाहों पर नहीं, संयम, सहयोग और सहभागिता पर भरोसा जरूरी

It is necessary to rely on restraint, cooperation and participation, not on rumours.
 

(डॉ. राघवेंद्र शर्मा – विभूति फीचर्स)

वर्तमान समय में विश्व एक अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहाँ युद्ध की विभीषिकाएँ और वैश्विक अस्थिरता मानवीय संवेदनाओं के साथ-साथ आर्थिक तंत्र को भी प्रभावित कर रही हैं। Russia, United States, Israel और खाड़ी देशों के बीच बढ़ता तनाव केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के हर कोने पर दिखाई दे रहा है। India, जो अपनी शांतिप्रिय नीति और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के लिए जाना जाता है, स्वाभाविक रूप से इस वैश्विक उथल-पुथल से पूरी तरह अछूता नहीं रह सकता। जिन देशों के बीच आज तनाव या युद्ध की स्थिति है, उनके साथ भारत के गहरे व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध हैं।

आयात-निर्यात के चक्र में आए व्यवधान ने निश्चित रूप से कुछ चुनौतियाँ खड़ी की हैं, विशेषकर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति को लेकर चिंताएँ सामने आई हैं। फिर भी भारतीय परिप्रेक्ष्य में एक सकारात्मक पक्ष यह है कि सरकार और प्रशासन इन परिस्थितियों के प्रति पूरी तरह सतर्क हैं और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं।

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जब ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाएँ बढ़ीं, तब सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए एहतियाती कदम उठाए। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिक के घर की रसोई का चूल्हा बिना किसी बाधा के जलता रहे। इसी उद्देश्य से व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पर कुछ नियंत्रणात्मक कदम उठाए गए, ताकि घरेलू गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो। यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार सबसे पहले आम जनता के हितों को प्राथमिकता दे रही है।

हालाँकि, बाजारों में फैली कुछ निराधार अफवाहों के कारण लोगों में अनावश्यक भंडारण की प्रवृत्ति देखी गई, जिसका लाभ उठाने के लिए कुछ अवसरवादी तत्व सक्रिय हो गए। संकट के समय निजी स्वार्थ की पूर्ति करना न केवल अनैतिक है, बल्कि समाज के लिए भी हानिकारक है। संतोषजनक बात यह है कि प्रशासन ने ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

Ministry of Petroleum and Natural Gas और खाद्य आपूर्ति विभाग की सक्रियता ने स्पष्ट कर दिया है कि जमाखोरी और कालाबाजारी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। विभिन्न क्षेत्रों में अवैध गोदामों पर छापेमारी और बड़ी मात्रा में बरामद किए जा रहे गैस सिलेंडर इस बात का प्रमाण हैं कि कानून अपना काम कर रहा है और अनुचित लाभ उठाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

जनता को भी यह समझना होगा कि किल्लत की खबरें वास्तविक कमी के कारण नहीं, बल्कि कुछ स्वार्थी तत्वों के दुष्प्रचार का परिणाम हैं। ऐसे समय में जब पूरे देश को एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना चाहिए, नकारात्मकता फैलाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

भारतीय कूटनीति की सफलता का प्रमाण यह है कि वैश्विक तनाव के बावजूद कच्चे तेल की आपूर्ति निरंतर बनी हुई है। Mumbai के बंदरगाह पर कच्चे तेल से भरे जहाजों का पहुँचना इस बात का संकेत है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनी हुई है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आपूर्ति को बनाए रखने के लिए भारत सरकार लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में है।

भारत ने अतीत में भी कई बड़े संकटों का सफलतापूर्वक सामना किया है। आज उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से भी देश अपनी सामूहिक शक्ति और धैर्य के बल पर बाहर निकल सकता है। सरकार पर विश्वास रखना और अफवाहों से दूरी बनाए रखना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

यदि देश का प्रत्येक नागरिक संयम बरते और आवश्यकतानुसार ही संसाधनों का उपयोग करे, तो कालाबाजारी करने वालों की मंशा स्वतः विफल हो जाएगी। सरकार की सक्रियता, प्रशासन की सतर्कता और कूटनीतिक प्रयास यह विश्वास दिलाते हैं कि देश में हालात जल्द सामान्य होंगे।

यह समय घबराने का नहीं, बल्कि जागरूक रहने का है। जब हम मिलकर अफवाहों का खंडन करेंगे और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करेंगे, तब कोई भी संकट हमारी प्रगति को रोक नहीं पाएगा। भारत की जीवटता और संकल्प शक्ति हमेशा से संकटों से बड़ी रही है, और इस बार भी देश मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।

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