राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपर मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक
बैठक के दौरान प्रदेश के कुछ नवाचारशील पुस्तकालयों द्वारा पीपीटी के माध्यम से अपने कार्यों, प्रयोगों और उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन पुस्तकालयों द्वारा अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिसेस को मॉडल के रूप में स्वीकार करते हुए प्रदेश के अन्य सभी पुस्तकालयों में भी तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। श्री सेन शर्मा ने कहा कि बदलते समय में पुस्तकालयों की भूमिका केवल पुस्तकों के भंडार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें ‘ज्ञान के सक्रिय केंद्र’ के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है।
प्रमुख निर्देश
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राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का क्रियान्वयन: डिजिटल संसाधनों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
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डिजिटल जागरूकता: पुस्तकालयों की गतिविधियों और सेवाओं के प्रचार-प्रसार हेतु सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग किया जाए।
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ऑनलाइन ईशू-रिटर्न प्रणाली: पुस्तकों के निर्गमन एवं वापसी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जाए।
पठन संस्कृति के लिए नया रोडमैप
अपर मुख्य सचिव ने पठन अभिरुचि को बढ़ावा देने के लिए एक नया रोडमैप प्रस्तुत करते हुए निर्देश दिए कि पुस्तकालय अब अलग-थलग कार्य न करें, बल्कि बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करें। शिक्षकों के माध्यम से छात्रों को पुस्तकालयों से जोड़ने और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करने हेतु विशेष अभियान चलाए जाएं। साथ ही, स्थानीय समाज की भागीदारी से जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।
पुस्तकालयों को जीवंत बनाने पर जोर
पुस्तकालयों को अधिक सक्रिय और जीवंत स्वरूप देने के लिए प्रकाशकों, लेखकों एवं पुस्तक विक्रेताओं से निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी बल दिया गया। इसके अंतर्गत पुस्तकालयों में नियमित रूप से ‘लेखक-संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे पाठकों को लेखकों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा और पठन संस्कृति को नई दिशा मिलेगी। इस समीक्षा बैठक में विशेष कार्याधिकारी (पुस्तकालय) श्रीमती शान्त्वना तिवारी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
