शिक्षा निदेशालय में सार्वजनिक पुस्तकालयों की समीक्षा बैठक, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के क्रियान्वयन पर जोर
लखनऊ: शिक्षा निदेशालय के शिविर कार्यालय (18, पार्क रोड) में दिनांक 04 फरवरी 2026 को अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग, श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में केंद्रीय राज्य पुस्तकालय एवं प्रदेश के सभी जनपदों के पुस्तकालयाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विशेष सचिव श्री उमेश चंद्र, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) श्री महेंद्र देव, अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) श्री मनोज कुमार द्विवेदी तथा विशेष कार्याधिकारी (पुस्तकालय) श्रीमती शान्त्वना तिवारी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों को जनसामान्य के लिए अधिक उपयोगी, सुलभ और प्रभावी बनाना था। इस अवसर पर प्रदेश के नवाचारशील पुस्तकालयों द्वारा पीपीटी के माध्यम से अपने कार्यों, उपलब्धियों और अभिनव प्रयोगों का प्रस्तुतीकरण किया गया। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन पुस्तकालयों की बेस्ट प्रैक्टिसेस को मॉडल के रूप में अपनाते हुए प्रदेश के अन्य सभी पुस्तकालयों में भी तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
अपर मुख्य सचिव श्री सेन शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालयों की भूमिका केवल पुस्तकों के संग्रहण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें ‘ज्ञान केंद्र’ के रूप में विकसित करना आवश्यक है, ताकि वे समाज की शैक्षिक और बौद्धिक आवश्यकताओं की प्रभावी पूर्ति कर सकें।

उन्होंने केंद्रीय राज्य पुस्तकालय सहित प्रदेश के सभी 75 जनपदों के पुस्तकालयाध्यक्षों को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, डिजिटल कंटेंट की पर्याप्त उपलब्धता बनाई जाए, पुस्तकालयों के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया का अधिकतम उपयोग किया जाए तथा पुस्तकों के निर्गमन और वापसी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने के लिए ऑनलाइन इशू-रिटर्न प्रणाली लागू की जाए।
पठन संस्कृति के विस्तार के लिए नया रोडमैप
पठन संस्कृति को व्यापक रूप देने के लिए अपर मुख्य सचिव ने एक नया रोडमैप प्रस्तुत करते हुए निर्देश दिए कि पुस्तकालय बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करें। शिक्षक स्वयं पुस्तकालयों से सक्रिय रूप से जुड़ें और उनके माध्यम से विद्यार्थियों को भी पुस्तकों व पुस्तकालयों से जोड़ने का अभियान चलाया जाए।
इसके साथ ही पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु उनके लिए विशेष पठन कार्यक्रम, चर्चा सत्र और ज्ञान-संवाद आयोजित करने के निर्देश दिए गए। स्थानीय समाज की भागीदारी से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी बल दिया गया।
लेखक-संवाद और प्रकाशकों से समन्वय पर जोर
पुस्तकालयों को अधिक जीवंत और सक्रिय बनाने के उद्देश्य से प्रकाशकों, लेखकों एवं पुस्तक विक्रेताओं के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए। पुस्तकालयों में नियमित रूप से ‘लेखक-संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे पाठकों को लेखकों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा और पठन अभिरुचि को प्रोत्साहन मिलेगा।

