संभावनाओं के राजमार्ग में बदलती मध्यप्रदेश की सड़कें

Madhya Pradesh's roads are transforming into highways of opportunity.
 
Madhya Pradesh's roads are transforming into highways of opportunity.

(पवन वर्मा – विनायक फीचर्स)

एक समय था जब मध्यप्रदेश की पहचान धूल, गड्ढों और टूटी-फूटी सड़कों से होती थी। सड़कें विकास की वाहक नहीं, बल्कि प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा मानी जाती थीं। उस दौर में न केवल भौतिक दूरी अधिक थी, बल्कि आर्थिक संभावनाएं भी सीमित थीं। उद्योग, निवेश और आधुनिक सोच—तीनों ही खराब कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश से दूरी बनाए रखते थे।

लेकिन बीते दो दशकों में मध्यप्रदेश ने इस अभिशाप से बाहर निकलने का कठिन, परंतु निर्णायक सफर तय किया है। कच्चे रास्तों से पक्की सड़कों और संकरी गलियों से चौड़े राजमार्गों तक की यह यात्रा राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक संकल्प और दूरदर्शी नीतियों का प्रतिफल है।

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आज मध्यप्रदेश में केवल सड़कों का होना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि विश्वस्तरीय अधोसंरचना, उच्च गतिशीलता और भविष्यदृष्टि को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विदिशा और आसपास के क्षेत्रों में 4,400 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। ये परियोजनाएं साधारण निर्माण नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक धमनियों के आधुनिकीकरण का सुनियोजित प्रयास हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन स्पष्ट करता है कि मध्यप्रदेश अब अपनी ‘लैंडलॉक्ड’ भौगोलिक स्थिति को कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है। उनका लक्ष्य प्रदेश को देश के भीतर एक सशक्त लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में स्थापित करना है, जहाँ से उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की आर्थिक धाराएं सहजता से प्रवाहित हो सकें। विदिशा, सागर, रायसेन और उज्जैन जैसे सामरिक व आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने वाले 181 किलोमीटर लंबे राजमार्ग इसी दूरदृष्टि का मूर्त रूप हैं।

वास्तव में किसी भी राज्य की प्रगति का आकलन केवल बजट के आकार या योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी सड़कों की चौड़ाई, गुणवत्ता और नेटवर्क की विश्वसनीयता से किया जाता है। ये राजमार्ग केवल भौतिक दूरी नहीं घटाते, बल्कि समय, लागत और असमानता—तीनों को कम करते हैं। बुंदेलखंड और मध्य भारत का वह भूभाग, जो वर्षों तक आधुनिक परिवहन के अभाव में अपनी आर्थिक क्षमता को साकार नहीं कर सका, अब नई ऊर्जा के साथ पुनर्जीवित हो रहा है।

भोपाल-विदिशा-सागर जैसे मार्गों के चौड़ीकरण से केवल वाहनों की गति नहीं बढ़ी, बल्कि कृषि, लघु उद्योग, व्यापारिक गलियारों और सांस्कृतिक पर्यटन के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को गति मिली है। मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद डॉ. मोहन यादव ने जिस गंभीरता से अधोसंरचना को शीर्ष प्राथमिकता दी है, वह इस सच्चाई की स्वीकारोक्ति है कि मजबूत सड़कें ही मजबूत अर्थव्यवस्था की आधारशिला होती हैं। भरोसेमंद कनेक्टिविटी के बिना न तो बड़े निवेश को आकर्षित किया जा सकता है और न ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती दी जा सकती है।

इस विकास मॉडल की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें मानवीय सुरक्षा और कौशल विकास को भी समान महत्व दिया गया है। अक्सर बड़ी परियोजनाओं के शोर में सड़क सुरक्षा और प्रशिक्षण जैसे पहलू पीछे छूट जाते हैं, किंतु विदिशा में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक सेंटर और अत्याधुनिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की आधारशिला यह प्रमाणित करती है कि मोहन यादव सरकार का दृष्टिकोण समग्र और संतुलित है। सरकार केवल डामर और कंक्रीट नहीं बिछा रही, बल्कि एक अनुशासित, जिम्मेदार और सुरक्षित ड्राइविंग संस्कृति की नींव रख रही है।

जहाँ एक ओर उच्च स्तरीय सड़कें बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें उपयोग करने वाला मानव संसाधन भी प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाया जा रहा है। इसका प्रत्यक्ष लाभ सड़क दुर्घटनाओं में कमी के रूप में दिखेगा, वहीं अप्रत्यक्ष रूप से यह परिवहन, लॉजिस्टिक्स और भारी वाहन संचालन के क्षेत्र में हजारों युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा। यह निवेश केवल इंफ्रास्ट्रक्चर में नहीं, बल्कि मानव जीवन और युवा भविष्य में किया गया निवेश है।

आर्थिक दृष्टि से ये राजमार्ग मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर अधिक प्रतिस्पर्धी राज्य के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। सागर वेस्टर्न बायपास जैसी ग्रीनफील्ड परियोजनाएं शहरी क्षेत्रों में यातायात के दबाव को कम करने के साथ-साथ माल परिवहन की लागत और समय में उल्लेखनीय कमी लाएंगी। उद्योग जगत हमेशा उन्हीं क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है जहाँ लॉजिस्टिक्स सहज और परिवहन निर्बाध हो।

इन सड़कों का प्रभाव कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गहरा है। कृषि प्रधान राज्य मध्यप्रदेश में किसान की समृद्धि सीधे उसकी बाजार तक पहुंच से जुड़ी होती है। देहगांव से लखनौनी जैसे मार्गों का सुदृढ़ीकरण उन किसानों के लिए संजीवनी है, जो वर्षों से परिवहन की लागत और समय के बोझ से जूझते रहे हैं। जब गांव की सड़क सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ती है, तो किसान को केवल रास्ता नहीं, बल्कि उचित मूल्य और सम्मानजनक बाजार भी मिलता है।

पर्यटन के क्षेत्र में भी यह सड़क नेटवर्क प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नई पहचान देने वाला है। सांची, विदिशा और उज्जैन जैसे ऐतिहासिक केंद्र बेहतर कनेक्टिविटी के साथ एक बड़े पर्यटन सर्किट के रूप में उभर सकते हैं, जिससे स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प और पारंपरिक उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी।

इस पूरे परिदृश्य में केंद्र और राज्य सरकार के बीच सशक्त समन्वय भी उल्लेखनीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक विजन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की कार्यकुशलता को प्रदेश की ज़मीन पर प्रभावी रूप से उतारने का कार्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कर रहे हैं। यही ‘डबल इंजन सरकार’ का वास्तविक अर्थ है, जहाँ नीति, संसाधन और क्रियान्वयन एक ही दिशा में अग्रसर हों।

सड़कें केवल पत्थर, गिट्टी और डामर का ढांचा नहीं होतीं; वे किसी राज्य की गति, समाज की आकांक्षाओं और भविष्य के आत्मविश्वास का प्रतिबिंब होती हैं। विदिशा से निकलकर प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक फैलता यह राजमार्ग नेटवर्क मध्यप्रदेश के उस संकल्प का साक्ष्य है, जिसमें विकास का उद्देश्य केवल आंकड़े नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में ठोस परिवर्तन लाना है।

आज जब ये चौड़ी, सुरक्षित और आधुनिक सड़कें आकार ले रही हैं, तो स्पष्ट है—मध्यप्रदेश केवल रास्ते नहीं बदल रहा, वह अपना भविष्य गढ़ रहा है। ये सड़कें वास्तव में संभावनाओं के राजमार्ग हैं, जिन पर चलकर मध्यप्रदेश एक सुरक्षित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी राज्य के रूप में आगे बढ़ रहा है।

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