Kidney transplantation को नई दिशा दे रही रोबोटिक सर्जरी
लखनऊ: एंड-स्टेज रीनल डिजीज (ESRD) के मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट को गोल्ड स्टैंडर्ड इलाज माना जाता है। पारंपरिक ओपन सर्जरी लंबे समय से प्रभावी रही है, लेकिन इससे अधिक दर्द, लंबी रिकवरी, संक्रमण का जोखिम और कॉस्मेटिक कमियां जैसी चुनौतियां जुड़ी रहती हैं—खासकर डायबिटीज और मोटापे से ग्रस्त मरीजों में।
Max Super Speciality Hospital, Saket के यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के चेयरमैन Dr. Anant Kumar के अनुसार, इन चुनौतियों को कम करने के लिए रोबोटिक आधारित मिनिमली इनवेसिव सर्जरी तेजी से अपनाई जा रही है।
कैसे काम करती है रोबोटिक तकनीक?
रोबोटिक सर्जरी सर्जन को उन्नत 3D विज़न और अत्यधिक सटीकता प्रदान करती है।
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छोटे चीरे के माध्यम से सर्जरी
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कम दर्द
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संक्रमण का कम जोखिम
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तेजी से रिकवरी
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बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम
विशेष रूप से मोटापे और घाव भरने में जोखिम वाले मरीजों के लिए यह तकनीक काफी लाभकारी मानी जा रही है।
जटिलताओं में कमी
रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट में लिंफोसील जैसी जटिलताओं की संभावना बेहद कम पाई गई है।
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ऑपरेशन का समय थोड़ा अधिक हो सकता है
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अस्पताल में रहने की अवधि लगभग समान रहती है
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अधिकांश मामलों में प्रत्यारोपित किडनी तुरंत कार्य करना शुरू कर देती है
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गंभीर जटिलताओं के मामले बेहद कम
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मरीज जल्दी चलने-फिरने लगते हैं
प्रमुख चुनौती: लागत
हालांकि रोबोटिक ट्रांसप्लांट की सबसे बड़ी सीमा इसकी अधिक लागत है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि जटिल मामलों—विशेषकर मोटापा, डायबिटीज या घाव से संबंधित जोखिम वाले मरीजों—के लिए यह तकनीक सुरक्षित, आधुनिक और प्रभावी विकल्प साबित हो रही है।
