1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी में हेल्थकेयर और एमएसएमई की अहम भूमिका

Healthcare and MSMEs play a crucial role in a $1 trillion economy.
 
इस पैनल में शामिल थे:  डॉ. रंजीत मेहता, सीईओ एवं सेक्रेटरी जनरल, पीएचडीसीसीआई  श्री राजेश निगम, को-चेयर यूपी स्टेट चैप्टर, पीएचडीसीसीआई  डॉ. सूर्यकांत, प्रोफेसर एवं हेड, डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेट्री मेडिसिन, KGMU  श्री प्रणव गुप्ता, डायरेक्टर, GB System Equipment Pvt. Ltd.  श्री आशुतोष राय, डिप्टी डायरेक्टर, Bureau of Indian Standard  श्री जय कुमार गुप्ता, जनरल मैनेजर, SIDBI, लखनऊ  डॉ. दीपक कुमार अग्रवाल, फाउंडर एवं प्रेसिडेंट, Gastro Care Medical Research Foundation, Glob Healthcare  श्री अतुल श्रीवास्तव, सीनियर रीजनल डायरेक्टर, यूपी स्टेट चैप्टर, पीएचडीसीसीआई  हेल्थकेयर में एमएसएमई का प्रभाव  डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि नीति आयोग के आकांक्षात्मक विकास कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। पहले यहां केवल 8 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब प्रदेश में 80 मेडिकल कॉलेज, 33 एम्स और 3 मेडिकल यूनिवर्सिटीज स्थापित हैं। मेडिकल शिक्षा में यह वृद्धि हेल्थकेयर के विकास की नींव है।  इस सुधार का सबसे बड़ा असर इन्फेंट मोर्टैलिटी रेट और मैटरनल मोर्टैलिटी रेट में देखा जा सकता है। यूपी में इन्फेंट मोर्टैलिटी 38 प्रति हजार और मैटरनल मोर्टैलिटी 150 प्रति लाख तक घट गई है।  डॉ. सूर्यकांत ने यह भी बताया कि रोबोटिक्स और नवाचार हेल्थकेयर सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल रोबोट से लैस हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और दक्षता बढ़ा रहे हैं।  1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में हेल्थसेक्टर की भूमिका  डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं केवल सामाजिक कल्याण का आधार नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक उत्पादकता में भी योगदान देती हैं। जब बच्चे, माताएं और समाज के सभी लोग स्वस्थ होंगे, तभी वे समाज में बेहतर योगदान दे सकते हैं।  उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक्सप्रेस-वे और यूपीआई जैसी डिजिटल पहल प्रदेश को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाती हैं।  SIDBI और एमएसएमई के लिए क्रेडिट फैसिलिटीज़  श्री जय कुमार गुप्ता, GM, SIDBI, ने बताया कि SIDBI डायरेक्ट और इनडायरेक्ट फाइनेंसिंग के माध्यम से एमएसएमई को क्रेडिट उपलब्ध कराता है।  डायरेक्ट फाइनेंसिंग: SIDBI सीधे एमएसएमई को लोन देता है।  इनडायरेक्ट फाइनेंसिंग: बैंक, एनबीएफसी और अन्य संस्थाओं को रिफाइनेंसिंग प्रदान करता है।  विशेष रूप से हेल्थकेयर सेक्टर में फार्मास्यूटिकल्स, अस्पताल, मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग आदि के लिए सरकारी योजनाएं लागू की जाती हैं। कोविड-19 संकट के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेष स्कीम्स लॉन्च की गई थीं।  जीआई टैग से छोटे व्यापारियों को नई पहचान  UPITEX में GI टैग प्राप्त उत्पादों की धूम रही। नाबार्ड की सहायता से छोटे कारोबारियों को वैश्विक पहचान मिली।  वाराणसी: शहनाई निर्माता राकेश कुमार बताते हैं कि उनके दादा से चले आ रहे शहनाई निर्माण को GI टैग मिलने से न केवल सम्मान मिला, बल्कि व्यापार में बढ़ोतरी भी हुई। अब देश-विदेश से ऑर्डर आते हैं।  निजामाबाद: ब्लैक क्ले पॉटरी बनाने वाले दीपक प्रजापति के व्यापार में GI टैग के बाद 20% की वृद्धि हुई। पीएम मोदी ने एक्सप्रेस-वे उद्घाटन और G7 समिट में भी उनकी पॉटरी का उपयोग किया।  मुरादाबाद: पीतल के बर्तन बनाने वाले मोहम्मद आबिद के अनुसार GI टैग और नाबार्ड सहयोग से छोटे व्यापारी भी अब वैश्विक बाजार में व्यापार कर पा रहे हैं।

 जनवरी 2026, लखनऊ: भारत में एमएसएमई सेक्टर अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। स्वास्थ्य सेवा उद्योग में एमएसएमई की भूमिका और भी महत्वपूर्ण है, जिसमें अस्पताल, क्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, फार्मास्यूटिकल कंपनियां और मेडिकल इक्विपमेंट सप्लायर्स शामिल हैं।

एमएसएमई उद्यमों को विकास के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है, लेकिन बैंकिंग और वित्तीय चुनौतियों के कारण क्रेडिट प्राप्त करना अक्सर कठिन होता है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए पीएचडीसीसीआई ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित UPITEX कार्यक्रम के दूसरे दिन “क्रेडिट फैसिलिटी स्कीम फॉर एमएसएमई इन हेल्थकेयर इंडस्ट्रीज” विषय पर एक विशेष कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया।

इस पैनल में शामिल थे:

  • डॉ. रंजीत मेहता, सीईओ एवं सेक्रेटरी जनरल, पीएचडीसीसीआई

  • श्री राजेश निगम, को-चेयर यूपी स्टेट चैप्टर, पीएचडीसीसीआई

  • डॉ. सूर्यकांत, प्रोफेसर एवं हेड, डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेट्री मेडिसिन, KGMU

  • श्री प्रणव गुप्ता, डायरेक्टर, GB System Equipment Pvt. Ltd.

  • श्री आशुतोष राय, डिप्टी डायरेक्टर, Bureau of Indian Standard

  • श्री जय कुमार गुप्ता, जनरल मैनेजर, SIDBI, लखनऊ

  • डॉ. दीपक कुमार अग्रवाल, फाउंडर एवं प्रेसिडेंट, Gastro Care Medical Research Foundation, Glob Healthcare

  • श्री अतुल श्रीवास्तव, सीनियर रीजनल डायरेक्टर, यूपी स्टेट चैप्टर, पीएचडीसीसीआई

हेल्थकेयर में एमएसएमई का प्रभाव

डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि नीति आयोग के आकांक्षात्मक विकास कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। पहले यहां केवल 8 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब प्रदेश में 80 मेडिकल कॉलेज, 33 एम्स और 3 मेडिकल यूनिवर्सिटीज स्थापित हैं। मेडिकल शिक्षा में यह वृद्धि हेल्थकेयर के विकास की नींव है।

इस सुधार का सबसे बड़ा असर इन्फेंट मोर्टैलिटी रेट और मैटरनल मोर्टैलिटी रेट में देखा जा सकता है। यूपी में इन्फेंट मोर्टैलिटी 38 प्रति हजार और मैटरनल मोर्टैलिटी 150 प्रति लाख तक घट गई है।

डॉ. सूर्यकांत ने यह भी बताया कि रोबोटिक्स और नवाचार हेल्थकेयर सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल रोबोट से लैस हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और दक्षता बढ़ा रहे हैं।

1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में हेल्थसेक्टर की भूमिका

डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं केवल सामाजिक कल्याण का आधार नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक उत्पादकता में भी योगदान देती हैं। जब बच्चे, माताएं और समाज के सभी लोग स्वस्थ होंगे, तभी वे समाज में बेहतर योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक्सप्रेस-वे और यूपीआई जैसी डिजिटल पहल प्रदेश को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाती हैं।

SIDBI और एमएसएमई के लिए क्रेडिट फैसिलिटीज़

श्री जय कुमार गुप्ता, GM, SIDBI, ने बताया कि SIDBI डायरेक्ट और इनडायरेक्ट फाइनेंसिंग के माध्यम से एमएसएमई को क्रेडिट उपलब्ध कराता है।

  • डायरेक्ट फाइनेंसिंग: SIDBI सीधे एमएसएमई को लोन देता है।

  • इनडायरेक्ट फाइनेंसिंग: बैंक, एनबीएफसी और अन्य संस्थाओं को रिफाइनेंसिंग प्रदान करता है।

विशेष रूप से हेल्थकेयर सेक्टर में फार्मास्यूटिकल्स, अस्पताल, मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग आदि के लिए सरकारी योजनाएं लागू की जाती हैं। कोविड-19 संकट के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेष स्कीम्स लॉन्च की गई थीं।

जीआई टैग से छोटे व्यापारियों को नई पहचान

UPITEX में GI टैग प्राप्त उत्पादों की धूम रही। नाबार्ड की सहायता से छोटे कारोबारियों को वैश्विक पहचान मिली।

  • वाराणसी: शहनाई निर्माता राकेश कुमार बताते हैं कि उनके दादा से चले आ रहे शहनाई निर्माण को GI टैग मिलने से न केवल सम्मान मिला, बल्कि व्यापार में बढ़ोतरी भी हुई। अब देश-विदेश से ऑर्डर आते हैं।

  • निजामाबाद: ब्लैक क्ले पॉटरी बनाने वाले दीपक प्रजापति के व्यापार में GI टैग के बाद 20% की वृद्धि हुई। पीएम मोदी ने एक्सप्रेस-वे उद्घाटन और G7 समिट में भी उनकी पॉटरी का उपयोग किया।

  • मुरादाबाद: पीतल के बर्तन बनाने वाले मोहम्मद आबिद के अनुसार GI टैग और नाबार्ड सहयोग से छोटे व्यापारी भी अब वैश्विक बाजार में व्यापार कर पा रहे हैं।

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