RSS हमारी चेतना का केंद्र: हरदोई में बोले प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख राजकिशोर— 'राष्ट्र निर्माण के लिए पंच परिवर्तन के पांचों आयाम जरूरी'
हरदोई/लखनऊ, 08 जून 2026: जनपद के अल्लीपुर स्थित पं. बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधारों को लेकर एक विशेष सत्र संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांत सामाजिक समरसता प्रमुख राजकिशोर जी ने 'हमारी चेतना का केंद्र: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' विषय पर आचार्यों (शिक्षकों) का विस्तृत मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन के साथ हुआ। मंच का कुशल संचालन मैगलगंज के प्रधानाचार्य उत्तम मिश्र ने किया, जबकि अतिथियों का परिचय लखनऊ संभाग के संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल ने कराया। रानोपाली (अयोध्या) के प्रधानाचार्य अतुल कुमार अवस्थी ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
राष्ट्र निर्माण के लिए 'पंच परिवर्तन' के 5 आयाम हैं अनिवार्य
अपने संबोधन के दौरान मुख्य अतिथि राजकिशोर जी ने संघ के मूल विजन को सामने रखते हुए कहा कि यदि हमें एक सशक्त और समर्थ राष्ट्र का निर्माण करना है, तो समाज को 'पंच परिवर्तन' के पांच प्रमुख आयामों को अपने दैनिक जीवन में उतारना होगा:
1. सामाजिक समरसता (प्रभु राम का संदेश)
उन्होंने सामाजिक समरसता की महत्ता को समझाने के लिए भगवान श्री राम के जीवन प्रसंगों का सुंदर उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहलाए क्योंकि उन्होंने समाज के हर वर्ग को गले लगाया और सम्मान दिया। केवट से मित्रता और माता शबरी के प्रेमपूर्वक दिए जूठे बेर स्वीकार करना ही हमारी वास्तविक सनातन और भारतीय संस्कृति की पहचान है।"
2. कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्य)
आधुनिक जीवनशैली के कारण कमजोर पड़ रहे पारिवारिक रिश्तों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में 'अतिथि देवो भव' की परंपरा है। परिवारों में प्रेम, आत्मीयता और एक-दूसरे के प्रति आदर भाव का संरक्षण होना आज के दौर में बेहद आवश्यक है।

3. पर्यावरण संरक्षण
प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पॉलीथीन का अत्यधिक उपयोग धरती और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ हवा और पानी देने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें।
4. नागरिक कर्तव्य
शिक्षकों की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आचार्यों की जिम्मेदारी सिर्फ किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। उन्हें विद्यार्थियों के भीतर राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार भी कूट-कूट कर भरने होंगे।
5. स्वदेशी का संकल्प
देश की आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता के लिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर निर्मित स्वदेशी वस्तुओं और उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।
कार्यक्रम में ये गणमान्य जन रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण वर्ग में जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के उपाध्यक्ष एवं विद्यालय प्रबंधक शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी, वर्गाधिकारी संतोष त्रिवेदी, जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक मिथिलेश अवस्थी, सीतापुर संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह और श्रावस्ती संभाग निरीक्षक कैलाश चंद्र वर्मा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य प्रबुद्ध जन और शिक्षक उपस्थित रहे।



