ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन 16 सितंबर को सौंपेगा मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन

Rural Journalist Association will submit a seven-point memorandum addressed to the Chief Minister on September 16
 
Rural Journalist Association will submit a seven-point memorandum addressed to the Chief Minister on September 16
लखनऊ डेस्क (प्रत्यूष पाण्डेय)। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने घोषणा की है कि आगामी 16 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में संगठन से जुड़े पत्रकार जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपेंगे।
संगठन का कहना है कि ग्रामीण अंचलों में कार्यरत पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने और विकास योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। लोकतंत्र की सशक्त धारा को बनाए रखने वाली इस पत्रकारिता के लिए शासन स्तर पर गंभीर पहल आवश्यक है।
जिला अध्यक्ष अभिषेक श्रीवास्तव और महामंत्री आर.एल. पाण्डेय ने बताया कि ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
1. कार्यालय भवन का आवंटन – अन्य संगठनों की भांति ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश को भी राज्य मुख्यालय लखनऊ में दारुलसफा या ओसीआर परिसर में भवन उपलब्ध कराया जाए, ताकि दूर-दराज़ जिलों से आने वाले पत्रकारों को ठहरने व बैठक करने की सुविधा मिल सके।
2. आयुष्मान भारत योजना का लाभ – मान्यता प्राप्त पत्रकारों की तरह ग्रामीण पत्रकारों को भी आयुष्मान भारत योजना में शामिल कर उनके परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिले। इसमें केवल सक्रिय संवाददाताओं को शामिल किया जाए, जिनकी सूची जिला सूचना कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।
3. बीमा व पेंशन योजना – ग्रामीण पत्रकारों को बीमा कवर उपलब्ध कराया जाए और 60 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन का लाभ दिया जाए।
4. प्राथमिकी दर्ज होने से पूर्व जांच – ग्रामीण पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा जांच अनिवार्य की जाए, ताकि अनावश्यक उत्पीड़न रोका जा सके।
5. नियमित बैठकें – राज्य और जिला स्तर की तर्ज पर तहसील स्तर पर भी प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीण पत्रकारों की नियमित बैठकें सुनिश्चित की जाएं।
6. आपदा या दुर्घटना सहायता – किसी ग्रामीण पत्रकार की प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके परिजनों को किसान बीमा योजना की तरह तुरंत 5 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए।
7. फर्जी पत्रकारों पर कार्रवाई – ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध वसूली करने वाले फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके लिए जिला स्तर पर स्थायी समिति की बैठक कर असली और फर्जी पत्रकारों की शिनाख्त की जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो ग्रामीण पत्रकार निडर होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे और समाजहित में और अधिक प्रभावी योगदान दे पाएंगे।

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