आरजीआईपीटी जायस में ‘सौहार्द्य 2026’ का शुभारंभ, सामाजिक नवाचार और उद्यमिता पर रहा जोर
जायस, अमेठी। राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी), जायस में 30 और 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित सामाजिक-तकनीकी उत्सव ‘सौहार्द्य 2026’ का उद्घाटन सामाजिक उत्तरदायित्व, तकनीकी नवाचार, सतत विकास, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता के संदेश के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह में शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, संस्थान के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने समकालीन सामाजिक चुनौतियों के समाधान में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत विशिष्ट अतिथियों और आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। सामाजिक परिषद के संयोजक डॉ. अरविंद सिंह ने अतिथियों और उपस्थित लोगों का स्वागत किया। उन्होंने आधुनिक तकनीकी प्रगति को अपनाने के साथ पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी नवाचार को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का आह्वान किया।
सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हो तकनीकी नवाचार
आरजीआईपीटी के अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) ने कहा कि ‘सौहार्द्य’ सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और उत्तरदायी नवाचार को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। तकनीकी प्रगति के साथ सामाजिक सौहार्द, संवेदनशीलता और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों की सफलता केवल पुरस्कारों और सम्मानों से नहीं, बल्कि इनके माध्यम से बनने वाली मित्रताओं, अनुभवों और सार्थक सीख से भी आंकी जानी चाहिए।
रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान से जुड़े डॉ. हरीश कुमार ने भारत की भौगोलिक और सामाजिक विविधता का उल्लेख करते हुए विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की जरूरतों के अनुरूप टिकाऊ समाधान विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने आत्मनिर्भरता, स्वदेशी नवाचार और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि गलतियां सीखने और नवाचार की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं।
पर्यावरण वैज्ञानिक एवं सलाहकार प्रो. बिनीषा ने सामाजिक समस्याओं के समाधान में समावेशिता, रचनात्मकता और उद्यमिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से समस्या-समाधान की सोच विकसित करने और छोटी दिखाई देने वाली सामाजिक समस्याओं के लिए भी नए समाधान खोजने की अपील की। उन्होंने शिक्षा में उद्यमिता को शामिल करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियां नए अवसर पैदा कर रही हैं। ऐसे में युवाओं को केवल रोजगार पाने तक सीमित न रहकर रोजगार सृजन की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।
विज्ञान और समाज के संबंधों पर हुई चर्चा
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने विज्ञान और समाज के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने, आसपास के परिवेश का सूक्ष्म अवलोकन करने और अपने ज्ञान का उपयोग वास्तविक सामाजिक समस्याओं के समाधान में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नागरिक उत्तरदायित्व और सामाजिक सहभागिता के महत्व के साथ भारत की समृद्ध विरासत और प्राचीन शिक्षा परंपराओं का भी उल्लेख किया।
आरजीआईपीटी के निदेशक ने भारत की विकास यात्रा में नवाचार, स्टार्टअप और सामाजिक उद्यमिता के बढ़ते महत्व पर विचार रखे। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा, विशेषकर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का उल्लेख करते हुए सेल्को इंडिया के सह-संस्थापक और सामाजिक उद्यमी हरीश हांडे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि किफायती और टिकाऊ तकनीकी समाधानों के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने में सामाजिक उद्यमिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निदेशक ने सामाजिक उद्देश्य से प्रेरित सफल उद्यम के उदाहरण के रूप में अमूल का भी उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से पारंपरिक रोजगार की आकांक्षा से आगे बढ़कर नवप्रवर्तक, उद्यमी और रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया। संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा डिजाइन नवाचार और उत्पाद नवाचार (डीआईपी/डीआईसी) की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने उन्हें वास्तविक सामाजिक जरूरतों पर आधारित स्टार्टअप विचार विकसित करने और नवाचार-केंद्रित गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए विभिन्न गतिविधियां
‘सौहार्द्य 2026’ के अंतर्गत कई प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें ‘निर्माण’—राष्ट्रीय सामाजिक-तकनीकी सम्मेलन, ‘सोशियोथॉन’—सामाजिक नवाचार चुनौती, विज्ञान एवं सामाजिक प्रदर्शनी, ‘प्रतिबिम्ब’—लघु फिल्म प्रतियोगिता और सामाजिक विषयों पर आधारित रील निर्माण प्रतियोगिता शामिल हैं।
इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों और व्यापक समुदाय के बीच संवाद को बढ़ावा देना तथा वास्तविक सामाजिक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना है।
उद्घाटन समारोह में उभरा मुख्य संदेश यही रहा कि प्रौद्योगिकी, सामाजिक चेतना, स्थिरता और उद्यमशील सोच को एक साथ जोड़कर समाज में सकारात्मक एवं दीर्घकालिक बदलाव लाया जा सकता है। ‘सौहार्द्य 2026’ के माध्यम से आरजीआईपीटी ने तकनीकी रूप से दक्ष, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और नवाचार के प्रति समर्पित भावी नेतृत्व तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
