Sampoorna Swasthya Mahotsav: बेंगलुरु में गायत्री परिवार की अनूठी कार्यशाला; IIT खड़गपुर के पूर्व छात्र अश्विनी कटरे ने दिए समग्र स्वास्थ्य के गुरुमंत्र

Sampoorna Swasthya Mahotsav: A unique workshop by Gayatri Pariwar in Bengaluru; IIT Kharagpur alumnus Ashwini Katre shared key insights on holistic health.
 
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बेंगलुरु डेस्क (20 जून 2026):

गार्डन सिटी बेंगलुरु के ब्रिगेड पार्कसाइड ईस्ट में शनिवार (20 जून 2026) को गायत्री परिवार द्वारा "संपूर्ण स्वास्थ्य महोत्सव" के अंतर्गत एक विशेष और वृहद कार्यशाला का आयोजन किया गया। सायं 4:00 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस और परिवारों को शारीरिक, मानसिक, प्राणिक तथा आध्यात्मिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था। इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों और परिवारों ने हिस्सा लिया और जाना कि किस प्रकार आधुनिक दौर में भी सनातन जीवन पद्धति को अपनाकर पूर्णतः निरोगी रहा जा सकता है।

चेतना और ऊर्जा के समग्र विकास पर बल

गायत्री परिवार के कर्नाटक प्रदेश कोऑर्डिनेटर शेखर चतुर्वेदी ने संस्था के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि गायत्री परिवार का मुख्य ध्येय लोगों के व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और एक सशक्त समाज के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का आयोजन भी इसी उद्देश्य के तहत किया गया, जहां स्वास्थ्य को केवल शारीरिक तंदुरुस्ती तक सीमित न मानकर मन, प्राणिक ऊर्जा और चेतना के सर्वांगीण व समग्र विकास (Holistic Development) पर विशेष जोर दिया गया।

आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र ने संभाली कमान

इस तीन घंटे की गहन कार्यशाला का सफल संचालन और मुख्य वक्ता की भूमिका इंजीनियर अश्विनी कटरे ने निभाई। श्री कटरे ने अपनी उच्च शिक्षा प्रतिष्ठित आईआईटी खड़गपुर (M.Tech) और जर्मनी के प्रसिद्ध टीयू ड्रेसडेन विश्वविद्यालय (TU Dresden) से प्राप्त की है। उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राण विज्ञान, अवचेतन मन के रूपांतरण (Subconscious Mind Transformation) और समग्र स्वास्थ्य जैसे गूढ़ विषयों का बेहद गहरा व्यावहारिक अनुभव है।

आसन, प्राणायाम और दिनचर्या के सरल सूत्र

मुख्य प्रवक्ता अश्विनी कटरे ने उपस्थित जनसमूह को बेहद सरल और बोधगम्य भाषा में दैनिक जीवन को स्वस्थ बनाने के तरीके सिखाए। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर मार्गदर्शन किया:

  • आदर्श दिनचर्या: सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक की सही दिनचर्या का स्वास्थ्य पर प्रभाव।

  • संतुलित खान-पान: शरीर की प्राणिक ऊर्जा को बढ़ाने वाले आहार का चयन कैसे करें।

  • योग और प्राणायाम: रोजमर्रा के जीवन में सरल आसनों और प्राणायाम के जरिए मानसिक तनाव को दूर करने और आंतरिक चेतना को जागृत करने के प्रायोगिक तरीके।

कार्यशाला की समाप्ति पर उपस्थित लोगों ने इसे आज के तनावभरे माहौल में मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा बढ़ाने वाला एक बेहद जरूरी सत्र बताया।

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