सनातन संस्कृति, एकता, सद्भावना और सामाजिक समरसता का प्रतीक – होली

Holi – a symbol of eternal culture, unity, goodwill and social harmony
 
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(इंजी. अतिवीर जैन ‘पराग’ – विभूति फीचर्स)
भारतीय संस्कृति में त्यौहारों का विशेष महत्व है। होली, दशहरा और दीपावली जैसे पर्व आसुरी शक्तियों पर विजय और धर्म की स्थापना के प्रतीक माने जाते हैं। होली का पर्व प्रकृति के अनुरूप बसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रारंभ होता है। Basant Panchami से ही इसकी तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं—बच्चे और युवा होली स्थल पर डंडा गाड़ते हैं तथा लकड़ियाँ और उपले एकत्रित करते हैं।

होलिका दहन का महत्व

होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। एक दिन पूर्व होलिका दहन (छोटी होली) किया जाता है। स्त्रियाँ पूजा की थाली लेकर होलिका की परिक्रमा करती हैं, कलावा बाँधती हैं और उपलों की माला चढ़ाती हैं। शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। गेहूँ और चने की बालियाँ भूनकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण की जाती हैं, इसलिए इसे ‘होला’ भी कहा जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा Hiranyakashipu ने घोर तप कर वरदान प्राप्त किया और स्वयं को अजेय समझने लगा। उसका पुत्र Prahlada भगवान का परम भक्त था। बहन Holika को अग्नि से न जलने का वरदान था, परंतु जब वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी तो स्वयं जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। अंततः भगवान Narasimha ने अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया। यह कथा अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देती है।

रंगों का उत्सव – धुलेंडी

होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी या फागुआ मनाया जाता है। लोग गुलाल और रंग लगाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं। गुझिया, दही-भल्ले, पापड़, पकौड़ी और ठंडाई जैसे व्यंजनों का आनंद लिया जाता है। दोपहर बाद लोग स्नान कर सायंकाल होली मिलने जाते हैं। जगह-जगह होली मिलन, साहित्यिक गोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

ब्रज की अनुपम होली

ब्रज क्षेत्र की होली विश्वविख्यात है। Mathura, Vrindavan, Barsana और Gokul में बसंत पंचमी से रंगपंचमी तक उत्सव का माहौल रहता है। विशेष रूप से बरसाना की लठमार होली प्रसिद्ध है, जो Radha और Krishna की लीला से जुड़ी परंपरा का प्रतीक है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ आकर इस अनूठे उत्सव का आनंद लेते हैं।

बदलता स्वरूप, वही संदेश

आजकल शहरी सोसाइटियों में सामूहिक होली, रेन डांस, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भोज का प्रचलन बढ़ा है। इससे सामाजिक एकता और समरसता का संदेश प्रसारित होता है।
निस्संदेह, होली भारतीय सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह पर्व जाति-धर्म के भेदभाव को मिटाकर प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश देता है। होली वास्तव में आपसी प्रेम और सामाजिक एकता का उत्सव है।

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