नायक' या 'नालायक'? संजय दत्त की RSS की तारीफ पर मचा सियासी तूफान

 
Sanjay Dutt’s RSS Praise Sparks Congress Fury: 'Hero or Traitor?' – The Explosive Controversy

Imagine  कीजिए – एक तरफ 'मुन्नाभाई' की मुस्कान, दूसरी तरफ RSS की केसरिया ध्वज। और बीच में? एक ऐसा बवाल जो सोशल मीडिया को हिला रहा है! जी हां, बोलते हैं संजय दत्त की RSS को दी गई तारीफ पर कांग्रेस के एक नेता का ऐसा धमाका कि 'नायक' शब्द ही 'नालायक' बन गया।  क्या संजू बाबा ने एक ट्वीट से परिवार की विरासत को दांव पर लगा दिया? या ये बस सियासत का नया खेल है, जहां बॉलीवुड स्टार्स को भी राजनीतिक मोहरा बना लिया जाता है? आज के इस वीडियो में हम खोलेंगे इस पूरे कांड का राज – RSS के 100 साल पूरे होने से लेकर कांग्रेस की कड़ी नाराजगी तक। क्या ये सिर्फ एक बधाई थी या कुछ और? 

सबसे पहले आइए समझते हैं कि ये बवाल आखिर शुरू कैसे हुआ। 2 अक्टूबर 2025 को, विजयादशमी के पावन अवसर पर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – यानी RSS – ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे किए। ये एक ऐतिहासिक मौका था। पूरे देश में कार्यक्रम हो रहे थे, शताब्दी समारोह की धूम मची हुई थी। RSS के स्वयंसेवक सड़कों पर, गांवों में, शहरों में – हर जगह राष्ट्र निर्माण के संदेश दे रहे थे। और इसी बीच, बॉलीवुड के दिग्गज संजय दत्त ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। वो वीडियो देखने लायक था! संजय दत्त माथे पर केसरिया तिलक लगाए, गंभीर अंदाज में बोल रहे थे। उन्होंने कहा – 'इस विजयादशमी पर हम RSS के 100 साल के गौरवशाली सफर का उत्सव मना रहे हैं। हर मुश्किल घड़ी में संघ ने देश और समाज के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया है। प्राकृतिक आपदाओं में, संकट के समय में, संघ के स्वयंसेवक हमेशा आगे रहे। संघ सदैव देश के साथ खड़ा रहा है।' वाह! क्या बात कही ना? संजय दत्त ने न सिर्फ बधाई दी, बल्कि RSS के राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और निस्वार्थ समर्पण की जमकर तारीफ की। उन्होंने लोगों से अपील भी की कि हम सब मिलकर देश की भलाई के लिए काम करें। ये वीडियो इंस्टाग्राम और X (पूर्व ट्विटर) पर वायरल हो गया। लाखों व्यूज, हजारों लाइक्स। BJP और RSS समर्थक तो खुशी से झूम उठे। लेकिन... दोस्तों, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। और यहां तो तूफान आ गया!" 

अब आता है असली ट्विस्ट! संजय दत्त का ये वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, कांग्रेस के खेमे में आग लग गई। सबसे पहले भड़के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र राजपूत। जी हां, वो ही सुरेंद्र राजपूत जो मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति के पुराने योद्धा हैं। उन्होंने X पर एक पोस्ट किया, जो देखते ही देखते मीम्स का राजा बन गया। क्या लिखा उन्होंने? सुनिए – 'नायक नहीं... नालायक है तू!' ये लाइन तो 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' की याद दिला देती है, लेकिन यहां तारीफ की जगह तंज है। सुरेंद्र राजपूत ने आगे लिखा – 'RSS की तारीफ करने वाले संजय दत्त, तुम्हें शर्म आनी चाहिए। तुम्हारे पिता सुनील दत्त कांग्रेस के सच्चे सिपाही थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी, गरीबों के लिए आवाज उठाई। तुम्हारी बहन प्रिया दत्त आज भी पार्टी की मजबूत कड़ी हैं। और तुम? RSS की चाटुकारिता कर रहे हो? ये क्या नौटंकी है? क्या पिता-पुत्र की विरासत को भूल गए हो?' ये पोस्ट न सिर्फ वायरल हुई, बल्कि कांग्रेस के हजारों समर्थकों ने इसे रीट्वीट कर संजय दत्त पर हमला बोला। कोई कह रहा था – 'संजू बाबा, जेल से बाहर आते ही राजनीति में कूद पड़े?' तो कोई चुटकी ले रहा था – 'मुन्ना भाई अब RSS भाई बन गए!' सोशल मीडिया पर #NalayakSanjayDutt जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। दोस्तों, ये देखकर लगता है कि संजय दत्त ने एक पत्थर तो फेंका, लेकिन लहरें तो सियासत की उठीं।"

क्यों ये मामला इतना sensitive  हो गया। संजय दत्त का परिवार तो कांग्रेस से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता, स्वर्गीय सुनील दत्त, मुंबई के मशहूर सांसद थे। 1980 के दशक से लेकर 2000 तक, उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर कई बार चुनाव लड़ा और जीता। सुनील दत्त ने न सिर्फ फिल्मों में कमाल किया, बल्कि राजनीति में भी गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर आवाज बुलंद की। उनकी पत्नी नरगिस भी सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती थीं। और संजय की बहन प्रिया दत्त? वो आज भी कांग्रेस की active  सदस्य हैं। 2005 से 2019 तक सांसद रहीं, और पार्टी की महिला विंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तो सोचिए, जब संजय दत्त – जो खुद कभी 2009 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े थे (हालांकि हार गए) – RSS की तारीफ करते हैं, तो कांग्रेस खेमे में ये कैसे पचेगा? सुरेंद्र राजपूत ने यही कहा – 'तुम्हारी फैमिली ने कांग्रेस को खून-पसीना दिया, और तुम एक वीडियो से सब भूल गए?'  ये सिर्फ एक नेता की feedback  नहीं। पूरे कांग्रेस कैडर में नाराजगी फैल गई। कुछ ने तो संजय को 'गद्दार' तक कह डाला। लेकिन सवाल ये है – क्या संजय ने कुछ गलत कहा? RSS तो एक सांस्कृतिक संगठन है, जो सेवा कार्यों के लिए जाना जाता है। भूकंप, बाढ़, कोविड – हर संकट में उनके स्वयंसेवक आगे रहे। तो तारीफ क्यों न हो? या ये सियासत का पुराना खेल है, जहां परिवार की लॉयल्टी को परखा जाता है?

"चलिए, अब थोड़ा RSS के 100 साल के सफर पर नजर डालते हैं, क्योंकि संजय दत्त ने जिसकी तारीफ की, वो कोई छोटा-मोटा संगठन नहीं। 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन नागपुर में RSS की स्थापना की। शुरू में ये एक छोटा सा समूह था, जो हिंदू समाज को संगठित करने का लक्ष्य रखता था। लेकिन समय के साथ ये राष्ट्रव्यापी हो गया। दोस्तों, RSS के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आज दुनिया भर में 6 करोड़ से ज्यादा सदस्य, 50 हजार से ऊपर शाखाएं। गांधीजी की हत्या के बाद बैन हुआ, लेकिन फिर लौटा। आपातकाल में जेल गए कार्यकर्ता। और सेवा? अहमदाबाद भूकंप में लाखों को राहत, केरल बाढ़ में कैंप लगाए, कोविड में ऑक्सीजन प्लांट दान किए। संजय दत्त ने कहा – 'संघ ने हर चुनौती में राष्ट्र का साथ दिया।' ये सच्चाई है। लेकिन विपक्ष की नजर में RSS सियासत का केंद्र है, BJP का वैचारिक मां बाप। तो तारीफ ही विवाद का सबब बन गई। और हां, RSS के 100 साल पर दूसरे भी बधाई दे रहे थे। बॉलीवुड से अनुपम खेर, सचिन तेंदुलकर जैसे नाम। लेकिन संजय पर फोकस इसलिए, क्योंकि उनका बैकग्राउंड अलग है।"

 एक मीम में संजय दत्त 'लगे रहो मुन्ना भाई' पोज में RSS फ्लैग लहरा रहे हैं, कैप्शन – 'नायक से नालायक तक का सफर!' कांग्रेस समर्थक गुस्से में हैं, लेकिन BJP वाले हंस रहे हैं। एक BJP नेता ने ट्वीट किया – 'तारीफ तो तारीफ है, परिवार की राजनीति से ऊपर उठो संजय!' ये देखकर लगता है कि सोशल मीडिया अब सियासत का नया अखाड़ा बन गया है। जहां एक पोस्ट से लाखों वोट प्रभावित हो सकते हैं।

आने वाले चुनावों में कांग्रेस इसे मुद्दा बना सकती है – 'बॉलीवुड स्टार्स भी RSS के साथ!' जबकि BJP कहेगी – 'तारीफ तो राष्ट्रभक्ति है।' अंत में, संजय दत्त ने क्या गलत किया? कुछ नहीं। लेकिन राजनीति में 'गलत' वही है जो विपक्ष को चुभे। इस बीच, AAP के सांसद संजय सिंह ने भी RSS पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा – '100 साल में RSS ने दलितों को प्रमुख क्यों नहीं बनाया ? आजादी की लड़ाई में क्यों नहीं लड़े?' कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने भी निशाना साधा। लेकिन संजय दत्त पर फोकस सबसे ज्यादा रहा। समर्थकों ने सुनील दत्त को याद कर आंसू बहाए।

तो ये था 'नायक नहीं, नालायक' वाले बवाल की पूरी कहानी । संजय दत्त की एक तारीफ ने सियासत को हिला दिया। लेकिन सोचिए – क्या हम सबको अपनी राय रखने का हक नहीं? परिवार की विरासत महत्वपूर्ण है, लेकिन व्यक्तिगत विचार भी। आपकी क्या राय है? कमेंट्स में बताएं – संजय सही थे या गलत? RSS की तारीफ पर विवाद क्यों ? 

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