संजय राउत का विवादित बयान: नेपाल की हिंसा को लेकर मचा सियासी बवाल, FIR की मांग तक पहुंचा मामला
आज हम बात करने वाले हैं महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के एक ऐसे ट्विस्ट की, जो सुर्खियों में छा गया है। शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत फिर से विवादों के केंद्र में हैं। इस बार वजह है नेपाल में हो रही हिंसा पर उनका एक बयान, जिसे लेकर उन पर युवाओं को भड़काने का आरोप लग रहा है। और इस मामले में अब केस भी दर्ज हो गया है! हां, आप सही सुन रहे हैं। शिवसेना के ही एक अन्य नेता संजय निरुपम ने मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और FIR की मांग की है। क्या राउत ने वाकई देश में अशांति फैलाने की कोशिश की? या ये महज राजनीतिक साजिश है? आज की इस लॉन्ग वीडियो में हम पूरी स्टोरी को डिटेल में कवर करेंगे – नेपाल में क्या हो रहा है, राउत ने आखिर कहा क्या, निरुपम की शिकायत का पूरा मामला, और राजनीतिक पृष्ठभूमि।
सबसे पहले समझते हैं कि ये सब शुरू कहां से हुआ। नेपाल, जो हमारा पड़ोसी देश है और सदियों से भारत का करीबी दोस्त रहा है, वहां पिछले कुछ दिनों से भारी हिंसा हो रही है। 8 सितंबर 2025 से शुरू हुए ये प्रोटेस्ट जेन Z यानी युवा पीढ़ी के नेतृत्व में चल रहे हैं। क्या है वजह? भ्रष्टाचार, तानाशाही और भाई-भतीजावाद! नेपाल की जनता सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। काठमांडू और अन्य शहरों में हजारों युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया ब्लॉक करने के फैसले ने आग में घी डाल दिया। प्रोटेस्ट हिंसक हो गए – दंगे, लूटपाट, आगजनी। नेपाली आर्मी ने कर्फ्यू लगाया, 27 लोगों को गिरफ्तार किया। कम से कम 19 लोग मारे जा चुके हैं।
नेपाल के पीएम के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ गया। युवा नेता दिवाकर दंगल जैसे लोग कह रहे हैं, 'ये भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन है।' नेपाल का इतिहास देखें तो ब्रिटिश काल के बाद से ही instability रही है, लेकिन इस बार जेन Z की ताकत ने सबको चौंका दिया। अब सवाल ये है कि ये नेपाल का मामला भारत से कैसे जुड़ गया ? और संजय राउत का इसमें क्या रोल है ?
9 september 2025 को संजय राउत ने X पर नेपाल प्रोटेस्ट का एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में युवा सड़कों पर नारे लगा रहे हैं। राउत ने लिखा, 'सावधान रहें, नेपाल जैसी situation किसी भी देश में हो सकती है।' उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और BJP को टैग किया। फिर 10 सितंबर को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने detail से बात की। उन्होंने कहा, 'नेपाल में जो आग भ्रष्टाचार, तानाशाही और भाई-भतीजावाद के खिलाफ लगी है, वो भारत में भी लग सकती है। लेकिन भारत में अभी तक हिंसा नहीं हुई क्योंकि यहां महात्मा गांधी की अहिंसक विचारधारा पर लोग विश्वास करते हैं। अगर ये चिंगारी भारत आई तो... भारत बड़ा देश है, गांधी के जन्म के कारण ही ये लोग (सरकार) बच रहे हैं। चाहे कितना ही गांधी को गाली दो, मोदी जी की सरकार गांधी की विचारधारा की वजह से टिकी है।' राउत ने आगे कहा, 'पीएम मोदी 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन देते हैं, इसका मतलब गरीबी अभी भी बरकरार है। नेपाल जैसी स्थिति वहां भी थी।
नेपाली युवा चुप क्यों हैं? बेरोजगारी, समस्याएं बहुत हैं।' उन्होंने भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए – 'नेपाल ने भारत को बड़ा भाई माना, लेकिन संकट में खड़े न होने का ये विदेश नीति की नाकामी है।' राउत का ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुछ ने इसे चेतावनी माना, तो कुछ ने इसे अशांति भड़काने वाला बताया। राउत ने साफ कहा कि उनका इरादा हिंसा भड़काना नहीं, बल्कि सरकार को आगाह करना है। लेकिन विपक्षी खेमे में ये बयान धमाका बन गया।"
अब आते हैं मामले के main ट्विस्ट पर। 11 सितंबर 2025 को शिवसेना के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ने मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में संजय राउत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। निरुपम ने कहा, 'राउत देशविरोधी बयान दे रहे हैं। वे नेपाल की हिंसा को भारत से जोड़कर जनता को भड़का रहे हैं। ये राजद्रोह की भाषा है।' निरुपम ने आरोप लगाया कि राउत श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल की हिंसा को भारत से लिंक करके 'एंटी-नेशनल' स्टेटमेंट दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'राउत लोकतंत्र से हार गए, तो अब हिंसा भड़काने की साजिश रच रहे हैं। वे पीएम मोदी को अप्रत्यक्ष धमकी दे रहे हैं। ये संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।' शिकायत में FIR की मांग की गई है। निरुपम ने कहा, 'अगर राउत अपने पोस्ट डिलीट नहीं करते, तो ये सबूत है कि वे बांग्लादेश-नेपाल जैसी हिंसा भारत में लाना चाहते हैं।' 12 सितंबर को शिवसेना डेलिगेशन ने मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती से मिलकर सख्त कार्रवाई की मांग की। डेलिगेशन में मिलिंद देवड़ा, संजय मोरे जैसे नेता शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत ली है और जांच शुरू कर दी है।
ये विवाद सिर्फ राउत vs निरुपम का नहीं, बल्कि शिवसेना के विभाजन का परिणाम है। याद दिला दें, 2022 में उद्धव ठाकरे सरकार गिरी, एकनाथ शिंदे ने बगावत की और BJP के साथ गठबंधन किया। संजय राउत उद्धव के करीबी हैं, तो संजय निरुपम शिंदे गुट के। ये दोनों संजय ही हैं, लेकिन खेमे अलग! शिवसेना ने आरोप लगाया कि राउत 'उत्तेजक बयान' देकर अशांति फैला रहे हैं। BJP साइड से भी आवाजें उठीं।
तो क्या लगता है आपको? राउत ने युवाओं को भड़काने की कोशिश की या सिर्फ सरकार को चेतावनी दी? हमारा मानना है कि राजनीति में ऐसे बयान आम हैं, लेकिन नेपाल जैसी संवेदनशील स्थिति में ये खतरनाक हो सकते हैं। सरकार को भ्रष्टाचार पर ध्यान देना चाहिए, वरना युवाओं का गुस्सा फूट सकता है। लेकिन कानून सबके लिए बराबर है। अगर FIR हुई, तो कोर्ट फैसला लेगा।
