संकल्प से सिद्धि तक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रसेवा और जनसेवा के 25 वर्ष

From Resolve to Realisation: Prime Minister Narendra Modi’s 25 Years of Service to the Nation and the People
 
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(सुरेश पचौरी-विनायक फीचर्स)

भारत के राजनीतिक जीवन में 7 अक्टूबर 2001 एक महत्वपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज है। इसी दिन नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर संवैधानिक पद पर अपनी सक्रिय शासन यात्रा की शुरुआत की थी। 26 मई 2014 को उन्होंने पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद से राज्य से केंद्र तक उनकी राजनीतिक यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं भी 7 अक्टूबर 2025 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की पहली शपथ की 25वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ने का उल्लेख कर चुके हैं।

17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 वर्ष के हो रहे हैं। इसी अवसर और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की घोषणा की है। अभियान के माध्यम से जनसेवा और राष्ट्रसेवा से जुड़े उनके सार्वजनिक जीवन को रेखांकित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।

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गुजरात से दिल्ली तक का सफर

गुजरात के वडनगर से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचने वाली नरेंद्र मोदी की यात्रा संघर्ष, संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक सक्रियता से जुड़ी रही है। मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात में लंबे कार्यकाल के बाद 2014 में वे प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

इस दौरान उनके समर्थक उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते हैं, जिन्होंने शासन में निर्णायक फैसलों, तकनीक के व्यापक इस्तेमाल, बुनियादी ढांचे के विस्तार और कल्याणकारी योजनाओं को प्रमुखता दी। विदेशों में भी उन्हें कई देशों के सर्वोच्च अथवा प्रमुख राजकीय सम्मानों से सम्मानित किया गया है। विदेश मंत्रालय की सूची और हालिया रिपोर्टों में ऐसे अनेक सम्मानों का उल्लेख मिलता है।

बड़े फैसलों और नीतिगत बदलावों का दौर

मोदी सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय और नीतिगत पहल हुईं, जिनका देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को हटाना, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को समर्थक सरकार के प्रमुख कार्यों में गिनाते हैं।

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दी। वहीं स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और डिजिटल कौशल से जुड़ी पहलों ने युवाओं और उद्यमिता को नीति के केंद्र में लाने का प्रयास किया।

गरीब कल्याण को योजनाओं के केंद्र में रखने का दावा

मोदी सरकार की नीतियों में गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास, बैंकिंग, स्वास्थ्य, रसोई गैस और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी पहलों में शामिल किया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाने का दावा सरकार की ओर से किया जाता रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी। बीते वर्षों में स्वच्छता को सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर जनभागीदारी के अभियान में बदलने पर जोर दिया गया।

किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से पात्र किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। वर्तमान में योजना के तहत पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि अवसंरचना और विभिन्न कृषि विकास कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों की आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार की नीति में यह विचार प्रमुख रहा है कि कृषि केवल आजीविका का साधन न रहकर किसानों के लिए आर्थिक रूप से अधिक सक्षम क्षेत्र बने।

रेल, सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर निवेश हुआ है। इन परियोजनाओं को भारत की आधारभूत संरचना को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण को विकास का आधार

महिला सशक्तिकरण मोदी सरकार के प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक एजेंडे में रहा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, स्वयं सहायता समूहों के विस्तार और लखपति दीदी जैसी पहलों के जरिए महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को भी समर्थक राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। सरकार ने तीन करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल

आयुष्मान भारत योजना के विस्तार के साथ देश में स्वास्थ्य सुविधाओं तक गरीब और वंचित वर्ग की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार ने देशभर में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के विस्तार को प्राथमिकता दी है।

कोरोना महामारी के दौरान भारत में वैक्सीन निर्माण और बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान को भी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया जाता है। महामारी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दिया गया।

विरासत, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन

मोदी सरकार के कार्यकाल में धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्विकास को भी व्यापक महत्व मिला। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, उज्जैन में महाकाल लोक, केदारनाथ में पुनर्निर्माण एवं विकास कार्य, नमामि गंगे और विभिन्न तीर्थस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इसी दृष्टिकोण का हिस्सा रहे हैं।

सरकार की सांस्कृतिक नीति में विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।

भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका

मोदी सरकार आर्थिक क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में लगातार नीतियां लागू करने का दावा करती रही है। उत्पादन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे में निवेश इसके प्रमुख हिस्से हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। प्रधानमंत्री ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया है।

हालांकि आर्थिक विकास के साथ रोजगार, आय वितरण और महंगाई जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक एवं विशेषज्ञ बहस भी जारी है। इसलिए भारत की आर्थिक यात्रा का आकलन केवल जीडीपी वृद्धि के आधार पर नहीं, बल्कि रोजगार, प्रति व्यक्ति आय और आम नागरिक के जीवन स्तर जैसे व्यापक संकेतकों से किया जाना भी आवश्यक है।

वैश्विक मंच पर बढ़ी भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत ने अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। विभिन्न देशों द्वारा उन्हें दिए गए राजकीय सम्मान भी भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के संदर्भ में देखे जाते हैं। विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड में 2025 तक कई विदेशी सम्मानों का विवरण उपलब्ध है और 2026 में भी कुछ नए सम्मान जुड़े हैं।

BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका ने भी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में उसकी स्थिति को चर्चा के केंद्र में रखा है।

‘संकल्प से सिद्धि’ की राजनीतिक व्याख्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की सार्वजनिक सेवा यात्रा को उनके समर्थक ‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा’ और ‘संकल्प से सिद्धि’ की यात्रा के रूप में देखते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक की उनकी राजनीतिक यात्रा भारतीय राजनीति में एक असाधारण निरंतरता का उदाहरण है।

इन 25 वर्षों में सरकारों की नीतियों, उपलब्धियों और निर्णयों पर राजनीतिक समर्थन के साथ-साथ आलोचनाएं भी हुई हैं। लेकिन यह निर्विवाद है कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति, शासन व्यवस्था और चुनावी विमर्श को गहराई से प्रभावित किया है।

अब उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू होने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ उनकी राजनीतिक यात्रा को जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के नजरिए से सामने रखने का अवसर बनेगा।

एक लंबे सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन केवल सत्ता में बिताए वर्षों से नहीं, बल्कि नीतियों के प्रभाव, संस्थागत बदलाव और समाज पर पड़े दीर्घकालीन असर से होता है। नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की सार्वजनिक यात्रा भी इसी व्यापक कसौटी पर इतिहास में अपना स्थान बनाएगी।

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