Sant Gadge Baba सच्चे मानवता के प्रतीक थे – सुरेन्द्र कुमार
हरदोई। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव सुरेन्द्र कुमार ने संत गाडगे जी महाराज की जयंती पर श्रद्धापूर्वक उन्हें नमन किया और कहा कि संत गाडगे महाराज का जीवन मानवता, सेवा और स्वच्छता का अनुपम उदाहरण है।
संत गाडगे महाराज का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र में हुआ था। उनका मूल नाम देबूजी झिंगराजी जानोरकर था। वे महान समाज सुधारक, कीर्तनकार और स्वच्छता अभियान के अग्रदूत माने जाते हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, दलितों और जरूरतमंदों की सेवा तथा अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने में समर्पित कर दिया।
सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि संत गाडगे महाराज फटे-पुराने वस्त्र पहनकर गांव-गांव घूमते थे, कीर्तन के माध्यम से लोगों को सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का संदेश देते थे और स्वयं हाथ में झाड़ू लेकर सार्वजनिक स्थलों की सफाई करते थे। वे लोगों को स्वच्छता और सदाचार का पाठ पढ़ाते थे।
उन्होंने अपने प्रवचनों में अंधविश्वास, पशु बलि और सामाजिक रूढ़ियों का खुलकर विरोध किया। शिक्षा को वे अत्यंत आवश्यक मानते थे और कहा करते थे कि “शिक्षा के लिए जरूरत पड़े तो खाने की थाली भी बेच दो।” संत गाडगे महाराज ने भीख और चंदे में मिले धन का उपयोग धर्मशालाओं, गोशालाओं, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों की स्थापना में किया। वे मूर्तिपूजा की अपेक्षा मानव सेवा को सर्वोच्च मानते थे और इंसान में ही ईश्वर का वास देखने की प्रेरणा देते थे।सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि संत गाडगे महाराज सादगी, निःस्वार्थ सेवा और मानवतावाद की सजीव मिसाल थे। उनका जीवन आज भी समाज को स्वच्छता, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
