सेवलाइफ फाउंडेशन और पार्ले बिस्कुट्स ने नागपुर के ग्रामीण अस्पतालों को सौंपी जीवनरक्षक शल्य चिकित्सा उपकरण

SaveLife Foundation and Parle Biscuits donated life-saving surgical equipment to rural hospitals in Nagpur.
 
इस पहल के अंतर्गत एनएच-353डी (उमरेड–भीवापुर रोड) पर स्थित उमरेड ग्रामीण अस्पताल एवं ट्रॉमा केयर यूनिट तथा एनएच-44 (नागपुर–देवलापार रोड) पर स्थित देवलापार ग्रामीण अस्पताल को आवश्यक सर्जिकल और आपातकालीन चिकित्सा उपकरण सौंपे गए।  आपातकालीन सेवाओं को मिलेगा बड़ा बल  उमरेड ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रभाकर वंजारी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक होता है और यह उपकरण अस्पताल की आघात देखभाल क्षमता को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेंगे।  वहीं देवलापार ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मेश्राम ने कहा, “यह सहयोग हमारे अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों को सुदृढ़ करेगा और एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को सीधे लाभ पहुंचाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रॉमा केयर को मजबूत करने की दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास है।”  चिंताजनक हैं सड़क दुर्घटना के आंकड़े  जनवरी से नवंबर 2025 के बीच एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 2024 की तुलना में 104 प्रतिशत बढ़कर 24 से 49 हो गई। वहीं एनएच-353डी पर मौतों में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो 30 से घटकर 27 रह गई। कुल मिलाकर नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के उच्च मृत्यु दर वाले गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।  जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर की दिशा में कदम  यह पहल पार्ले बिस्कुट्स द्वारा समर्थित ‘जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उन्नत दुर्घटना डेटा विश्लेषण, सामुदायिक सहभागिता, बेहतर आघात देखभाल और क्षमता निर्माण के माध्यम से उच्च जोखिम वाले राजमार्गों को सुरक्षित बनाना है।  सेवलाइफ फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इलिया जाफर ने कहा, “दुर्घटनास्थलों के पास स्थित अस्पतालों में विशेषीकृत ट्रॉमा केयर सुविधाओं की कमी सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का बड़ा कारण है। इन अस्पतालों की क्षमता बढ़ाकर हम बेहतर जीवनरक्षक परिणामों की उम्मीद करते हैं।”  सड़क सुरक्षा के लिए सतत प्रयास  सेवलाइफ फाउंडेशन सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में डेटा-आधारित पहलों के माध्यम से भारत के राजमार्गों पर शून्य मृत्यु के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
उच्च जोखिम वाले राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए सेवलाइफ फाउंडेशन और पार्ले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड ने नागपुर ग्रामीण जिले के दो प्रमुख अस्पतालों को महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा उपकरण प्रदान किए। यह सहयोग पार्ले बिस्कुट्स की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से किया गया।

इस पहल के अंतर्गत एनएच-353डी (उमरेड–भीवापुर रोड) पर स्थित उमरेड ग्रामीण अस्पताल एवं ट्रॉमा केयर यूनिट तथा एनएच-44 (नागपुर–देवलापार रोड) पर स्थित देवलापार ग्रामीण अस्पताल को आवश्यक सर्जिकल और आपातकालीन चिकित्सा उपकरण सौंपे गए।

आपातकालीन सेवाओं को मिलेगा बड़ा बल

उमरेड ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रभाकर वंजारी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक होता है और यह उपकरण अस्पताल की आघात देखभाल क्षमता को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेंगे।

वहीं देवलापार ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मेश्राम ने कहा यह सहयोग हमारे अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों को सुदृढ़ करेगा और एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को सीधे लाभ पहुंचाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रॉमा केयर को मजबूत करने की दिशा में यह एक सराहनीय प्रयास है।”

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चिंताजनक हैं सड़क दुर्घटना के आंकड़े

जनवरी से नवंबर 2025 के बीच एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 2024 की तुलना में 104 प्रतिशत बढ़कर 24 से 49 हो गई। वहीं एनएच-353डी पर मौतों में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो 30 से घटकर 27 रह गई।
कुल मिलाकर नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के उच्च मृत्यु दर वाले गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर की दिशा में कदम

यह पहल पार्ले बिस्कुट्स द्वारा समर्थित ‘जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उन्नत दुर्घटना डेटा विश्लेषण, सामुदायिक सहभागिता, बेहतर आघात देखभाल और क्षमता निर्माण के माध्यम से उच्च जोखिम वाले राजमार्गों को सुरक्षित बनाना है।

सेवलाइफ फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इलिया जाफर ने कहा दुर्घटनास्थलों के पास स्थित अस्पतालों में विशेषीकृत ट्रॉमा केयर सुविधाओं की कमी सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का बड़ा कारण है। इन अस्पतालों की क्षमता बढ़ाकर हम बेहतर जीवनरक्षक परिणामों की उम्मीद करते हैं।”

सड़क सुरक्षा के लिए सतत प्रयास

सेवलाइफ फाउंडेशन सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में डेटा-आधारित पहलों के माध्यम से भारत के राजमार्गों पर शून्य मृत्यु के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

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