Sawan Second Monday 2026: सावन के दूसरे सोमवार पर बन रहा है अद्भुत दुर्लभ संयोग! शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें, हर मनोकामना होगी पूरी
Sawan Somwar and Som Pradosh Vrat 2026: श्रावण मास का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पूरे देश में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष सावन का दूसरा सोमवार बेहद खास है, क्योंकि 6 साल बाद सावन सोमवार के साथ सोम प्रदोष व्रत का महा-संयोग बन रहा है। इसके साथ ही, 11 अगस्त को सावन की मुख्य मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। सोमवार, सोम प्रदोष और शिवरात्रि की इस त्रिवेणी संयोग में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से साधक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
सावन में क्यों किया जाता है शिवजी का जलाभिषेक?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान शिव ने हलाहल (विष) का पान किया था, तब विष की तीव्र उत्ताप को शांत करने के लिए देवगणों ने उन पर शीतल जल अर्पित किया था। यही कारण है कि सावन के पवित्र महीने में शिवलिंग पर जल अर्पित करने से महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के समस्त दुख-दर्द हर लेते हैं।
जलाभिषेक में मिलाएं ये 5 विशेष वस्तुएं
यदि आप सावन के सोमवार पर साधारण जल के स्थान पर इन पावन द्रव्यों से अभिषेक करते हैं, तो विशेष फलों की प्राप्ति होती है:
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गंगाजल: शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है, विचार शुद्ध होते हैं और घर से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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कच्चा दूध: सावन सोमवार को गाय के कच्चे दूध से जलाभिषेक करने से आरोग्य, सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।
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दही: दही से अभिषेक करने से जीवन में स्थिरता आती है और बिगड़े काम बनने लगते हैं। (ध्यान रखें, दही चढ़ाने के पश्चात शुद्ध जल से स्नान अवश्य कराएं)।
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शहद: शिवलिंग पर शहद अर्पित करने से वाणी में मधुरता, वैवाहिक जीवन में मिठास और मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
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गन्ने का रस: आर्थिक तंगी दूर करने और मनोवांछित फल पाने के लिए गन्ने के रस से शिवजी का अभिषेक करना शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है।
बेलपत्र का नियम और महत्व
भगवान आशुतोष की पूजा बेलपत्र (Bilva Patra) के बिना अधूरी मानी जाती है।
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ध्यान रखने योग्य बातें: जलाभिषेक के बाद हमेशा तीन पत्तियों वाला अखंडित (बिना कटा-फटा) बेलपत्र ही शिवलिंग पर अर्पित करें।
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बेलपत्र की चिकनी सतह हमेशा शिवलिंग की तरफ होनी चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव अतिशीघ्र प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान देते हैं।
