एसबीआई का 71वां स्थापना दिवस: लखनऊ में भव्य समारोह, डिजिटल क्रांति और 'राष्ट्र सर्वोपरि' के संकल्प के साथ मनाया गया जश्न
सुबह हुई 'हरित पहल' की शुरुआत
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सुबह के कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण-अनुकूल कदम के साथ हुई। लखनऊ मण्डल के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) श्री दिपेश राज ने स्थानीय प्रधान कार्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। यह स्टेशन बैंक के स्टाफ सदस्यों के उपयोग के लिए तैयार किया गया है, जो कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में एसबीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में सजी शाम
शाम के वक्त लखनऊ के प्रसिद्ध अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में एक मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में बैंक के मौजूदा अधिकारियों, कर्मचारियों, सेवानिवृत्त (Retired) स्टाफ और उनके परिवार के सदस्यों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
समारोह का शुभारंभ करते हुए मुख्य महाप्रबंधक श्री दिपेश राज ने पूरे एसबीआई परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं और बैंक के गौरवशाली इतिहास तथा भविष्य के रोडमैप को साझा किया।
📊 एसबीआई: भरोसे और तकनीक का नया चेहरा
मुख्य महाप्रबंधक ने बैंक की ताकत और प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
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52 करोड़+ ग्राहकों का आधार: 200 वर्षों से भी अधिक की बेमिसाल विरासत के साथ एसबीआई आज देश के वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और आर्थिक विकास का सबसे मजबूत स्तंभ है।
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मूल मंत्र: बैंक का पूरा कामकाज 'डिजिटल प्रथम, ग्राहक प्रथम, राष्ट्र सर्वोपरि' (Digital First, Customer First, Nation Supreme) के सिद्धांत पर आधारित है।
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सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग: ग्राहकों के बेहतरीन अनुभव के लिए बैंक ने अपनी स्मार्ट, सुरक्षित और बेहद आसान डिजिटल सेवाओं का लगातार विस्तार किया है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
इस उत्सव को और भी खास बनाने के लिए एसबीआई के स्टाफ सदस्यों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा और देश की सांस्कृतिक विविधता की खूबसूरत झलक पेश की, जिसे वहां मौजूद दर्शकों ने खूब सराहा।
"एसबीआई का 71वां स्थापना दिवस सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के भरोसे को और मजबूत करने तथा डिजिटल इंडिया के सपनों को पंख लगाने का एक नया संकल्प है।"
