एसबीआई लाइफ की ‘थैंक्स ए डॉट’ पहल: लखनऊ के छात्रों में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता को दे रही नई दिशा
लखनऊ, अप्रैल 2026 — SBI Life Insurance ने अपनी 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ‘थैंक्स ए डॉट’ पहल के तहत लखनऊ के Ambalika Institute of Management and Technology में इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए। इस पहल का उद्देश्य ब्रेस्ट हेल्थ को घर-परिवार की सामान्य चर्चा का हिस्सा बनाना और समय रहते जांच व रोकथाम को बढ़ावा देना है।
इस कार्यक्रम में लगभग 165 से अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों ने भाग लिया। सत्र के दौरान एसबीआई लाइफ के चीफ – ब्रांड, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन एवं सीएसआर रवींद्र शर्मा और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. विभोर महेंद्रू ने छात्रों से संवाद करते हुए ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण, समय पर जांच और सामाजिक झिझक को दूर करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
संस्थान की अतिरिक्त निदेशक डॉ. श्वेता मिश्रा ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए छात्रों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित किया। सत्र के बाद छात्रों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि देखने को मिली।
‘थैंक्स ए डॉट’ पहल के तहत एक साधारण हॉट वॉटर बैग को प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो ब्रेस्ट हेल्थ, सेल्फ-एग्जामिनेशन और समय पर डॉक्टर से सलाह लेने जैसे विषयों पर बातचीत को आसान बनाता है। इसका उद्देश्य समाज में मौजूद झिझक और मिथकों को दूर करना है, ताकि लोग बिना डर के इस विषय पर खुलकर चर्चा कर सकें।
रवींद्र शर्मा ने कहा कि कॉलेज के छात्र, खासकर युवा महिलाएं, जीवन के ऐसे चरण में होती हैं जहां स्वस्थ आदतों को अपनाना उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस पहल के जरिए एसबीआई लाइफ न केवल जागरूकता बढ़ाना चाहता है, बल्कि यह भी दिखाना चाहता है कि छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलाव भी स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
डॉ. श्वेता मिश्रा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों और समाज को बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस पहल को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया।एसबीआई लाइफ का लक्ष्य इस कॉलेज आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से ‘थैंक्स ए डॉट’ पहल को देशभर के शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाना है, ताकि युवाओं में दीर्घकालिक जागरूकता विकसित हो और निवारक स्वास्थ्य आदतों को बढ़ावा मिल सके।
