राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में विज्ञान कार्यशाला: "रटने के बजाय क्यों और कैसे पर दें जोर", छात्राओं ने सीखे चमत्कार के पीछे के वैज्ञानिक तर्क
विज्ञान केवल विषय नहीं, जीवन जीने का तरीका है: त्रिपुरारी पूजन
कार्यशाला की अध्यक्षता विद्यालय की प्रधानाचार्या पल्लवी सचान ने की। मुख्य वक्ता और जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक त्रिपुरारी पूजन ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा विज्ञान केवल किताबों तक सीमित एक विषय नहीं है, बल्कि यह सोचने और जीवन जीने का एक तरीका है। अपने आस-पास की हर घटना के पीछे छिपे कार्य-कारण संबंध को पहचानें। रटने की आदत छोड़ें और 'क्यों' और 'कैसे' जैसे प्रश्न पूछने की जिज्ञासा पैदा करें।"
प्रयोगों से किया अंधविश्वास पर प्रहार
क्लब के सह-समन्वयक आशीष कुमार वर्मा ने सत्र के दौरान समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मंच पर कई जीवंत प्रयोग करके दिखाए और प्रमाणित किया कि जिसे अक्सर लोग 'चमत्कार' मानकर डरते हैं, उसके पीछे ठोस वैज्ञानिक तर्क होते हैं। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि अज्ञानता के अंधेरे को केवल विज्ञान के प्रकाश से ही मिटाया जा सकता है।
डिजिटल युग में तकनीक का महत्व
तकनीकी सत्र में विज्ञान अध्यापक शिवांक पांडेय ने 'सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी' (ICT) की महत्ता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में छात्राएं इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध सामग्री और उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं। उन्होंने आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तकनीकी कौशल (Technical Skills) को अनिवार्य बताया।
छात्राओं की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यशाला में विद्यालय की लगभग 200 छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इंटरैक्टिव सत्र के दौरान छात्राओं ने वक्ताओं से कई ज्ञानवर्धक प्रश्न पूछे और अपनी वैज्ञानिक जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या पल्लवी सचान ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य की वैज्ञानिक प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार होती हैं।


