विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर वैज्ञानिक सेमिनार, फार्मासिस्टों की भूमिका और नए पद सृजन पर जोर
डॉ. एच.एन. त्रिपाठी और डॉ. जी.पी. गुप्ता होंगे मुख्य अतिथि
उत्तर प्रदेश में फार्मासिस्टों के लिए कम से कम 10 हजार पदों की आवश्यकता: सुनील यादव
लखनऊ, 24 सितंबर। विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर फार्मासिस्ट फेडरेशन की ओर से 25 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में वैज्ञानिक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर 2:30 बजे से शुरू होगा। इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस की थीम “Empowering pharmacists for healthier futures” (स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना) रखी गई है।
कार्यक्रम में मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ के निदेशक डॉ. एच.एन. त्रिपाठी तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय, लखनऊ के निदेशक एवं अपर निदेशक, लखनऊ मंडल डॉ. जी.पी. गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
औषधि सुरक्षा से रोगी-केंद्रित सेवाओं तक होगी चर्चा
वैज्ञानिक सेमिनार में फार्मासिस्टों की बदलती भूमिका, औषधि सुरक्षा, फार्माकोविजिलेंस, प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया (ADR) की रिपोर्टिंग, अस्पतालों में मेडिकेशन सेफ्टी, एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप तथा रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्ट की भूमिका जैसे विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा की जाएगी।
फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के पूर्व चेयरमैन सुनील यादव ने विश्व फार्मासिस्ट दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेश के फार्मासिस्टों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में फार्मासिस्टों की भूमिका लगातार व्यापक हो रही है। उनके अनुसार शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की दिशा में काम करने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्ट की विशेषज्ञता का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट केवल औषधि उपलब्ध कराने वाला स्वास्थ्यकर्मी नहीं है, बल्कि वह दवाओं के उपयोग, गुणवत्ता, सुरक्षा और रोगी परामर्श से जुड़ा महत्वपूर्ण विशेषज्ञ है। औषधि की खोज एवं निर्माण से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण, उचित भंडारण, वितरण, सही उपयोग, रोगी को परामर्श तथा प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की पहचान और रिपोर्टिंग तक फार्मासिस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण है।
फार्मेसी चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार
सुनील यादव के अनुसार फार्मेसी एक बहुआयामी क्षेत्र है। अनुसंधान संस्थानों में वैज्ञानिकों से लेकर फार्मास्यूटिकल उद्योग, औषधि नियमन, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, क्लिनिकल फार्मेसी और सामुदायिक स्तर पर सेवाएं देने वाले फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि फार्मेसी शिक्षा में फार्मास्युटिक्स, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, टॉक्सिकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फिजियोलॉजी और ड्रग स्टोर मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल हैं। औषधियों के निर्माण से लेकर उनके सुरक्षित उपयोग, शरीर में उनके प्रभाव तथा ADME—Absorption, Distribution, Metabolism and Excretion की वैज्ञानिक समझ भी फार्मेसी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश में 7,500 पद, एक हजार से अधिक रिक्त होने का दावा
सुनील यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्टों के करीब 7,500 पद हैं, जिनमें एक हजार से अधिक पद रिक्त बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सालयों में बढ़ते कार्यभार और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को देखते हुए प्रदेश में फार्मासिस्टों के कम से कम 10,000 पद होने चाहिए।
उन्होंने प्रदेश में फार्माकोविजिलेंस और क्लिनिकल फार्मेसी को मजबूत करने के लिए फार्माकोविजिलेंस तथा क्लिनिकल फार्मासिस्ट के नए पद सृजित किए जाने की मांग भी रखी।
उनके अनुसार प्रदेश में लगभग 2.5 लाख पंजीकृत फार्मासिस्ट हैं। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था में उपलब्ध प्रशिक्षित मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और फार्मासिस्टों की विशेषज्ञता को रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।
अस्पतालों में फार्मासिस्ट की भूमिका मजबूत करने की जरूरत
सुनील यादव ने कहा कि बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप फार्मासिस्टों के ज्ञान, कौशल और दक्षताओं का निरंतर विस्तार जरूरी है। इसके साथ ही अस्पतालों में रोगी-केंद्रित फार्मेसी सेवाओं को मजबूत करने, पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने और फार्मासिस्टों के लिए उनकी योग्यता के अनुरूप कार्य-अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “जहां औषधियां जीवन देती हैं, वहीं फार्मासिस्ट औषधियों को जीवन देते हैं।” उन्होंने आम जनता से अपील की कि दवाओं की खुराक, सेवन की विधि, संभावित प्रतिकूल प्रभाव और आवश्यक सावधानियों के संबंध में योग्य फार्मासिस्ट से भी उचित परामर्श लें।
फार्मासिस्ट फेडरेशन की ओर से विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में वैज्ञानिक, शैक्षणिक और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सुरक्षित एवं तर्कसंगत औषधि उपयोग, रोगी सुरक्षा और फार्माकोविजिलेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया गया है।
