हरदोई में नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का दूसरा दिन: शिशु मंदिर योजना और 'पंचपदी पद्धति' पर हुआ गहन मंथन

Day Two of the Newly Selected Teachers' Training Workshop in Hardoi: Intensive Deliberations Held on the 'Shishu Mandir Scheme' and the 'Panchpadi Method'
 
oiui

हरदोई डेस्क: जनपद हरदोई के अल्लीपुर में स्थित पं. बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का दूसरा दिन बेहद ज्ञानवर्धक और शिक्षाप्रद रहा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और नए शिक्षकों को विद्या भारती की विशिष्ट शिक्षण शैलियों से रूबरू कराया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रमुख उमाशंकर मिश्र और क्षेत्रीय प्रशिक्षण प्रमुख दिनेश कुमार सिंह उपस्थित रहे।

iii

मां शारदे के वंदन से हुआ कार्यक्रम का भव्य आगाज

प्रशिक्षण वर्ग के दूसरे दिन की शुरुआत अतिथियों के आदर-सत्कार के साथ हुई, जहां उनका पारंपरिक रूप से रोली-टीका लगाकर और बैच पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर और पुष्पार्चन कर सत्र का विधिवत शुभारंभ किया।

इस दौरान मंच का कुशल संचालन मैगलगंज के प्रधानाचार्य उत्तम मिश्रा ने किया। जन शिक्षा समिति लखनऊ संभाग के संभाग निरीक्षक ने सभी अतिथियों का औपचारिक परिचय कराया। इसके साथ ही सीतापुर संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह ने उमाशंकर मिश्र को तथा श्रावस्ती संभाग के संभाग निरीक्षक कैलाश चंद्र वर्मा ने दिनेश कुमार सिंह को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

hhh

"1952 में गोरखपुर से शुरू हुआ था शिशु मंदिर का यह गौरवशाली आंदोलन"

कार्यक्रम के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रमुख उमाशंकर मिश्र ने 'शिशु मंदिर योजना' के इतिहास और उसके विजन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में मुख्य बातें कहीं:

  • गुरुकुल परंपरा और राष्ट्रीय विचार: उन्होंने भारतीय शिक्षा के प्राचीन आदर्श स्वरूप (गुरुकुल परंपरा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारों का उल्लेख किया।

  • गौरवशाली इतिहास: उन्होंने बताया कि साल 1952 में गुरु पूर्णिमा के पावन दिन गोरखपुर में देश के पहले सरस्वती शिशु मंदिर की नींव रखी गई थी, जो आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।

  • सर्वांगीण विकास के आयाम: उन्होंने नई पीढ़ी के लिए नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा, शिशु वाटिका, बालिका शिक्षा, वैदिक गणित, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विज्ञान मेलों की महत्ता को बेहद उपयोगी बताया।

iii

'पंचपदी अधिगम पद्धति' से पढ़ाई को बनाएं और भी आनंददायक

द्वितीय और तृतीय सत्र में क्षेत्रीय प्रशिक्षण प्रमुख दिनेश कुमार सिंह ने आचार्यों को 'पंचपदी अधिगम पद्धति' (Five-step learning method) का विशेष प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विश्व कल्याण, राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाना और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है।एक शिक्षक के लिए सटीक पाठ योजना (Lesson Plan) का निर्माण और लक्ष्य का निर्धारण करना बेहद जरूरी है। सरस्वती शिशु मंदिर की शिक्षण पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह पढ़ाई को बोझिल बनाने के बजाय अत्यंत आनंददायक, रोचक और सहभागितापूर्ण बनाती है।"

शाम के अंतिम चरणों में चतुर्थ सत्र को एक सामूहिक परिचर्चा (Group Discussion) के रूप में आयोजित किया गया, जबकि दिन का समापन शारीरिक प्रशिक्षण (Physical Training) के सत्र के साथ हुआ।

999

कार्यक्रम में ये गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस गरिमापूर्ण प्रशिक्षण वर्ग के अवसर पर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी (उपाध्यक्ष - जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश व विद्यालय प्रबंधक)

  • संतोष त्रिवेदी (वर्गाधिकारी)

  • मिथिलेश अवस्थी (प्रदेश निरीक्षक)

  • मिथिलेश सिंह (साकेत संभाग निरीक्षक)

iii

Tags