स्वावलंबन से ही विश्व में मजबूत होगी भारत की साख: बीएड कॉलेज में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन

India's global standing will be strengthened only through self-reliance: Entrepreneurship promotion conference at B.Ed. college
 
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ऊना। स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में बीएड कॉलेज, समूरकलां में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता की सोच विकसित करना, उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना तथा स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन के महत्व से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जितेंद्र बाली ने उद्यमिता और स्वरोजगार की संभावनाओं पर विचार रखते हुए कहा कि आज युवाओं के सामने केवल रोजगार तलाशने का ही नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने का भी अवसर है। स्थानीय संसाधनों, प्रतिभा और कौशल का सही इस्तेमाल कर युवा छोटे स्तर से अपना व्यवसाय शुरू करके उसे आगे बड़े उद्यम में बदल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का संबंध केवल आर्थिक मजबूती से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान से भी है। युवाओं द्वारा स्वरोजगार की दिशा में उठाया गया कदम व्यक्तिगत विकास के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है।

स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने पर जोर

स्वदेशी जागरण मंच के जिला पूर्णकालिक सत्यदेव शर्मा ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय उद्यमों और देश में निर्मित वस्तुओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा मिलने से छोटे कारोबारियों, कारीगरों और युवाओं के लिए रोजगार एवं व्यवसाय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी की अवधारणा स्थानीय प्रतिभा, संसाधनों और उत्पादन क्षमता को मजबूत करने से जुड़ी है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाकर समाज को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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बदलते दौर में उद्यमिता की नई संभावनाएं

स्वदेशी जागरण मंच के जिला प्रचार प्रमुख पंकज सहोड़ ने युवाओं से पारंपरिक रोजगार विकल्पों के साथ स्वरोजगार की नई संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक और बदलते बाजार ने छोटे उद्यमों के लिए भी नए अवसर उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने युवाओं को अपने कौशल को लगातार विकसित करने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नए व्यवसायिक मॉडल तैयार करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही।

शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल भी जरूरी

कॉलेज प्राचार्य हंसराज ने सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और आत्मनिर्भर बनने की सोच भी विकसित करनी चाहिए। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को रोजगार के पारंपरिक विकल्पों से आगे बढ़कर उद्यमिता और स्वरोजगार की संभावनाओं को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास तभी व्यापक रूप से संभव है, जब वहां के युवा अपनी क्षमताओं का उपयोग कर नए अवसर पैदा करें। स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यमों के विकास से रोजगार के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।

आत्मनिर्भर समाज की दिशा में सामूहिक प्रयास

सम्मेलन में स्वदेशी अपनाने, स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने और युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत व्यक्ति से होती है और इसका प्रभाव परिवार, समाज तथा व्यापक अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है।

विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि नौकरी की तलाश के साथ-साथ रोजगार सृजन की सोच भी विकसित करनी चाहिए। अपनी प्रतिभा, कौशल और स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर युवा अपने भविष्य को बेहतर बनाने के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी योगदान दे सकते हैं।

सम्मेलन में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि स्वदेशी केवल देश में निर्मित वस्तुओं के उपयोग तक सीमित विचार नहीं है, बल्कि स्थानीय क्षमता पर विश्वास, स्वरोजगार को प्रोत्साहन और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की व्यापक अवधारणा है।इस अवसर पर कॉलेज स्टाफ की ओर से बक्शो देवी, भारती देवी, दीक्षा शर्मा, सविता, वीरेंद्र कुमार और रविकांत सहित अन्य उपस्थित रहे।

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