लखनऊ विश्वविद्यालय में संगोष्ठी: "नियमित योगाभ्यास और संतुलित आहार से मधुमेह को किया जा सकता है पूरी तरह नियंत्रित"

Seminar at Lucknow University: "Diabetes can be completely controlled through regular yoga practice and a balanced diet."
 
Seminar at Lucknow University: "Diabetes can be completely controlled through regular yoga practice and a balanced diet."

लखनऊ, 05 जून 2026:  वर्तमान समय में आम जनमानस में तेजी से बढ़ती मधुमेह (डायबिटीज) की गंभीर समस्या को देखते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा संकाय (योग विभाग) द्वारा एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस स्वास्थ्य जागरूकता संगोष्ठी का मुख्य विषय “योग के माध्यम से मधुमेह प्रबंधन” रखा गया था, जिसमें विशेषज्ञों ने इस साइलेंट किलर बीमारी से बचने के व्यावहारिक उपाय साझा किए।

मुख्य वक्ता ने दिए डायबिटीज कंट्रोल करने के मूल मंत्र

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री राकेश कुमार श्रीवास्तव ने मधुमेह को नियंत्रित और प्रबंधित करने में योग के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली के कारण यह बीमारी पैर पसार रही है, लेकिन थोड़े से अनुशासन से इसे सुधारा जा सकता है।

विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • नियमित योगाभ्यास: विशिष्ट योगासनों के जरिए शरीर में इंसुलिन के स्तर और पैंक्रियाज (अग्न्याशय) की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जा सकता है।

  • प्राणायाम का महत्व: सही तरीके से किया गया श्वसन अभ्यास (प्राणायाम) मानसिक तनाव को कम करता है, जो ब्लड शुगर बढ़ने का एक मुख्य कारण है।

  • संतुलित आहार व दिनचर्या: सही समय पर पौष्टिक भोजन लेना और एक अनुशासित दिनचर्या का पालन करना मधुमेह प्रबंधन की पहली शर्त है।

श्री श्रीवास्तव ने सत्र के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को स्वास्थ्य से जुड़े कई सरल उपाय और योगासनों की लाइव जानकारी दी, साथ ही उन्हें एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों की रही उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी के सफल आयोजन में योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता (Dean) प्रो. आलोक कुमार यादव तथा योग विभाग के समन्वयक डॉ. अमरजीत यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने भी युवाओं को योग को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।

इस संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकों, शोधार्थियों (Research Scholars) और भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि दवाइयों के साथ-साथ यदि योग को दैनिक जीवन में शामिल किया जाए, तो एक पूर्णतः स्वस्थ और दीर्घायु जीवन प्राप्त किया जा सकता है।

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