वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक कुमार कृष्णन को डॉ. विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ स्मृति-सम्मान

Dr. Vishnu Kishore Jha ‘Bechan’ Memorial Award for senior journalist and author Kumar Krishnan.
 
वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक कुमार कृष्णन को डॉ. विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ स्मृति-सम्मान

पटना। वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और विभूति फीचर्स एवं विनायक फीचर्स से जुड़े कुमार कृष्णन को डॉ. विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ स्मृति-सम्मान से सम्मानित किया गया। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में आयोजित जयंती समारोह के दौरान उन्हें वंदन-वस्त्र, प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न तथा 11 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई।

कुमार कृष्णन का चयन उनकी लंबी पत्रकारिता यात्रा तथा साहित्य, समाज और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर निरंतर एवं प्रभावशाली लेखन के लिए किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और पत्रकारिता के प्रति जिम्मेदारी को और मजबूती से निभाने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि लेखन और पत्रकारिता की सार्थकता तभी है, जब वह उन सवालों और आवाजों को सामने लाए जिन्हें व्यवस्था के शोर में अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।

डॉ. ‘बेचन’ का साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान

समारोह की अध्यक्षता बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने की। पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जबकि मिथिला विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रत्नेश्वर मिश्र मुख्य अतिथि रहे।

डॉ. अनिल सुलभ ने डॉ. विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ को हिंदी आलोचना के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. ‘बेचन’ ने आलोचना साहित्य को अधिक सरस और रचनात्मक स्वरूप प्रदान किया। वे आलोचक होने के साथ-साथ कवि, कथाकार और नाटककार भी थे। उनकी रचनाओं में साहित्यिक संवेदना के साथ व्यापक रचनात्मक दृष्टि दिखाई देती है।

उन्होंने बताया कि डॉ. ‘बेचन’ का बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन से गहरा जुड़ाव रहा। वे लंबे समय तक भागलपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष रहे और वर्ष 1996 से 2001 तक बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष का दायित्व भी संभाला।

साहित्य और समाज के प्रति समर्पित रहा लेखन

उद्घाटनकर्ता न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह ने कहा कि डॉ. ‘बेचन’ ने अपने साहित्यिक योगदान से बिहार का गौरव बढ़ाया। उनके रचनात्मक और आलोचनात्मक साहित्य ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। वे विद्वान, मनीषी और शिक्षाविद के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे।

मुख्य अतिथि प्रो. रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि डॉ. ‘बेचन’ का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उनकी रचनात्मकता और आलोचनात्मक दृष्टि आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने अपनी रचनाओं में वंचित और उपेक्षित वर्गों की आवाज को प्रमुखता दी तथा व्यापक सामाजिक सरोकारों को साहित्य का विषय बनाया। वे किसी एक विचारधारा की सीमाओं में बंधे हुए साहित्यकार नहीं थे। पुस्तकालय आंदोलन से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा और उन्होंने पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष का दायित्व निभाया।

परिजनों और साहित्यकारों ने किया स्मरण

समारोह में डॉ. ‘बेचन’ के पुत्र एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार झा, मगध विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार चौधरी, बिहार सरकार में संयुक्त सचिव रह चुके साहित्यकार डॉ. ब्रज किशोर पाठक, उनकी पुत्री डॉ. मीना ठाकुर, डॉ. रीना पाठक, डॉ. बी. एन. ठाकुर सहित अन्य वक्ताओं ने डॉ. ‘बेचन’ के व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान को याद किया।

कवि सम्मेलन में रचनाओं की प्रस्तुति

समारोह के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। चंदा मिश्र की वाणी वंदना से शुरू हुए कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि डॉ. रत्नेश्वर सिंह, शमा कौसर ‘शमा’, इरफान अहमद बेलहारबी, इंजीनियर अशोक कुमार, रजनीश कुमार गौरव, इंदु भूषण सहाय और राजेश शुक्ल सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

कार्यक्रम का मंच संचालन कवि ब्रह्मानंद पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सम्मेलन की प्रचार मंत्री विभारानी श्रीवास्तव ने किया।

समारोह में सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार इंजी. बांके बिहारी साव, डॉ. नागेश्वर प्रसाद यादव, प्रो. प्रत्यूष, सुधीर कुमार मिश्र, मृणाल कुमार पाठक, ईशा कुमारी, चंद्रमा चौधरी, शीला कुमारी, डॉ. चंद्रशेखर आजाद, सच्चिदानंद शर्मा, पूजा झा, सुनीता देवी और राकेश कुमार मंडल सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार, शिक्षाविद एवं साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

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