संविधान के नाम पर दोहरे मानदंडों पर गंभीर प्रश्न
संविधान के नाम पर गैजेट पर गंभीर प्रश्न
Sat, 3 Jan 2026
आज देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के समान अनुप्रयोग को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर मनुस्मृति, रामचरितमानस तथा हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के अपमान अथवा दहन की घटनाएँ सामने आती हैं, किंतु इन मामलों में प्रायः कानूनी कार्रवाई नहीं होती।
वहीं दूसरी ओर, यदि सर्वण समाज के लोग अपने सामाजिक या संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण की बात करते हैं, तो उन पर एससी/एसटी अधिनियम के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई की जाती है। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या कानून का प्रयोग सभी वर्गों पर समान रूप से हो रहा है।

यह भी एक तथ्य है कि एससी/एसटी अधिनियम सामाजिक न्याय और उत्पीड़न से संरक्षण के लिए बनाया गया है, किंतु इसके दुरुपयोग के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यदि किसी भी कानून का प्रयोग राजनीतिक लाभ या किसी एक वर्ग के विरुद्ध किया जाता है, तो यह सामाजिक संतुलन के लिए घातक हो सकता है।
देश की एकता और शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि कानून का प्रयोग निष्पक्ष, तथ्यपरक और बिना भेदभाव के हो। अन्यथा सामाजिक तनाव, अविश्वास और जातीय टकराव जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
