शशि थरूर का बयान जिसने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को नाराज़ कर दिया — क्या है पूरा मामला?
आज का टॉपिक है - शशि थरूर का वो बयान, जिसने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को नाखुश कर दिया। जी हां, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बीजेपी के दिग्गज नेता एल.के. आडवाणी को नेहरू और इंदिरा गांधी जैसा बता दिया। जन्मदिन की बधाई देने का सिलसिला था, लेकिन बात इतनी बढ़ गई कि सोशल मीडिया पर तूफान आ गया। क्या है इसकी पूरी कहानी? क्यों थरूर ने ऐसा कहा? और पार्टियों की क्या रिएक्शन आई? चलिए, डिटेल में समझते हैं।
बात शुरू होती है 8 नवंबर 2025 से। एल.के. आडवाणी अपना 98 वां जन्मदिन मना रहे थे। ये वही आडवाणी हैं, जिन्हें इस साल भारत रत्न मिला। बीजेपी के फाउंडिंग मेंबर्स में से एक, पूर्व डिप्टी पीएम, जिनकी रथ यात्रा ने 90 के दशक में पूरे देश को हिला दिया था। शशि थरूर, जो थिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद हैं और CWC मेंबर भी, उन्होंने X पर आडवाणी को बर्थडे विश किया। लिखा - 'वेनरेबल श्री एल.के. आडवाणी को 98वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! उनकी सार्वजनिक सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता, उनकी विनम्रता और सभ्यता, और आधुनिक भारत की दिशा निर्धारित करने में उनकी भूमिका अमिट है। एक सच्चे राजनेता जिनकी सेवा का जीवन अनुकरणीय है।' साथ में आडवाणी के साथ उनकी एक पुरानी फोटो भी शेयर की। अब ये तो ठीक लग रहा था, लेकिन जैसे ही ये पोस्ट वायरल हुई, ट्रोल्स और क्रिटिक्स ने हमला बोल दिया। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने रिप्लाई किया - 'सॉरी मिस्टर थरूर, देश में 'ड्रैगन सीड्स ऑफ हेट्रेड' बोना पब्लिक सर्विस नहीं है।' ये इशारा था आडवाणी की 1990 की राम रथ यात्रा की ओर, जिसके बाद बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ और देशभर में दंगे भड़क गए। ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, उस दौरान 1800-2000 लोग मारे गए, ज्यादातर मुस्लिम। थरूर ने इसका जवाब दिया - 'सहमत हूं, लेकिन उनकी लंबी सेवा को एक एपिसोड पर जज करना अनफेयर है। नेहरू जी की पूरी करियर को चीन की हार से नहीं मापा जा सकता, न ही इंदिरा गांधी की को इमरजेंसी से अकेले। आडवाणी जी को भी यही सम्मान मिलना चाहिए।' बस, यहीं से विवाद फूट पड़ा!
अब सवाल ये है - थरूर ने आखिर क्यों नेहरू और इंदिरा का नाम लिया ? देखिए, थरूर का पॉइंट था कि किसी लीडर की लिगेसी को एक मिस्टेक से नहीं मापना चाहिए। नेहरू को चीन युद्ध की 1962 की हार के लिए याद किया जाता है, जहां भारत को पीछे हटना पड़ा। इंदिरा को 1975-77 की इमरजेंसी के लिए, जब सिविल लिबर्टीज़ सस्पेंड हो गईं। लेकिन दोनों की लिगेसी इससे कहीं बड़ी है - नेहरू ने इंडिया को सिक्युलर डेमोक्रेसी बनाया, इंदिरा ने 1971 का बांग्लादेश वॉर जीता। थरूर कह रहे थे कि आडवाणी की BJP को नेशनल लेवल पर लाने वाली रथ यात्रा को भी एक 'एपिसोड' मानकर नजरअंदाज न करें। लेकिन ये तुलना दोनों पार्टियों को चुभ गई। क्यों? चलिए देखते हैं रिएक्शन्स।
सबसे पहले कांग्रेस। पार्टी ने थरूर से दूरी बना ली। चेयरमैन मीडिया एंड पब्लिसिटी पवन खेड़ा ने ट्वीट किया - 'जैसा हमेशा, डॉ. शशि थरूर खुद की ओर से बोलते हैं। इंडियन नेशनल कांग्रेस उनके हालिया बयान से पूरी तरह अलग है। लेकिन वो CWC मेंबर के तौर पर ये सब कहते रहें, ये INC की डेमोक्रेटिक और लिबरल स्पिरिट दिखाता है।' मतलब, थरूर को डांट तो नहीं पड़ी, लेकिन पार्टी ने साफ कह दिया - ये उनका पर्सनल ओपिनियन है। कांग्रेस के कई लीडर्स और सपोर्टर्स ने इसे 'व्हाइटवॉशिंग' कहा।
अब बीजेपी की बारी। वो तो खुश होनी चाहिए न? लेकिन नहीं! BJP ने कांग्रेस को ही निशाना बनाया। नेशनल स्पोक्सपर्सन शहजाद पूनावाला ने कहा - 'कांग्रेस को 'इंडियन नेशनल कांग्रेस' से 'इंदिरा नाजी कांग्रेस' नाम बदल लेना चाहिए। थरूर का आडवाणी को बर्थडे विश करना इमरजेंसी-स्टाइल बिहेवियर है। पार्टी ने उन पर फतवा जारी कर दिया!' सी.आर. केसवान ने बोला - 'कांग्रेस इतनी intolerant है कि बेसिक सिविलिटी भी बर्दाश्त नहीं कर सकती। नेहरू-गांधी फैमिली की इनसिक्योरिटी साफ दिख रही है।' बीजेपी ने इसे कांग्रेस की 'इमरजेंसी माइंडसेट' बताया। एक स्पोक्सपर्सन ने कहा - 'थरूर ने आडवाणी को नेहरू-इंदिरा से कंपेयर किया, लेकिन कांग्रेस को नेहरू की सच्चाई सुननी पड़ी तो घबरा गई।' X पर BJP सपोर्टर्स ने मीम्स बनाए - एक में थरूर को 'कांग्रेस का ट्रोजन हॉर्स' दिखाया। लेकिन गौर करने वाली बात - BJP ने थरूर की तारीफ तो की नहीं, बल्कि कांग्रेस को ही कोसा।
कुल मिलाकर, थरूर ने एक साधारण बर्थडे विश को नेशनल डिबेट बना दिया। क्या ये पॉलिटिक्स की मैच्योरिटी दिखाता है, या सिर्फ ड्रामा? तो ये था थरूर-आडवाणी विवाद की पूरी स्टोरी। थरूर सही थे या गलत? कमेंट्स में बताएं। अगर वीडियो अच्छा लगा तो लाइक करें, चैनल सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएं ताकि नोटिफिकेशन मिले।
