शिमला:प्रकृति के चितेरे की मनमोहक तस्वीर

Shimla: A captivating picture of nature's painter
 
शिमला:प्रकृति के चितेरे की मनमोहक तस्वीर

(संजीव शर्मा- विनायक फीचर्स) शाम का समय है और पहाड़ों की रानी शिमला में दिनभर की हलचल के बाद सूरज धीरे-धीरे पहाड़ी चोटियों के पीछे छिपने को तैयार है। यह वही पल है, जब प्रकृति अपनी सबसे अनोखी कलाकारी दिखाती है। आसमान पर लाल, केसरिया और गुलाबी रंगों की परतें चढ़ जाती हैं, मानो उसने सिंदूरी ओढ़नी पहन ली हो। इस अद्भुत दृश्य को देखकर मन ठहर-सा जाता है और आत्मा को भी एक अनोखी शांति मिलती है।

ऐसा नजारा देखकर लगता है जैसे कई पुराने और नए गीतों की पंक्तियां यहीं जन्मी हों—कहीं

ऐसा नजारा देखकर लगता है जैसे कई पुराने और नए गीतों की पंक्तियां यहीं जन्मी हों—कहीं "सूरज हुआ मद्धम, चांद जलने लगा" का जादू, तो कहीं "शाम गुलाबी" की मिठास। दिनभर सूरज की किरणों में चमकते पहाड़, शाम ढलते ही ध्यानमग्न साधुओं की तरह शांत हो जाते हैं। हल्की ठंडक, पेड़ों की पत्तियों की सरसराहट और पक्षियों का मधुर कलरव—सब मिलकर सूरज के विदाई गीत-सा माहौल बना देते हैं।

इस वक्त प्रकृति रंग बदलने में माहिर किसी कलाकार की तरह लगती है—पहले हल्का पीला, फिर सुनहरा और अंत में गहरा सिंदूरी। ये रंग जब घाटियों, पेड़ों और पहाड़ों पर उतरते हैं, तो लगता है जैसे आसमान ने चांद के स्वागत के लिए अपना सबसे सुंदर रूप सजा लिया हो। सफेद बादल भी सुनहरे परिधान में बदल जाते हैं, और रात होते-होते पहाड़ों पर घरों की रोशनी आसमान के सितारों-सी चमकने लगती है।

यही वह समय है, जिसका इंतजार पर्यटक भी करते हैं। कैमरों में कैद करने के साथ वे इस नजारे को दिल में भी संजो लेते हैं। यह सिंदूरी शाम केवल दृश्य नहीं, बल्कि एक एहसास है—जो हमें सिखाती है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में भी कुछ पल ठहरकर शांति से जीना जरूरी है।

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