‘दिल पड़ोसी’ में मंजरी के किरदार से खुद की पहचान तलाश रहीं शिवानी एम. सिंह, बोलीं- कभी-कभी कोई हमें खुद से मिलवा देता है
शेमारूमी की रिलेशनशिप ड्रामा सीरीज में अभिनेत्री ने निभाया गृहिणी का संवेदनशील किरदार, रिश्तों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच संतुलन की कहानी को किया साझा
मुंबई, नवंबर 2026। कई बार जिंदगी में किसी नए व्यक्ति का आना हमें बदलने के बजाय अपने भीतर छिपी भावनाओं और भूली हुई पहचान को समझने का मौका देता है। शेमारूमी की रिलेशनशिप ड्रामा सीरीज ‘दिल पड़ोसी’ में अभिनेत्री शिवानी एम. सिंह का मंजरी वाला किरदार इसी भावनात्मक पहलू को सामने लाता है। एक ऐसी गृहिणी, जो परिवार की जिम्मेदारियां निभाते-निभाते अपनी इच्छाओं और खुशियों को पीछे छोड़ चुकी है और अब खुद को नए सिरे से समझने की कोशिश कर रही है।
सीरीज में मंजरी और उसके पति मोहक की शादीशुदा जिंदगी बाहर से सामान्य नजर आती है, लेकिन उनके रिश्ते में भावनात्मक और शारीरिक नजदीकियों की कमी है। दोनों के बीच मौजूद यह दूरी उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब दीया और रोनक नाम का एक बेबाक और खुले विचारों वाला जोड़ा उनके पड़ोस में रहने आता है।
रोनक का सहज व्यवहार और मंजरी की बातों को ध्यान से सुनने का अंदाज उसे लंबे समय बाद यह एहसास कराता है कि उसकी भावनाओं और इच्छाओं की भी अहमियत है। इस अनुभव के बाद वह अपने भीतर दबे सवालों और अधूरी जरूरतों को समझने लगती है।
मंजरी की कहानी खुद को पहचानने की यात्रा है : शिवानी
अपने किरदार के बारे में बात करते हुए शिवानी एम. सिंह ने कहा, “कभी-कभी कोई नया इंसान हमें बदलता नहीं, बल्कि हमारे अंदर छिपे उस रूप से मिलवाता है, जिसे हम खुद भी भूल चुके होते हैं। मुझे लगता है कि यही बात मंजरी की कहानी को खास बनाती है। उसने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा अपने घर और शादी को संभालने में लगा दिया। इस दौरान वह खुद से यह पूछना ही भूल गई कि उसे क्या चाहिए और किस चीज से खुशी मिलती है। जब कोई उसे यह एहसास कराता है कि उसकी भावनाएं और उसकी मौजूदगी भी मायने रखती हैं, तो उसके मन में दबे सवाल फिर से सामने आने लगते हैं।”
शिवानी के अनुसार, मंजरी के भीतर अपनी पहचान और भावनाओं को लेकर सवाल पहले से मौजूद थे। रोनक का अपनापन उन भावनाओं को सामने लाने का माध्यम बनता है। इसलिए यह कहानी केवल किसी नए व्यक्ति के प्रभाव की नहीं, बल्कि एक महिला के आत्मबोध की भी है।
रिश्तों में जिम्मेदारियों के बीच अपनी पहचान खो देती है मंजरी
मंजरी का किरदार उन महिलाओं की स्थिति को दर्शाता है, जो घर और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं को प्राथमिकता देना भूल जाती हैं। उसके लिए परिवार और वैवाहिक जीवन हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगता है कि केवल रिश्तों को निभाते रहना और उनके भीतर खुश रहना दो अलग-अलग अनुभव हैं।
अभिनेत्री ने अपने किरदार की भावनात्मक जटिलता पर बात करते हुए कहा, “मैं मंजरी को ऐसे किरदार के रूप में नहीं देखती, जो अचानक पूरी तरह बदल जाती है। उसके अंदर हमेशा से एक ऐसा हिस्सा था, जो चाहता था कि कोई उसे समझे, उसे प्यार करे और सिर्फ किसी की पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि एक अलग इंसान के तौर पर देखे। बदलाव सिर्फ इतना आता है कि वह खुद अपनी भावनाओं को समझने और स्वीकार करने लगती है। इस किरदार को निभाना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उसका असली बदलाव उसके मन के अंदर हो रहा है, जिसे पर्दे पर दिखाना आसान नहीं था।”
सही-गलत से आगे जाकर समझना होगा मंजरी का किरदार
शिवानी का मानना है कि मंजरी के फैसलों को केवल सही या गलत के पैमाने पर नहीं परखना चाहिए। उसके व्यवहार के पीछे अकेलापन, भावनात्मक जरूरतें और अपनी पहचान को समझने की इच्छा जैसी कई परतें हैं। यही पहलू इस किरदार को संवेदनशील और वास्तविक बनाते हैं।
‘दिल पड़ोसी’ में मंजरी की यात्रा यह दिखाती है कि रिश्तों को निभाने के साथ अपनी भावनाओं और व्यक्तिगत पहचान को समझना भी जरूरी है। कभी-कभी किसी दूसरे का अपनापन हमें उन जरूरतों और इच्छाओं का एहसास करा देता है, जिन्हें हम लंबे समय से नजरअंदाज करते आए होते हैं। छह एपिसोड की हिंदी रिलेशनशिप ड्रामा सीरीज ‘दिल पड़ोसी’ का प्रीमियर 15 अक्टूबर 2026 को शेमारूमी के ‘शेमारू प्रीमियर’ के अंतर्गत हुआ था।
