गोंडा मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा: पर्चे से काटकर बाहर भेजी जा रही दवाइयां, डीएम की फटकार के बाद जागे अफसर
गोंडा के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में मरीजों और उनके तीमारदारों को स्वास्थ्य सेवाओं में भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में ओपीडी के दौरान बुखार, दर्द, आई ड्रॉप, त्वचा रोग, तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग सहित कई प्रमुख बीमारियों की आवश्यक दवाएं खत्म हो गई हैं। डॉक्टरों से परामर्श लेने के बाद जब मरीज काउंटर पर पहुँच रहे हैं, तो उन्हें आधी-अधूरी दवाएं देकर लौटाया जा रहा है या बाहर से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी नहीं मिल रहीं दवाएं
अस्पताल के काउंटर नंबर 16 पर सुबह से ही दवाओं के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं।
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पर्चे पर चल रही 'कांट-छांट': मरीजों का आरोप है कि वितरण कक्ष में बैठे कर्मचारी डॉक्टर द्वारा लिखे गए पर्चे पर मौजूद दवाओं को काटकर कह रहे हैं कि ये दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, इन्हें मेडिकल स्टोर से खरीद लें।
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मरीजों की व्यथा: दवा लेने आए सत्यम शुक्ला, कप्तान सिंह और अन्य मरीजों ने बताया कि सुबह से लाइन में खड़े रहने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बाहर से दवाइयां खरीदना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।
डीएम प्रियंका निरंजन ने प्रिंसिपल को लगाई कड़ी फटकार
अस्पताल में दवाओं की भारी किल्लत की सूचना जैसे ही प्रशासनिक स्तर तक पहुँची, जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने तत्काल संज्ञान लिया। डीएम ने मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल को फोन कर व्यवस्था पर सख्त नाराजगी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई और जल्द से जल्द सभी जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।
डीएम के रुख के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और तुरंत आपातकालीन दवाओं का ऑर्डर जारी किया गया।
सीएमएस का बयान: 'परिवहन की कमी के कारण हुई देरी'
मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अनिल तिवारी ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा मुख्य स्टोर रूम (काजीदेवर) से दवाएं अस्पताल लाने के लिए वाहनों की कमी के चलते यह समस्या उत्पन्न हुई थी। एम्बुलेंस व उपलब्ध साधनों के माध्यम से दवाओं की खेप मंगा ली गई है। शीघ्र ही सभी वितरण काउंटरों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध हो जाएगा, जिससे मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।" स्वास्थ्य प्रशासन का दावा है कि दवाओं का स्टॉक फिर से सुचारू कर दिया गया है ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को निर्बाध इलाज मिल सके।

